
Composer Dehara presented the songs of the forgotten songs
नागौर. ओ दूर के मुसाफिर हमको भी साथ लेले रे, हम रह गए अकेले.... पाश्र्व गायक व संगीतकार सतीश देहरा ने जब अपनी मखमली आवाज में इसी तरह के भूले बिसरे गीत सुनाए तो श्रोता भाव-विभोर हो गए। देहरा ने ‘जब दीप जले आना, जब सांझ ढले जाना’, ‘चंदन सा बदन, चंचल चितवन’ सहित एक से बढक़र एक गीत सुनाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। राजस्थान पत्रिका, भामाशाह किरोड़ीमल कड़ेल के संयुक्त तत्वावधान व शुभारंभ इवेंट्स के सहयोग से रविवार को बालसमंद स्थित गीतादेवी कड़ेल भवन में आयोजित ‘स्वर-साधना कार्यक्रम में कब सांझ हुई पता ही नहीं चला। देहरा के मखमली स्वरों में लिपटे गाने और श्रोताओं की वाह-वाह तथा तालियों की गडग़ड़ाहट ने माहौल को जवां कर दिया। फरमाइशों का दौर चला और देहरा ने ‘झनक झनक तोरी बाजे पायलिया...’, ‘लागा चुनरी में दाग, छुपाउं कैसे...’, ‘घुंघरू की तरह बजता ही रहा हूं मैं...’, ‘आदमी मुसाफिर है, आता है जाता है..’ सरीखे गीतों की झड़ी लगा दी। गज़लें, भजन और गाने के बाद भी श्रोताओं के मन और जुबां पर एक ही बात सुनने को मिली ‘वक्त कुछ पल की और मोहलत दे, काश वक्त ठहर जाएं देहरा को और सुनलें..’। स्वर-साधना कार्यक्रम की शुरुआत युवा गज़ल गायक देवेन्द्र त्रिवेदी की। इसके बाद आकाशवाणी गायक कैलाश गौड़ ने बिंदु रचित भजनो को स्वरबद्ध किया तो पूरा माहौल भक्तिमय हो गया। इसी क्रम को जारी रखते हुए भजन गायक गोपाल अटल ने भक्ति से ओतप्रोत रचना ‘प्रभुजी तेरा एक सहारा...’ सुनाकर कार्यक्रम को ऊंचाइयां दी। डॉ. पूर्णिमा कत्याल ने भी सुरीले अंदाज में गीत सुनाकर खूब दाद बटोरी। वहीं नन्ही गायिका श्रद्धा और सुरभि ने सुरीले स्वरों में ‘सत्यम शिवम् सुंदर...’ तथा ‘इक राधा इक मीरा...’ सरीखे भजनों से कार्यक्रम में मिठास भर दी। इस अवसर पर नरेन्द्र जोशी ‘प्रेमी’, श्रेयांस सिंघवी, कांतिचंद्र माथुर, एल.के. झा तथा नरेन्द्र पारीक ने भी शानदार प्रस्तुतियां दी। तबले पर संगत प्रभुदयाल जांगीड़, संगीत शिक्षक एल.के.झा, अजय व्यास ने संगत की। कार्यक्रम में नंदकिशोर कड़ेल, गोविंद कड़ेल, विशाल कड़ेल, सुंदर, शुभारंभ इवेंट्स के स्वरूप देहरा, विजय देहरा आदि ने सहयोग किया। इस अवसर पर युको बैंक के रमेशचंद्र सोनी, राजा पारीक, मनीष कड़ेल, अंजनी व्यास, प्रवीण बांठिया, प्रकाश टाक, कुमरकांत झा, दामोदर मणिहार, काकड़ा के ओमप्रकाश पुरोहित, कमल अग्रवाल, अनिल गौड़, पण्डित महेश दाधीच, अविनाश जोशी, गोपाल गौड़ सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित थे। कड़ेल परिवार ने पाश्र्व गायक देहरा का साफा पहनाकर सम्मान किया।
‘स्वर-साधना’ फनकारों के लिए बड़ा मंच-देहरा
नागौर. पाश्र्व गायक व संगीतकार सतीश देहरा स्थानीय फनकारों को मंच मुहैया कराने के लिए प्रक्रिया पूरी कर चुके हैं। सरकार की ओर से जमीन आवंटन की हरी झण्डी मिलते ही वे यहां कलाकारों की पौध को अपने अनुभवी संगीत से सिंचने का काम शूरू करेंगे। राजस्थान पत्रिका के स्वर-साधना कार्यक्रम में अतिथि कलाकार के रूप में पहुंचे देहरा ने यह बात कही। करीब तीन दशक से ज्यादा मुम्बई में अपनी कला का डंका बजाने वाले पाश्र्व गायक देहरा का नागौर से अमिट जुड़ाव है। उन्होंने बताया कि वे यहां अलग-अलग क्षेत्रों में विशेष कार्य कर रहे संतों व धाम आदि पर भी एक अलबम की तैयारी में जुटे हैं। शीघ्र ही यहां के बाशिदों को उनकी आवाज में नागौर के यशोगान की एलबम मिलेगी। देहरा ने बताया कि उनकी संगीतबद्ध की गई फिल्म ‘माटी हेलो पाड़े रे...’ भी शीघ्र प्रदर्षित होगी। देहरा ने संगीत से जुड़ाव रखने वाले युवाओं को गहराई से संगीत समझने और पकड़ करने की बात कही। उन्होंने कहा कि नागौर आइडियल स्थानीय कलाकारों के लिए अच्छा मंच साबित होगा। पाश्र्व गायक देहरा ने पत्रिका की ओर से आयोजित स्वर-साधना कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि यह स्थानीय फनकारों के लिए बड़ा मंच है।
Published on:
06 Nov 2017 11:12 am
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