
Old Man Beaten in Police Station In Muzaffarnagar Police Keeps Mum
मुजफ्फरनगर। जिनके हाथों में जनता की सुरक्षा सरकार ने दी है वही जब जनता के ऊपर होते हुए अत्याचारों को देखकर तमाशबीन की तरह बैठे रहे तो जनता को कौन बचाएगा. सिस्टम की घोर लापरवाही की इससे बड़ी बानगी और क्या होगी. ऐसा ही एक मामला मुजफ्फरनगर में मंगलवार को देखने को मिला जब 50 वर्षीय एक व्यक्ति पर थाने में पुलिस के सामने दो अज्ञात बदमाशों ने हमला बोल दिया और पीट-पीटकर उस व्यक्ति के दांत तोड़ डाले. पुलिस चौकी में लहूलुहान पीड़ित व्यक्ति पुलिस से रो-रोकर मदद की गुहार लगाता रहा लेकिन कोई भी पुलिसकर्मी उस व्यक्ति की मदद के लिए आगे नहीं आया. बल्कि तमाशबीन की तरह पुलिस वाले उसकी पिटाई का तमाशा देखते रहे. उत्तर प्रदेश पुलिस की मानवता को शर्मसार कर देने वाली यह घटना एक बड़ा सवाल है कि जिनके हाथों में जनता की सुरक्षा है वह जनता को पिटता हुआ देखकर तमाशबीन की तरह नजारा क्यों देख रहे हैं।
दरअसल पुरकाजी थाना के गांव नूरनगर निवासी ईश्वर सिंह पुत्र मोल्हड सिंह काफी समय से थाने में रहकर कार्य करता रहता है। दोपहर के समय ईश्वर थाने में आए लोगों को पानी पिला रहा था। तभी गांव नूरनगर के दो दबंग युवक थाने के अंदर घुसे और ईश्वर के साथ जमकर मारपीट की. उन्होंने उसके दांत तक तोड़ दिए गए। इस मामले में सबसे ज्यादा हैरान कर देने वाली बात तो यह है कि यह घटना थाना पुरकाजी पुलिस के सामने हुई। घायल ने पुलिस द्वारा मारपीट करवाने का आरोप लगाया है। जब एक आम आदमी थाने में ही महफूज नही है तो बाहर आखिर कैसे महफूज रहेगा। घायल रोता हुआ अपनी सुरक्षा की गुहार लगाता रहा। लेकिन पुलिस ने उसकी कोई बात नही सुनी। मामला मीडि़या में प्रकाश में आने पर पुलिस ने दबाव के चलते पीड़ित को मेडि़कल के लिए भेज दिया। पुलिस दोनो युवको को तलाशने में लगी है।
मीडिया ने जब इस मामले में पुलिस अधिकारियों से बात करनी चाही तो पुलिस अधिकारियों ने इस मामले पर बात करने से साफ मना कर दिया और पीड़ित व्यक्ति को पागल करार दे दिया। पुलिस अधिकारियों के पीड़ित को पागल करार दिए जाने की बात पर बड़ा सवाल यह है कि क्या किसी पागल व्यक्ति को पीटने का अधिकार मिल जाता है। पुरकाजी थाना पुलिस के साथ-साथ पुलिस अधिकारी भी इस मामले पर बड़ी लापरवाही दिखाते हुए नजर आए।
थाने में पीटने वाला व्यक्ति चाहे पागल हो या फिर स्वस्थ मस्तिष्क का रहा हो लेकिन दोनों ही सूरतों में पिटाई के बाद दांत तक तोड़ देना कहां तक सही है इसका जवाब शायद मुजफ्फरनगर की पुरकाजी थाना पुलिस के पास तो नहीं है लेकिन यहां के पुलिस अधिकारी भी इस पूरे मामले पर कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है। अब देखना यह होगा कि इस गरीब पीड़ित व्यक्ति को इंसाफ मिल पाता है या नहीं या फिर पुलिस पहले की तरह दबंगों के आगे नतमस्तक होकर इस मामले की लीपा पोती कर देती है।
अब इस मामले को देखते हुए सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि दबंगों और बदमाशों में से पुलिस का खौफ बिल्कुल खत्म हो चुका है ऐसे में जनता की सुरक्षा के दावे करने वाली पुलिस आखिर कहां तक सही साबित होती है। थाने में पीट रही जनता कैसे पुलिस पर विश्वास करेगी।
Published on:
29 Aug 2017 08:33 pm

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