Infamous crook sanjeev Jeeva : पश्चिमी उत्तर प्रदेश के साथ हरियाणा, दिल्ली समेत अन्य कई राज्यों में आतंक का पर्याय बने कुख्यात अपराधी संजीव माहेश्वरी उर्फ जीवा के खिलाफ मुजफ्फरनगर जिला प्रशासन ने कुर्की की बड़ी कार्रवाई की है। महावीर चौक स्थित कमर्शियल कॉम्पलेक्स को प्रशासन ने कुर्क कर लिया है।
उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में भाजपा सरकार 2.0 के गठन के बाद से ही लगातार प्रदेश भर में अपराधियों पर लगातार शिकंजा कसती जा रही है। मुजफ्फरनगर में कुख्यात अपराधी संजीव माहेश्वरी उर्फ जीवा की 4 करोड़ रुपये की कीमत की संपत्ति को जिला प्रशासन ने कुर्क कर लिया है। बता दें कि पिछले दिनों ही मुजफ्फरनगर विकास प्राधिकरण के अधिकारियों ने अवैध निर्माण के चलते संपत्ति को सील किया था। अब उसी संपत्ति को जिला प्रशासन ने धारा 14 (1) के तहत कुर्क कर लिया है।
मुजफ्फरनगर में अपराधियों पर चल रही बड़ी कार्रवाई के तहत पश्चिम उत्तर प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली सहित अन्य कई राज्यों में आतंक का पर्याय बने कुख्यात अपराधी संजीव माहेश्वरी उर्फ जीवा पुत्र ओमप्रकाश माहेश्वरी निवासी आदमपुर थाना कोतवाली शामली हाल का पता प्रेमपुरी, मुजफ्फरनगर के खिलाफ की गई गैंगस्टर एक्ट 14(1) की कार्यवाही में उसकी थाना सिविल लाइन क्षेत्र के महावीर चौक स्थित कमर्शियल कॉम्पलेक्स की संपत्ति को कुर्क किया गया है। जिसकी कीमत लगभग 4 करोड़ रुपए बताई जा रही है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, अपराधी संजीव माहेश्वरी उर्फ जीवा वर्ष 1995 से लगातार संगीन घटनाओं को अंजाम देता रहा है।
हत्या, लूट, डकैती और रंगदारी के दो दर्जन केस हैं जीवा पर
बता दें कि अपराधी संजीव उर्फ जीवा गैंग लीडर अपराधी है, जिसके खिलाफ हत्या, रंगदारी, लूट, डकैती, अपहरण, गैंगस्टर जैसी संगीन धाराओं में दो दर्जन मुकदमे दर्ज हैं। नगर मजिस्ट्रेट एसपी सिटी अर्पित विजयवर्गीय, सीओ सिटी कुलदीप सिंह, कोतवाली प्रभारी आनंद देव मिश्रा और थाना सिविल लाइन प्रभारी संतोष त्यागी कई थानों की फोर्स के साथ महावीर चौक पहुंचे। जहां भारी पुलिस बल की मौजूदगी में कुख्यात संजीव जीवा का 131 वर्गमीटर में बना 3 मंजिला कमर्शियल कॉम्पलेक्स कुर्क कर लिया।
अवैध तरीके से अर्जित की थी संपत्ति
पुलिस के अनुसार यह संपत्ति संजीव जीवा ने अवैध तरिके से अर्जित की थी। जिसकी कीमत लगभग 4 करोड़ रुपये है। यह कार्यवाही पुलिस ने उत्तर प्रदेश गिरोहबन्द एवं समाज विरोधी क्रियाकलाप निवारण अधिनियम 1986 की धारा-14(1) के तहत की है।