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नागौर. इस साल का पहला सूर्य ग्रहण 21 जून को होगा। इसका सूतक बारह घंटे पहले यानि 20 जून की रात से ही लागू हो जाएगा। सूतक यम नियम 20 जून को रात्रि 10.09 से मान्य होगा।
ज्योतिषी बताते हैं कि सूर्य ग्रहण का सूतक लगने के बाद कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए। ग्रहण समाप्त होने के साथ ही सूतक भी समाप्त हो जाता है। इसके बाद ही शुभ कार्य किया जा सकता है। ग्रहण के समय अपने इष्ट एवं कुल देवता का ध्यान या गुरु मंत्र का जप करना चाहिए। ग्रहण काल में अपनी श्रद्धा अनुसार अन्न, वस्त्र दान एवं गायों को चारा खिलाना चाहिए।
वहीं ग्रहण के समय यात्रा करना, सोना, पेड़ के पत्ते, तिनका तोडऩा, लकड़ी काटना, कपड़े धोना, कपड़े सिलना, दांत साफ करना, तेल लगाना, केश बनाना, ताला खोलना या बंद करना, भोजन बनाना या भोजन ग्रहण करना, मैथुन, घोड़े या हाथी की सवारी करना, गाय-भैंस दुहना आदि ज्योतिष गणना अनुसार निषेध माना गया है। गर्भवती को सिलाई-बुनाई, सब्जी काटना या दहलीज पर खड़ा होना विशेष निषेध मना गया है।
यह रहेगी स्थिति
यह ग्रहण मेष, सिंह, कन्या, मकर राशि के लिए शुभ माना गया है। वृषभ, तुला, धनु, कुंभ राशि के लिए मध्यम या सामान्य एवं मिथुन, कर्क, वृश्चिक, मीन राशि के लिए इस ग्रहण का दर्शन अशुभ माना गया है। ग्वार मक्का, तेल, कपास, बाजरा, उड़द, मूंगफली, चावल, बारदाना, केसर, पुस्तक, पत्र-पत्रिका प्रकाशन आदि वस्तुओं के कार्य व्यवसाय में लाभ बनने की संभावना है।
महामारी का प्रभाव कम होने की संभावना
ज्योतिष गणना के अनुसार 30 जून को देव गुरु बृहस्पति वक्री होकर पुन: धनु राशि में आएंगे और इसी बीच ग्रहण 21 जून को मृगशिरा नक्षत्र में पड़ रहा है। मंगल भी शनि की राशि को छोड़कर बृहस्पति की राशि में 18 जून को आ जाएंगे, जिससे महामारी का प्रभाव कुछ समय बाद कम होने की संभावना बन रही है। गत 26 दिसंबर, 2019 को हुए सूर्य ग्रहण का परिणाम अशुभ साबित हुआ था। उधर, लगभग 5000 वर्ष पूर्व भी मृगशिरा नक्षत्र में मिथुन राशि में सूर्य ग्रहण घटित हुआ था। इस संयोग में भगवान कृष्ण ने ब्रह्म सरोवर में स्नान किया था। कोरोना संक्रमण के कारण वर्तमान में किसी तीर्थ में स्नान नहीं कर सकते, लेकिन अपने घर में ही स्नान के जल में गंगा जल या किसी तीर्थ स्थल का जल मिलाकर अवश्य स्नान करना चाहिए।
Published on:
20 Jun 2020 11:21 am
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