
नागौर. कोरोना का असर नागौर के काम-धंधों पर भी पड़ा है। यहां से निर्यात होने वाले हैण्ड टूल्स का कारोबार पूरी तरह से चौपट हो गया है जबकि पान मैथी, जीरा पर भी आगामी दिनों में असर पडऩे की संभावना है।
नागौर. कोरोना का असर नागौर के काम-धंधों पर भी पड़ा है। यहां से निर्यात होने वाले हैण्ड टूल्स का कारोबार पूरी तरह से चौपट हो गया है जबकि पान मैथी, जीरा पर भी आगामी दिनों में असर पडऩे की संभावना है। हैण्ड टूल्स उद्योग ने नागौर को खास पहचान दिलाई है। इसका सालाना करीब 30 करोड़ रुपए का टर्न ओवर है। हैदराबाद, बैंगलुरु समेत देश के विभिन्न शहरों में यहां से हैण्ड टूल्स निर्यात होता है। हैंडलूम डीलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष जहीर आलम ने बताया कि करीब पचास फैक्ट्री के बारह सौ श्रमिक प्रभावित हुए हैं। उन्होंने बताया कि इसका असर बाहरी के साथ लोकल मार्के पर भी पड़ा है। हैण्ड टूल्स फैक्ट्री के मालिक उस्मान करीम ने बताया कि ट्रांसपोर्ट खत्म है, बाहर वालों की तरफ से ऑर्डर आना बंद हो गया है। पहले का कोई छोटा-मोटा ऑर्डर पड़ा है। गौरतलब है कि नागौर के कारीगर छोटे औजार पुर्जे बनाने के लिए विश्व विख्यात है। इसी के चलते वर्ष 1988 में यहां टूल रूम खोला गया था। जिसका उद्देश्य हस्त औजार के कारीगरों को हर तरह से सहयोग करना था। उधर, स्पाइस बोर्ड के सदस्य भोजराज सारस्वत ने बताया कि आलम यही रहा तो पानमैथी, जीरा भी इससे प्रभावित होगा। अभी निर्यात का समय तो नहीं है फिर भी यदि यही हालत रही तो इनकी स्थिति भी भयंकर हो सकती है।
Published on:
20 Mar 2020 12:13 pm
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