-केटलशेड निर्माण में ताक पर नियम,नियम विरुद्ध दिया जा रहा लाभ
धर्मेन्द्र गौड़ @ नागौर. पशुधन की सुरक्षा व उन्हें छत मुहैया कराने के लिए केंद्र सरकार की व्यक्तिगत लाभ के तहत कैटल शेड योजना में जमकर मनमर्जी का मामला सामने आया है। जिले भर में बीपीएल परिवारों को लाभांवित करने से पहले ही सामान्य श्रेणी के रसूखदार लोगों के केटल शेड बनवा दिए गए। मनरेगा के तहत बीपीएल, एससी-एसटी, एकल महिला, विकलांग किसान ही इस योजना में पात्र हैं, जबकि नागौर पंचायत समिति के बाराणी ग्राम पंचायत में जिला परिषद के जिम्मेदारों की ‘मेहरबानी’ से जनप्रतिनिधियों के भी केटल शेड बन गए। यह तो एक बानगी मात्र है, पूरे जिले में कमोबेश यही स्थिति है।
पात्रों को नहीं मिला लाभ
नियमानुसार जिले का पशु धन रखने वाला कोई भी बीपीएल में चयनित, एससी-एसटी वर्ग का, विकलांग किसान या एकल महिला पशुधन को बांधने के लिए नोहरा या बाड़ा अपने खेत या घर के पास खुले पड़े भूखंड पर पशुओं के लिए सीमेंट की चादर का ‘केटल शेड’ या पशुओं का आश्रय स्थल बनवा सकते हैं। ग्राम पंचायत के कई बीपीएल परिवारों का कहना है कि ग्राम पंचायत बाराणी में अधिकारियों की शह पर पंचायत समिति सदस्य के परिवार को केटल शेड का लाभ दे दिया, जबकि वे लाभ से वंचित है।
मनरेगा में होता है निर्माण
केन्द्र की इस योजना में कैटल शेड निर्माण करने वाले किसान को पंचायत समिति निर्माण सामग्री उपलब्ध कराती है। मनरेगा में इसका निर्माण किसान को अपने परिजनों को बतौर मनरेगा श्रमिक तैनात कर करवाना होता है। जिसका भुगतान निर्माण में लगे मजदूरों को पृथक से दिए जाने का प्रावधान है। मनरेगा के तहत खेतों की मेड़बंदी, टांका निर्माण भूमि समतलीकरण आदि कार्य भी शामिल है। केटल शेड निर्माण पर 3.79 अधिकतम राशि खर्च करने का प्रावधान है, जिसमें 60 प्रतिशत राशि श्रमिक व 40 प्रतिशत राशि सामग्री मद में खर्च होती है।