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17.64 करोड़ गए पानी में! बैंक रहित गांवों में लगाए 299 एटीएम से एक भी ट्रांजेक्शन नहीं

प्रदेशभर में लगी 14,891 ई-मित्र प्लस मशीनें भी धूल फांक रहीं, रखरखाव पर दो साल में 6 करोड़ खर्च, राजस्थान सरकार की ई-मित्र प्लस परियोजना करोड़ों रुपए खर्च होने के बावजूद सवालों के घेरे में
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नागौर

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Shyam Lal Choudhary

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Updated: 30 Jun 2026, 10:50 AM IST

299 एटीएम मशीनों पर 17 करोड़ 64 लाख 10 हजार रुपए खर्च

299 एटीएम मशीनों पर 17 करोड़ 64 लाख 10 हजार रुपए खर्च

नागौर. प्रदेश के बैंक रहित गांवों में बैंकिंग सुविधाएं पहुंचाने और डिजिटल वित्तीय सेवाओं का विस्तार करने के उद्देश्य से वर्ष 2018 में शुरू की गई एटीएम सुविधा करोड़ों रुपए खर्च करने के बावजूद सवालों के घेरे में है। करीब 9 साल पहले बैंक रहित गांवों में 299 एटीएम मशीनों पर 17 करोड़ 64 लाख 10 हजार रुपए खर्च किए गए, लेकिन इनमें एक बार भी ट्रांजेक्शन नहीं हुआ। यानी जनता से वसूले गए टैक्स के 17.64 करोड़ रुपए पानी में बहा दिए गए और विभाग इस मामले की जांच कराना तक उचित नहीं समझ रहा है।

विधानसभा में एक प्रश्न के जवाब में राज्य सरकार के सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार विभाग ने बताया कि वर्ष 2017 की बजट घोषणा के तहत आम नागरिकों तक वित्तीय सशक्तीकरण पहुंचाने के लिए ‘एंड टू एंड डिप्लॉयमेंट एंड मैनेज्ड सर्विसेज ऑफ एटीएम’ परियोजना वर्ष 2018 में शुरू की गई थी। परियोजना के तहत सीएमएस इन्फो सिस्टम्स लिमिटेड को खुली निविदा प्रक्रिया के माध्यम से 600 एटीएम मशीनों के लिए 11 जून 2018 को कार्यादेश जारी किया गया था, जिसके तहत 299 एटीएम मशीनें जुलाई 2018 से मार्च 2019 के बीच आरआईएसएल की ओर से चिह्नित स्थानों, मुख्य रूप से ग्राम पंचायत कार्यालयों में स्थापित की गईं। इन 299 मशीनों की खरीद और स्थापना पर 17 करोड़ 64 लाख 10 हजार रुपए खर्च किए गए। प्रति मशीन लागत 5 लाख 90 हजार रुपए (जीएसटी सहित) रही। ये एटीएम ग्राम पंचायतों में केवल शो-पीस बनकर खड़े हैं, इनमें न तो पैसे डाले गए और न ही कभी निकालने की नौबत आई। इसके बावजूद ठेकेदार फर्म को भुगतान कर दिया गया।

14,891 ई-मित्र प्लस मशीनें खरीदी, ज्यादातर जगह उपयोग नहीं

एटीएम मशीनों की तरह सरकार ने वर्ष 2017-18 एवं 2018-19 की बजट घोषणाओं के तहत प्रदेशभर में 9,891 ग्रामीण और 5,000 शहरी क्षेत्रों के लिए मिलाकर कुल 14,891 ई-मित्र प्लस मशीनें खरीदी। हालांकि कई जिलों में ये मशीनें वर्षों से उपयोग के अभाव में धूल फांक रही हैं। सरकार ने स्वयं स्वीकार किया है कि कई मशीनें स्क्रैप (कबाड़) हो चुकी हैं। नागौर जिले में जिला मुख्यालय पर कॉलेज, कलक्ट्रेट, एसडीएम कार्यालय सहित अन्य स्थानों पर रखी गई ई-मित्र प्लस की मशीनें धूल फांक रही हैं।

बंद पड़ी मशीनों पर भी रखरखाव का खर्च

परियोजना की उपयोगिता पर सवाल इसलिए भी उठ रहे हैं, क्योंकि दिसम्बर 2021 से दिसम्बर 2023 के बीच केवल दो वर्षों में इन मशीनों की एएमसी (एनुअल मेंटेनेंस चार्जेस) पर करीब 6 करोड़ रुपए खर्च किए गए। सरकार का दावा है कि वर्तमान में 14,808 मशीनें कार्यशील हैं और उनके रखरखाव के लिए जिला कार्यालयों को बजट उपलब्ध कराया गया है।

अब उठ रहे बड़े सवाल

बैंकिंग सुविधा से वंचित गांवों तक वित्तीय सेवाएं पहुंचाने के उद्देश्य से शुरू हुई इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर करोड़ों रुपए खर्च होने के बावजूद यदि 299 एटीएम मशीनों से एक भी लेन-देन नहीं हुआ, तो यह परियोजना की योजना, क्रियान्वयन और निगरानी— तीनों पर गंभीर सवाल खड़े करती है। दूसरी ओर, प्रदेशभर में हजारों ई-मित्र प्लस मशीनों के सीमित उपयोग और करोड़ों रुपए के रखरखाव खर्च ने भी इस पूरी योजना की प्रभावशीलता पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।

सवालों के घेरे में ऑडिट की व्यवस्था

विधानसभा में पूछे गए सवाल के जवाब में सरकार ने कहा है कि परियोजना का महालेखा परीक्षक (एजी) तथा अन्य सक्षम एजेंसियों की ओर से समय-समय पर नियमित ऑडिट किया जाता है। हालांकि सवाल यह है कि जब करोड़ों रुपए की लागत से खरीदी गई मशीनों में बड़ी संख्या कभी उपयोग में ही नहीं आई और सैकड़ों मशीनें कबाड़ बन गईं, तो नियमित ऑडिट के बावजूद इन अनियमितताओं पर जवाबदेही क्यों तय नहीं हुई। प्रश्न में खरीद प्रक्रिया, अनुबंध और रखरखाव में संभावित गड़बडिय़ों की स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने की मांग की गई थी, लेकिन सरकार ने ऐसे किसी स्वतंत्र ऑडिट या जांच का संकेत नहीं दिया। इससे परियोजना की पारदर्शिता और प्रभावशीलता को लेकर सवाल और गहरे हो गए हैं।

आजीवन बंद है

मकौड़ी ग्राम पंचायत कार्यालय में रखी गई एटीएम मशीन एक बार भी चालू नहीं हुई। यह आजीवन बंद है। इसके चलते लाखों रुपए की इस मशीन का लाभ ग्रामीणों को नहीं मिल पाया।

- भंवरराम जांगू, जनप्रतिनिधि, मकौड़ी