मेड़ता सिटी . काश्तकार इन दिनों खरीफ फसल की कटाई-गुड़ाई के कार्यो में जुटे हुए है। काश्त कार्य में भी बदलाव देखने को मिल रहा है। किसान खेत में कार्य करने वाले मजदूरों के खान-पान से लेकर मनोरंजन तक का खास ख्याल रख रहा है। समीपस्थ दत्ताणी गांव में डी.जे की धुन पर श्रमिक फसल कटाई करते देखे गए।
दत्ताणी गांव के काश्तकार वरिष्ठ अध्यापक सुखाराम सिरोही, को-ऑपरेटिव अध्यक्ष हुकमाराम सिरोही के खेतों में मजदूर बाजरा-ज्वार की फसल कटाई के लिए पहुंचे। करीब 25 से अधिक महिला-पुरुष श्रमिक खेत में डी.जे की धुन पर फसल कटाई का कार्य करते दिखे।
श्रमिकों ने बताया कि खेत में कार्य करते समय आपसी प्रतिस्पर्धा बनी रहने के साथ थकावट महसूस न हो इसके लिए पुराने जमाने में महिला-पुरुषों द्वारा गीतों का सहारा लिया जाता था। बदले दौर में सगाई-विवाह सहित मांगलिक कार्यो में बजने वाला डी.जे खेतों में बजने लगा है। डी.जे की धुन पर श्रमिक नाचते-गाते उत्साह के साथ कार्य कर करते है, इस तरह से कार्य के साथ-साथ श्रमिकों का मनोरंजन भी हो जाता है।
काश्तकार सुखाराम सिरोही ने बताया कि श्रमिकों को 500 रुपए दहाड़ी मजदूरी के साथ दोपहर के खाने में लापसी, दो सब्जियां तथा बाजरे की रोटियां दी गई। सायं 5 बजे चाय के साथ फिर नास्ता तथा श्रमिकों का मनोरंजन हो इसके लिए डी.जे भी मंगवाया गया। खेतों में इन दिनों फसल कटाई का कार्य चल रहा है। इसी तरह कई काश्तकार श्रमिकों के लिए मनोरंजन सहित स्पेशल डाईट की व्यवस्था करके अपना कृषि कार्य करवा रहे है।
श्रमिकों को मिल रहा है अतिथियों जैसा सम्मान
खरीफ फसल कटाई कार्यो में जाने वाले श्रमिकों का इन-दिनों काश्तकारों द्वारा विशेष ख्याल रखा जा रहा है। घर पर आने वाले अतिथियों के जैसे काश्तकार श्रमिकों को अपने वाहन से खेत में लाने एवं ले जाने का कार्य कर रहा है। इतना ही नहीं श्रमिक की डिमांड पर उसके लिए पान मसाले इत्यादि की व्यवस्थाएं भी काश्तकार कर रहा है। क्षेत्र में मध्यप्रदेश, हरियाणा के श्रमिक इन दिनों जगह-जगह डेरा डाले बैठे हैं।