
8वीं पास कर रहा था ऑपरेशन, जांच टीम पहुंची तो बीजेपी के इस नेता ने भगाया
शामली। उत्तर प्रदेश में लोगों की जिंदगी के साथ किस कदर खिलवाड़ हो रहा है उसका एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में 8वीं पास हॉस्पिटल का संचालक ऑपरेशन कर रहा है। लेकिन हैरान करने वाली बात ये है कि जब लोगों की शिकायत के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम जांच के लिए पहुंची तो, सत्ता का रसूख दिखाते हुए जांच टीम को अंदर घुसने से ही रोक दिया गया। इतना ही नहीं बीजेपी नेता पर स्वास्थ्य विभाग को धमकी दे कर वहां से भगा दिया।
8वीं पास कर रहा ऑपरेशन-
दरअसल वायरल वीडियो शामली शहर के एमएस के रोड स्थित चर्चित प्राइवेट आर्यन हॉस्पिटल का है। जिसका संचालन 8वीं पास युवक नरदेव पिछले काफी समय से करता आ रहा है। शहर का यह चर्चित हॉस्पिटल शहर के बीचों बीच कूड़ाना बस स्टैंड के पास स्थित है। हाल ही में आर्यन हॉस्पिटल का एक स्टिंग वीडियो सोशल साइट्स पर बहुत तेजी से वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में दावा किया जा रहा है वीडियो आर्यन हॉस्पिटल का है। जिसमे कक्षा 8वीं पास आर्यन हॉस्पिटल मालिक नरदेव सिंह एक मरीज का ऑपरेशन कर रहा है और एक महिला कंपाउण्डर मरीज को एनएसथीसिया यानी बेहोशी का इंजेक्शन दे रही है। आप खुद अंदाज लगा सकते है कि किस तरह से लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।
बीजेपी नेता ने जांच टीम को दी धमकी-
वहीं इस वीडियो के सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया। मामले पर सीएमओ डॉ राजकुमार ने बताया कि एक अज्ञात व्यक्ति द्वारा वीडियो देकर शिकायत की गई। लोगों की शिकायतों के बाद जांच के लिए एसीएमओ डॉक्टर अशोक कुमार हांडा के नेतृत्व में विभाग की टीम आर्यन हॉस्पिटल पहुंची थी। लेकिन सत्ताधारी पार्टी बीजेपी के जिलाध्यक्ष पहले से ही वहां मौजूद थे। जैसे ही हॉस्पिटल में जांच के लिए पहुंची स्वास्थ्य विभाग की टीम को ऑपरेशन रूम में नही घुसने दिया गया है। आरोप है कि वहा मौजूद सत्ताधारी नेता पवन तरार ने एसीएमओ अशोक कुमार और स्वास्थ्य विभाग की टीम को ट्रांसफर कराने तक कि धमकी दे डाली। इसके बाद हॉस्पिटल स्टाफ व बीजेपी जिला अध्यक्ष पवन तरार के विरोध को बढ़ता देख एसीएमओ अशोक कुमार व स्वास्थ्य विभाग की टीम को वहां से वापस लौटना पड़ा।
पहले भी सीज हो चुका है हॉस्पिटल-
हालाकि जब इस पूरे प्रकरण की कवरेज के लिए मीडिया पहुंची तो बीजेपी जिलाअध्यक्ष मौके से भाग खड़े हुए। फिलहाल सीएमओ शामली ने हॉस्पिटल मालिक को एक नोटिस जारी कर दिया है और तीन दिन बाद चर्चित हॉस्पिटल पर कार्रवाई किये जाने की बात कही है। वैसे ये पहला मामला नहीं है जब हॉस्पिटल पर इस तरह के आरोप लगे हों। इससे पहले भी तीन बार अनिमिताओं के चलते इसे सीज किया जा चुका है। लेकिन राजनीतिक संरक्षण और जिला प्रशासन की साठगांठ के चलते कुछ समय बाद दुबारा चालू कर दिया जाता हैं।
एक साल में लगभग 25 मरीजों की हो चुकी है मौत-
जानकारी के मुताबिक हॉस्पिटल में इलाज के दौरान करीब 1 साल में लगभग 22 से 25 मरीजों की मौत हो चुकी है। जिनमें से पांच मृतकों के परिजनों ने डॉक्टर और हॉस्पिटल के खिलाफ धारा 304 का मुकदमा भी दर्ज कराया है, जो कोर्ट में विचाराधीन है। वहीं लोगों का आरोप है कि हॉस्पिटल में ऐसे डॉक्टरों को रखा गया है जिनके पास किसी भी प्रकार की डिग्री नहीं है। ऐसे में बड़ा सवाल ये है कि जब हॉस्पिटल पहले भी सीज हो चुका है तो उस पर नियंत्रण क्यों नहीं है। क्या स्वास्थ्य विभाग की टीम इस सत्ताधारी पार्टी के नेता के दबाव के बाद वापस लौटी है, आखिर क्यों इन मौत के अस्पतालों को सत्ताधारी पार्टी का है संरक्षण।
Published on:
04 Jul 2018 12:58 pm
बड़ी खबरें
View Allमुजफ्फरनगर
उत्तर प्रदेश
ट्रेंडिंग
