25 अगस्त 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

6 साल बाद आया बड़ा फैसला, मुजफ्फरनगर में मां को पिटने से बचाते हुए होमगार्ड पर किया था चाकू से जानलेवा हमला

Muzaffarnagar News: जज रवि कुमार दिवाकर ने सुनाया ऐतिहासिक फैसला। मुजफ्फरनगर में ड्यूटी के दौरान होमगार्ड रतिराम पर चाकू से हमला करने वाले हत्यारे दीपक को कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई है। पढ़ें पूरी खबर...
2 min read
Google source verification
Home Guard Ratiram Murder Case

आरोपी दीपक को कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई

Home Guard Ratiram Murder Case: यूपी के मुजफ्फरनगर की एक अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। ड्यूटी के दौरान एक होमगार्ड की चाकू मारकर हत्या करने वाले दोषी दीपक को कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई है। यह ऐतिहासिक फैसला अपर जिला एवं सत्र न्यायालय के न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर ने सुनाया। फैसला सुनाते हुए जज ने कहा कि पुलिस बल हमारे समाज की रीढ़ की हड्डी है। जब कानून की रक्षा करने वाले पर ही हमला होता है, तो सिर्फ एक इंसान की जान नहीं जाती, बल्कि पूरी कानून-व्यवस्था पर से जनता का भरोसा उठ जाता है। ऐसे में कोर्ट की जिम्मेदारी है कि वह अपराधियों को सख्त सजा देकर जनता का भरोसा फिर से जीते।

क्या था पूरा मामला?

यह खौफनाक वारदात 4 जून 2020 की है। मुजफ्फरनगर के कोतवाली नगर थाने में तैनात कॉन्स्टेबल इस्लाम अली और होमगार्ड रतिराम बुढ़ाना मोड़ के पास गश्त (पेट्रोलिंग) कर रहे थे। इसी दौरान उन्हें पास की एक गली से किसी के चीखने-चिल्लाने की आवाज सुनाई दी। दोनों पुलिसकर्मी तुरंत आवाज की तरफ भागे और एक मकान के अंदर पहुंचे। वहां दीपक नाम का एक लड़का अपनी ही मां के साथ मारपीट कर रहा था।

बीच-बचाव करने पर कर दिया हमला

जब होमगार्ड रतिराम और कॉन्स्टेबल ने दीपक को रोकने की कोशिश की, तो वह गुस्से में पागल हो गया। उसने पास में रखी एक धारदार छुरी उठाई और पुलिसवालों पर हमला कर दिया। इस हमले में उसने होमगार्ड रतिराम के पेट में इतनी बेरहमी से छुरी घोंपी कि उनकी आंतें बाहर आ गई। वारदात के बाद आरोपी भाग गया, लेकिन पुलिस ने अगले ही दिन उसे खून से सनी छुरी के साथ गिरफ्तार कर लिया था।

4 महीने तक अस्पताल में लड़ी जिंदगी की जंग

इस जानलेवा हमले में होमगार्ड रतिराम गंभीर रूप से घायल हो गए थे। उन्हें तुरंत मेरठ मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया। करीब चार महीने तक अस्पताल में जिंदगी और मौत से जूझने के बाद, आखिरकार 4 अक्टूबर 2020 इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने इस मामले में 13 गवाहों और डॉक्टरों की रिपोर्ट के आधार पर दीपक को दोषी माना और उसे फांसी की सजा सुना दी।

फैसला सुनाते हुए जज ने पढ़ी भावुक कर देने वाली कविताएं

इस मामले का फैसला लिखते हुए जज साहब भी काफी भावुक हो गए। उन्होंने अपने फैसले में दो छोटी कविताएं भी लिखी-

पहली कविता- वह निकला था घर से, लौटने के वादे के साथ, मगर लौट आया तिरंगे की छांव के साथ। जिस हाथ में कानून की ढाल थी, उसी सीने पर चाकू का वार हुआ। एक प्रहरी गिरा तो लगा जैसे न्याय का आकाश ही लहूलुहान हो गया।

दूसरी कविता- माना कि पुलिस है खराब, पर बिना पुलिस के चलकर देखो। रोकेंगे हर राह गुंडे-बदमाश, बिना पुलिस के रहकर देखो।

बड़ी खबरें

View All

मुजफ्फरनगर

उत्तर प्रदेश

ट्रेंडिंग