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हिस्सा राशि पर को ऑपरेटिव बैंकों का कब्जा, समितियों पर लटके ताले

खींवसर (नागौर). लगातार ऋणमाफी के बाद पुनर्भरण नहीं करने, ऋण अनुपात हिस्सा राशि, अनावधि पार ब्याज सहित अन्य आय पर को ऑपरेटिव बैंकों के कुण्डली मारने से ग्राम सेवा सहकारी समितियां तंगहाली का शिकार है। वर्षों से 90 प्रतिशत कार्मिकों को तनख्वाह नहीं मिली है। ऐसे में परेशान व्यवस्थापक एवं सहव्यवस्थापकों ने काम से किनारा कर लिया है।

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खींवसर सहकारी समिति कार्यालय।

-किसान ऋण के लिए लगा रहे चक्कर

-डिफाल्टर हो सकते हैं किसान

-90 प्रतिशत कार्मिकों को नहीं मिली तीन वर्षों से तनख्वाह

खींवसर. लगातार ऋणमाफी के बाद पुनर्भरण नहीं करने, ऋण अनुपात हिस्सा राशि, अनावधि पार ब्याज सहित अन्य आय पर को ऑपरेटिव बैंकों के कुण्डली मारने से ग्राम सेवा सहकारी समितियां तंगहाली का शिकार है। वर्षों से 90 प्रतिशत कार्मिकों को तनख्वाह नहीं मिली है। ऐसे में परेशान व्यवस्थापक एवं सहव्यवस्थापकों ने काम से किनारा कर लिया है।

हालात यह है कि पिछले एक माह से सहकारी समितियों के ताले लटक रहे हैं। किसान सहकारिता ऋण के लिए समितियों के चक्कर काट रहे हैं। समय पर काम काज शुरू नहीं हुआ तो किसान डिफाल्टर हो जाएंगे। करीब तीन दशक से आर्थिक घाटे से जूझ रही सहकारी समितियों में अधिकांश व्यवस्थापकों को देने के लिए पगार तक नहीं हैं। सेन्ट्रल को-ऑपरेटिव बैंक भी समितियों के छह प्रतिशत हिस्सा राशि, अनावधिपार चार प्रतिशत ब्याज, फसल बीमा कमीशन, ऋण माफी ब्याज को समितियों के खाते में डालने की बजाए अपने खाते में डाल देने से समितियां घाटे से गुजर रही है। स्थिति यह है कि वर्ष 2018 में ऋण माफी का ब्याज भी समिति के खाते में जमा नहीं करवाया है। जिलेभर की ग्राम सेवा सहकारी समितियों की आर्थिक हालत ठीक नहीं है। अधिकांश समितियां अत्यधिक घाटे में है तो कई ग्राम सेवा सहकारी समितियां लाखों की कर्जदार है।

केवल दो प्रतिशत ब्याज से चला रहे काम

घाटे में चल रही समितियों में आय के नाम पर केवल किसानों को दिए जाने वाले ऋण का दो प्रतिशत ब्याज कमीशन के रूप में मिल रहा है। केवल दो प्रतिशत ब्याज से प्रशासनिक खर्च, समिति भवन का रख रखाव, व्यवस्थापकों का मानदेय व समिति की योजनाओं का प्रचार-प्रसार करना भी सम्भव नहीं है। कई जगह दो से तीन वर्षों से व्यवस्थापकों एवं सह व्यवस्थापकों को मानदेय तक नहीं मिला है।

यह है सहकारी कर्मचारी संघ की मांगें

सहकारिता कर्मचारी संघ छह सूत्री मांगों को लेकर आन्दोलनरत है। कर्मचारियों की मांग है कि वेतन नहीं तो काम नहीं, ऋण अनुपात से अधिक हिस्सा राशि समिति के बचत खाते में समायोजित करवाई जाए। एनओडी ब्याज चार प्रतिशत और तीन प्रतिशत राज्य सरकार व केन्द्र सरकार से प्राप्त होने पर जमा किए जाए, ऐरियर ब्याज का भुगतान करवाया जाए, २०१८ का ऋण माफी का आठ प्रतिशत ब्याज समिति के बचत खाते में जमा करवाया जाए, समिति कर्मचारियों को वेतन के लिए वेतन कोष को ऋण उपलब्ध करवाकर समय पर वेतन मिल सके।

इस तरह हो रहा नुकसान

1. ऋण अनुपात से अधिक हिस्सा राशि पर सीसीबी का कब्जा होने के कारण पैक्स को 2 प्रतिशत मार्जिन के पैक्स को वित्तीय हानि एवं पैक्स की ओर से सोसायटी सदस्य को हिस्सा राशि लौटाने में असमर्थ, जिससे किसानों को बार-बार पैक्स व सीसीबी चक्कर लगाने पड़ते हैं।

2. एनओडी ब्याज 4 प्रतिशत व 3 प्रतिशत राज्य व भारत सरकार की ब्याज छूट का पैक्स की ओर से किसानों को तुरंत लाभान्वित किया जाता है, लेकिन सीसीबी की ओर से रजिस्ट्रार जयपुर व अपैक्स बैंक जयपुर के निर्देश होते हुए भी नागौर सीसीबी की हर शाखा की ओर से पैक्स से ब्याज वसूली कर हानि पहुंचाई जा रही है।

3. नागौर सीसीबी द्वारा वर्ष 2014 से हर शाखा स्तर ऋण खाते ड्यू दिनांक से पहले ऋण खाते पर एरियर ब्याज (पैलेन्टी ब्याज) लेकर हर पैक्स को भारी हानि पहुंचाई गई है।

4. ऋणमाफी 2018 का पैक्स की ओर पैक्स ऋणी सदस्यों को ब्याज ऋण पोर्टल के अनुसार ही सदस्य के खातों में समायोजित किया गया है, लेकिन नागौर सीसीबी के हर शाखा में पैक्स खातों पर समायोजित दिनांक तक पैलेन्टी ब्याज सहित पैक्स वसूली की गई जो पैक्स वित्तीय हानि से पैक्स पर प्रभावी है एवं नागौर सीसीबी के राज्य सरकार की ओर से ऋणमाफी पोर्टल के पश्चात की 8 प्रतिशत ब्याज नागौर सीसीबी को राशि प्राप्त होने के बावजूद 6 वर्ष बाद ही पैक्स 8 प्रतिशत ब्याज राशि के लिए तरश रही जो हर पैक्स के नागौर सीसीबी द्वारा 5-7 लाख का वित्तीय हानि की गई।

योजनाओं में असहयोग बहिष्कार का निर्णय

पैक्स एक ऐसी संस्था है जो राज्य एवं केन्द्र सरकार की हर तरह की धरातल योजनाओं को गांव-ढाणी तक गरीब वर्ग तक पहुंचाने का कार्य करती है। लेकिन नागौर सीसीबी ने पैक्स संस्थान व पैक्स कर्मचारी के साथ अन्याय किया है। कर्मचारी की रोजी रोटी का संकट खड़ा हो गया है। ऐसे में राजस्थान सहकारी कर्मचारी संघ ने बैंक व सरकार की हर योजनाओं के कार्य का बहिष्कार करने का निर्णय किया है।

-बलदेवराम गेट, कोषाध्यक्ष, राजस्थान सहकार कर्मचारी संघ।

खींवसर सहकारी समिति कार्यालय।