
नागौर. गौरव पथ पर लगी अस्थाई दुकाने व वर्षो से अवैध रूप स बनाया गया झोपड़ा।
नागौर. पूर्ववर्ती भाजपा सरकार की ओर से वर्ष 2004-05 में शहरी व ग्रामीण क्षेत्र की सड़कों को सुदृढ़ करने व पर्यावरण से जोड़ने के लिए ग्रामीण व शहरी गौरव पथ योजना के तहत सीसी सड़कों का निर्माण कराया गया था। इसमें सौन्दर्यीकरण के साथ सुविधाओं का खासतौर पर ध्यान रखा गया। समय के साथ इन ‘गौरव पथ’ का ‘गौरव’ समाप्त हो गया है। आज ‘गौरव पथों’ पर पर्यावरण धूमिल होकर अतिक्रमणों की भरमार हो गई है। पेड़ों का नामों-निशान तक नहीं बचा। ग्रामीण इलाकों में भी सीसी सड़कों पर लारी संचालकों का जमघट लगा रहने से गौरव पथ का ‘गौरव’ नाम का रह गया है। इन गौरव पथ का निर्माण सार्वजनिक निर्माण विभाग व गांवों में ग्राम पंचायतों की ओर से करवाया गया था।
नागौर में 60 लाख से बना था गौरव पथ
नागौर शहर की शान में चार चांद लगाने के लिए सरकार ने गौरव पथ की सौगात दी, लेकिन जिम्मेदारों की लापरवाही से वर्ष 2008 में बना गौरव पथ आज बदहाल है। सैनिक बस्ती में करीब 60 लाख की लागत से बना गौरव पथ दुर्दशा का शिकार है। शहर के सौन्दर्य में निखार लाने के लिए बना यह ‘पथ’ खुद के अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रहा है। यहां वाहनों का जमघट व अतिक्रमण की भरमार है।
बीकानेर रेलवे फाटक से एफसीआई गोदाम तक
सार्वजनिक निर्माण विभाग ने बीकानेर रेलवे फाटक से लेकर एफसीआई गोदाम तक गौरव पथ का निर्माण करवाया था। योजनानुसार यहां सीसी सडक़ बनाई गई। सड़क के दोनों तरफ ब्लॉक लगाए गए। दोनों किनारों पर शुद्ध पर्यावरण के लिए विभिन्न प्रकार के पेड़- पौधे लगाए गए थे, ताकि इस मार्ग पर भ्रमण के लिए आने वालों को शुद्ध वातावरण मिल सके। लोगों के बैठने के लिए कुर्सियां भी लगाई गई , लेकिन आज यह नजर नहीं आते। रेलवे लाइन के किनारे बरसों से लोग झोंपड़े बांधकर बैठे हैं, लेकिन ध्यान देने वाला कोई नहीं है। सड़क के समानांतर अतिक्रमी काबिज हो गए, तो कहीं वाहनों के लिए पार्किंग स्थल बन गया है।
बंद हुए स्पीकर
गौरव पथ पर भ्रमण के समय भजनों के माध्यम से सुकून व देश-दुनिया की लोगों को जानकारी देने के लिए खम्भों पर छोटे लाउड स्पीकर लगाए गए थे। आज वे भी गायब हैं और जो लगे हैं उनके तार टूट गए। पिछले कई वर्षों में यहां निजी अस्पतालों की भरमार ने भी मार्ग का सौन्दर्य बिगाडऩे में कोई कमी नहीं छोड़ी है। भवनों में पार्किंग नहीं छोडऩे से सडक़ पर दिनभर मरीजों के वाहन खड़े रहते हैं। इससे दुर्घटना का अंदेशा बना रहता है।
गुुम हुआ सांचू का स्तूप
भारतीय सेना ने 1965 के युद्ध में पाकिस्तान के कब्जे से अंतरराष्ट्रीय सीमा की सांचू पोस्ट को मुक्त कराया था। इस युद्ध के दौरान शहीद हुए सैनिकों की याद में सैनिक कल्याण बोर्ड की ओर से यहां शहीद स्तम्भ बनाया गया। अनदेखी के कारण गौरव पथ के साथ शहीद स्तम्भ की कीर्ति भी नष्ट हो गई है। स्तम्भ क्षतिग्रस्त हो गया है तो उसके चारों ओर वाहनों का जमघट लगा रहता है। हालत यह है कि स्तम्भ का शिलालेख नदारद होने के साथ ही यह विज्ञापन पाइंट बन गया है।
सजने लगी अस्थाई दुकानें
गौरव पथ पर पिछले तीन-चार साल सेे अस्थाई दुकानें सजने लगी हैं। नगर परिषद ने अपनी आय बढ़ाने के लिए शहर के सौन्दर्य को ताक पर रख दिया है। यहां लगी दुकानों व ओवरब्रिज का निर्माण कार्य चलने के कारण हालात काफी बिगड़ गए हैं। हर समय वाहनों का जमघट लगा रहता है। फाटक खुलने के समय स्थिति और भी विकट हो जाती है।
डीडवाना शहर
डीडवाना शहर में बालियां रोड तिराहा डिस्पेंसरी से पिलती स्कूल होते हुए जबरेश्वर बालाजी व सिंघी सरोवर, पुराना बायपास रोड तक वर्ष 2021-22 में डिवाइडर सहित फोर लेन सीसी सडक़ का निर्माण कराया गया था। यहां गौरव पथ निर्माण से लेकर अब तक जिम्मेदारों की लापरवाही साफ नजर आती हैं। खुले और बेतरतीब सीवरेज चेम्बर, कचरे का अंबार और खुला पड़ा नाला जिम्मेदारों की लापरवाही दर्शाता है।
नावां शहर
नावां शहर. शहर में चौराहे से लेकर हेमपुरा तक पिछली भाजपा सरकार की ओर से गौरव पथ बनवाया गया था। इसका तत्कालीन कांग्रेस सरकार की ओर से नवनिर्माण भी करवाया । वर्तमान में सडक़ किनारे दर्जनों दुकानें सज गई हैं। डिवाइडर पर लगे पेड़-पौधे सूखकर नष्ट हो गए हैं।
इनका कहना
गौरव पथ पर अतिक्रमण की शिकायत अब तक नहीं मिली है। यदि ऐसा है तो मौका जांच करवाकर कार्रवाई करेंगे। अस्थाई दुकानें दो-तीन साल से लग रही हैं। इससे लोगों को रोजगार मिलने के साथ परिषद की आय हो जाती है।
- देवीलाल बोचल्लया, आयुक्त नगर परिषद, नागौर
Published on:
27 Dec 2023 01:36 pm
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