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अशिक्षा के अंधेरे से जूझ रहे गाडिय़ा लोहार, सरकारी सहायता की जोह रहे बाट

इतिहास के एक प्रण ने बना दिया यायावर : ना घर का कोई ठिकाना, ना जीवन में कोई ठोर
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अशिक्षा के अंधेरे से जूझ रहे गाडिय़ा लोहार, सरकारी सहायता की जोह रहे बाट

खजवाना. क्षेत्र के इंदोकली गांव में औजार बनाते गाडिय़ा लोहार।

खजवाना (नागौर). पहिए का आविष्कार मानव जाति के लिए वरदान बना। पहिए की गति बढ़ी तो जीवन की राह आसान हुई। लेकिन इतिहास के एक प्रण ने एक जाति को यायावर बना दिया। आजादी के 75 वर्ष बाद भी ‘गाडिया लोहार’ जाति के लोग अशिक्षा के अंधेरे में जूझ रहे।
जानकारी के अनुसार इस जाति में अब भी शिक्षा की ओर ध्यान नहीं। स्थायी आवास नहीं होने से एक गांव से दूसरे गांव घूमकर काम करने की मजबूरी के चलते नई पीढी के बच्चे भी शिक्षा से नहीं जुड़ पा रहे। अगर इसी तरह से चलता रहा तो आधुनिक युग के इस दौर में भी एक पूरा समुदाय शिक्षा से वंचित रह जाएगा।
कहने को तो सरकारों ने इस जाति के लिए कई योजनाएं चलाई, लेकिन धरातलीय हकीकत के तौर पर इस जाति के लोगों को न तो राशन मिल रहा और और न ही ठीक से पेंशन।
कभी बनाते थे सेना
के लिए हथियार, आज बना रहे औजार
क्षेत्र के इन्दोकली गांव में रुके पाली जिले के निपल गांव के गाडिय़ा लोहार जाति के मुखिया ने बताया कि मध्यकाल में उनके पूर्वज सेना के लिए धारदार हथियार बनाया करते थे। लेकिन आधुनिक दौर में यह लोग घरेलू उपयोगी औजार बना रहे। मशीनीकरण के चलते अब हाथ से बने औजारों का महत्व भी कम होने से इनकी आजीविका पर संकट आ गया। अगर समय रहते इस जाति का पुनर्वास कर विकास की मुख्य धारा से नहीं जोड़ा गया तो इनका भविष्य भी अंधेरे में डूबा रह जाएगा।

नहीं देखे स्कूल, अक्षर तक का ज्ञान नहीं

गाडिय़ा लोहार जाति के लोगों का स्थायी आवास नहीं होने से इनके बच्चों को स्कूलों में दाखिला दिलाना भी संभव नहीं हो रहा। देश में इनके अलावा शायद ही कोई ऐसी जाति होगी जिनके सभी लोग अब निरक्षर मिलेंगे। इस जाति के लोगों को अक्षरों का भी ज्ञान नहीं तो यह नए भारत की संकल्पना में कैसे शामिल हो पायेंगे।

मैं पढऩा चाहती हूं
&मैं पढ़ाई करना चाहती हूं पर कभी स्कूल नहीं देखी। हम तो मां बापू के साथ घूमते रहते हैं। साइकिल भी चलाना चाहती हूं पर हमारे पास नहीं है।
वर्षा, 8 वर्षीय बालिका

हमें आवास मिले, बच्चों को आवासीय विद्यालय
&हम स्थायी होने के लिए तैयार हैं। सरकार हमारे लिए जमीन आवंटित कर हमारे पुनर्वास की व्यवस्था करें। हमारे बच्चों के लिए अलग से आवासीय विद्यालय खुले तो हमारी आने वाली पीढी पढ लिखकर आत्मनिर्भर बन सकती हैं।
सेवाराम लोहार, मुखिया
&बेलगाड़ी पर पूरा परिवार चलता है। कम कमाई के कारण घर चलाना भी मुश्किल हो रहा है। सरकारी योजनाओं के बारे में हम कुछ नहीं जानते। सुविधाओं के नाम पर कुछ नहीं मिल रहा।
दरिया, महिला
&गाडिय़ा लोहार परिवार की महिलाओं के लिए अधिक परेशानी है। खुले में अस्थायी घर बनाकर रहने से खाना बनाने, सोने व स्नान करने में कई तरह की परेशानियां होने लगी है। सर्दी, बरसात व धूप से बच्चों को बचाने के लिए कोई संसाधन नहीं हैं।
राणा, महिला