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नहरबंदी शुरू होते ही शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में होने लगा जल संकट…VIDEO

नागौर. नहर बंदी शुरू होने के साथ ही जल संकट की स्थिति भी बनने लगी हे। शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में नलकूपों की स्थिति बेहतर बताए जाने के दावों के बीच पानी की तलाश के लिए गांव में नहीं, बल्कि शहर में भी किल्लत शुरू हो गई है। बंदी के घोषित होने के साथ जलदाय […]

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नागौर. नहर बंदी शुरू होने के साथ ही जल संकट की स्थिति भी बनने लगी हे। शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में नलकूपों की स्थिति बेहतर बताए जाने के दावों के बीच पानी की तलाश के लिए गांव में नहीं, बल्कि शहर में भी किल्लत शुरू हो गई है। बंदी के घोषित होने के साथ जलदाय विभाग ने पानी की कमी नहीं होने का दावा किया था, लेकिन शहर के ही दिल्ली दरवाजा के पीछे वाले क्षेत्रों के साथ ही पदमावाड़ी में जल संकट के चलते लोगों को मुश्किल की स्थिति का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों की स्थिति का अंदाजा खुद-ब-खुद लगाया जा सकता है।

गर्मी बढऩे के साथ ही जल संकट

गर्मी बढऩे के साथ ही जलदाय विभाग के अधिकारियों के दावों के बीच अब जल संकट की स्थिति बनने लगी है। बताते हैं कि आपूर्ति व्यवस्था भी निर्धारित समय के अनुसार सुचारु नहीं हो पा रही है। शहर के बालवा रोड स्थित स्थित हाउसिंग बोर्ड में पानी सुबह आठ बजे आता है, लेकिन आया दोपहर में एक बजे। इसके बाद आपूर्ति हुई तो, मगर निर्धारित समय से बताते हैं कि 10 मिनट पानी कम दिया गया। इसी तरह शहर की पदमावाड़ी में पानी भी लंबे समय से नहीं आ रहा है। स्थानीय बाशिंदों में केवलराम भाटी की माने तो बताते हैं कि चार साल से पानी की समस्या बनी हुई है। पेयजल लाइन भी है, और नल के कनेक्शन भी हैं। यह समस्या केवल उन्हीं की नहीं है, बल्कि पूरे क्षेत्र की है। इसी क्षेत्र के महेन्द्र का कहना है कि पानी की समस्या के लिए वह कई बार जलदाय विभाग में जा चुके हैं। इसकी लिखित शिकायत सहायक अभियंता से लेकर अधीक्षण अभियंता तक दे चुके हैं, लेकिन आज तक पानी उनके क्षेत्र में नहीं आया है। इसी तरह दिल्ली दिल्ली दरवाजा के निकट समस तालाब के आसपास के क्षेत्रो में भी पानी की समस्या लंबे समय से बनी हुई है। विशेषकर गर्मी में हालत ज्यादा खराब हो जाती है। क्षेत्र की समीरा, सलमान की माने तो उनके क्षेत्रों में कुछ जगहों पर पानी आता जरूर है, लेकिन उसका प्रेशर इतना कम रहता है कि पूरी आपूर्ति के दौरान बमुश्किल एक बड़ी बाल्टी भर पाती है, बस। अतिरिक्त पानी के लिए इधर-उधर भटकना पड़ता है।

ग्रामीण क्षेत्रों में भी स्थिति बेहतर नहीं

नागौर एवं इसके आसपास के क्षेत्रों में कुल मिलाकर 99 गांव एवं करीब 1500 ढाणियां हैं। यहां पर भी जलापूर्ति की स्थिति बहुत बेहतर नहीं है। हालांकि कागजों में नागौर परिक्षेत्र में आने वाले कुल 844 नलकूप एवं 47 हैण्डपम्पों की स्थिति के बेहतर होने का दावा विभाग करता है, मगर चेनार, अमरपुरा, बालवा, डुकोसी, अठियासन, रामसिया, ताऊसर, फागली आदि क्षेत्रों में जल संकट की स्थिति होने लगी है। सुबह होते ही इन क्षेत्रों में पानी की तलाश के लिए लोगों को सुदूर क्षेत्रों में भटकना पड़ रहा है। अठियासन में मिले ग्रामीणों में अर्जुनराम, जुगलकिशोर एवं रामधन ने बताया कि पानी समस्या लंबे समय से बनी हुई है। यहां पर गिने-चुने तो कनेक्शन हैं गांव में, उसमें भी पानी नहीं आता है। विभाग की ओर से कुछ समय पहले जलदाय विभाग के अधिकारी जांच के लिए जरूर आए थे, लेकिन वह केवल सुनकर चले गए।

नागौर शहर एवं आसपास के क्षेत्रों की सुविधा पर एक नजर

कुल उपभोक्ता है -24000

-कुल उच्च जलाशय है -26

-शहरी क्षेत्र मे एमएलडी पानी की आपूर्ति हो रही है-21 एमएलडी

-जल संकट की दृष्टि से कितने क्षेत्र चिन्हित किये गए है -5

-विशेष: नियमानुसार 10 एलपीसीडी से कम पेयजल आपूर्ति के आधार पर क्षेत्र को चिन्हित कर जल परिवहन किया जाएगा !

– शहरी क्षेत्रो मे प्रति लीटर कम से कम कम कितना पानी मिल रहा है -100-135 लीटर आपूर्ति

इनका कहना है…

ग्रामीण क्षेत्रों में जोनवार टीमें जलापूर्ति पर नजर रख रही है। जल संकट की स्थिति तो अभी नहीं बनी है, फिर भी किसी क्षेत्र में ऐसी कोई स्थिति है तो इसे देखवा लिया जाएगा।

रमेशचंद्र चौधरी, अधिशासी अभियंता, जलदाय विभाग नागौर