
फोटो- पत्रिका
नागौर। मूंडवा उपखंड के ग्वालू गांव निवासी 18 वर्षीय दिनेश पिछले तीन साल से गंभीर बीमारी के कारण जिंदगी और मौत से संघर्ष कर रहा है। उसकी दोनों किडनियां फेल हो चुकी हैं। डॉक्टरों के अनुसार किडनी ट्रांसप्लांट उसके जीवन की आखिरी उम्मीद है। मां अपनी एक किडनी दान करने को तैयार है, लेकिन आर्थिक तंगी उसकी उम्मीदों के रास्ते में दीवार बनकर खड़ी है।
दिनेश बिस्तर पर लेटने पर सांस नहीं ले पाता, इसलिए बैठकर ही नींद लेता है। उसे सप्ताह में तीन बार डायलिसिस कराना पड़ता है। चिकित्सकों का कहना है कि यह उपचार ज्यादा समय तक कारगर नहीं रहेगा। जल्द ट्रांसप्लांट कराना आवश्यक है। परिजनों के अनुसार दिनेश जब 15 वर्ष का था, तब पहली बार उसके किडनी रोग की जानकारी मिली। तभी से उसका अहमदाबाद के निजी अस्पताल में उपचार चल रहा है। इलाज में परिवार ने अपनी पूरी जमा-पूंजी खर्च कर दी। खेत तक बेचने पड़े। अब किडनी ट्रांसप्लांट के लिए 10 से 15 लाख रुपए जुटा पाना परिवार के लिए असंभव है।
पिता कुशाल पुरी खान में मजदूरी कर पत्थर निकालते हैं, जिससे परिवार का गुजारा चलता है। नम आंखों से कुशाल पुरी ने बताया कि दिनेश पढ़ाई में होशियार था, इंजीनियर बनने का सपना देखता था। बीमारी ने उसका सपना छीन लिया। अब बस एक ऑपरेशन उसे बचा सकता है, लेकिन इतने पैसे कहां से लाएं?
मां की पीड़ा और भी मार्मिक है। वह कहती हैं, मैं अपनी किडनी दे दूंगी, बस मेरे बेटे को बचा लो। उसकी पूरी जिंदगी अभी बाकी पड़ी है। दिनेश खुद भी जिंदगी की आस नहीं छोड़ना चाहता। बिस्तर पर लेटा वह कहता है, मैं जीना चाहता हूं, मां-पापा पर बोझ नहीं बनना चाहता।
परिजनों ने बताया कि मरीज का ऑपरेशन आयुष्मान आरोग्य योजना के तहत निशुल्क होगा, लेकिन ऑपरेशन से पहले मरीज व डोनर की जांचें, दवाइयां तथा ऑपरेशन के बाद करीब दो वर्ष तक चलने वाली दवाइयों पर प्रति माह लगभग 30 से 40 हजार रुपए का खर्च आएगा। यह वहन करना उनके लिए संभव नहीं है।
गौरतलब है कि कुछ वर्ष पूर्व इसी गांव के रामावतार को भी किडनी की गंभीर बीमारी हुई थी। पत्रिका में खबर प्रकाशित होने के बाद समाज ने मदद का हाथ बढ़ाया और आज रामावतार स्वस्थ जीवन जी रहा है। वह कहता है कि गांव वालों ने मुझे बचाया, अब दिनेश को बचाने की बारी है। परिवार सामाजिक संगठनों, भामाशाहों और आमजन से मदद की गुहार लगा रहा है।
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इस बीमारी के प्रारम्भिक उपचार के लिए दवाइयों तथा डायलिसिस की सुविधा जिला स्तर पर उपलब्ध है, लेकिन दिनेश की दोनों किडनियां फेल हो चुकी हैं, इसलिए ट्रांसप्लांट ही एकमात्र उपाय है। इसके लिए बड़े शहरों के अस्पताल में जाना होगा।
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Published on:
17 Jan 2026 05:06 pm
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