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डेंगू ने पसारे पांव, रोगी पचास के पार

जिले में नागौर 7, डीडवाना 7, मकराना 8, कुचामन 17, डेगाना 4, परबतसर 4, रियाबड़ी 1, जायल 1 डेंगू पॉजिटिव रोगी मिले, एलाइजा टेस्ट के बाद चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने की पुष्टि, ब्लॉकवार चिकित्सा प्रभारियों को दिए निर्देश, रोजाना की रिपोर्ट करने को कहा

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Dengue Fever: dengue kya hai hindi mai

Dengue Fever: dengue kya hai hindi mai

नागौर. चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की भारी-भरकम फौज के बाद भी जिले में डेंगू ने अपने पांव पसार लिए है। अब तक चार दर्जन डेंगू पीडि़त होने की पुष्टि विभाग के एलाइजा टेस्ट में ही की जा चुकी है। इनकी संख्या इससे अधिक भी हो सकती है। इससे लोगों में मच्छरों को लेकर जहां भय की स्थिति बनने लगी है, वहीं विभागीय अधिकारियों का कहना है कि डेंगू पीडि़तों की संख्या जागरुकता के अभाव में लोगों के खुद की उदासीनता से बढ़ी है। विभागीय जानकारों का कहना है कि लोगों की गलती है या फिर विभाग की, लेकिन बीमारों की संख्या बढऩे के कारण हालात अब और ज्यादा विकट होते नजर आने लगे हैं।जिले में नागौर-7, डीडवाना-7, मकराना-8, कुचामन-17, डेगाना-4, परबतसर-4, रियाबड़ी-1, जायल-1 डेंगू पॉजिटिव रोगी मिल चुके हैं। इन सभी की एलाइजा टेस्ट के दौरान डेंगू की पुष्टि हो चुकी है। हाल ही में रेलवे कॉलोनी में भी डेंगू रोगी मिले हैं, लेकिन विभागीय अधिकारियों ने वहां के लोगों को केवल साधारण बुखार से ग्रसित बताया है। इसके इतर यहां के एक रोगी को एक निजी चिकित्सालय की ओर से डेंगू बताते हुए जयपुर रेफर कर दिया गया था। इसके बाद भी विभाग ने रेलवे कॉलोनी में किसी के भी डेंगू होने की पुष्टि करने से साफ इंकार दिया। हालांकि अकेले नागौर में ही अब तक सात लोगों को अधिकारिक तौर पर डेंगू होने की पुष्टि विभागीय अधिकारियों ने कर दी है। उनका कहना है कि डेंगू जांच की पुष्टि एलाइजा से ही हो सकती है, अन्य संसाधन केवल अनुमानों पर होते हैं। इसलिए विभाग की नजर में नागौर में महज सात लोगों को ही डेंगू होना माना गया है। विभागीय दावों से इतर वास्तविक तस्वीर दूसरी ही नजर आती है। जिले के कुचामन ब्लॉक में ही अकेले 17 लोागों को डेंगू के मच्छरों ने अपना निशाना बनाया, और एलाइजा जांच में भी इनके परिणाम पॉजिटिव निकले हैं। इससे कुचामन क्षेत्र में मच्छरों को लेकर जहां भय की स्थिति उत्पन्न होने लगी है, वहीं अधिकारी ग्राम स्वास्थ्य एवं स्वच्छता समिति की बैठक कराकर एंटी लार्वा गतिविधियां कराने के दावे किए है। इसी तरह मकराना, डेगाना एवं परबतसर के अलावा सीमावर्ती क्षेत्रों में रियाबड़ी तक डेंगू के मच्छरों ने अपना डेरा डाल दिया है, लेकिन विभाग अभी लोगों को जागरुक करने में लगा हुआ है।
अभियान चलने के बाद भी डेंगू
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार मलेरिया और मौसमी बीमारियों की रोकथाम के लिए 15 सितम्बर को एक अभियान चलाया गया। अभियान के तहत जिले में 1343 समितियों की बैठक आयोजित कर समुदाय को मौसमी बीमारियों के रोकथाम और बचाव व लक्षण के बारे में जानकारी दी गई। एंटी लार्वा गतिविधियां करते हुए 2037 स्थानो पर जला हुआ तेल, 365 स्थानो पर टेमिफ ़ोस, 15 स्थानो पर गम्बूसिया मछलिया छोड़ी गई। इसके साथ जिले में 20801 कूलर, 19952 टंकियो का निरीक्षण कर उन्हें साफ रखने के बारे में बताया गया। इन गतिविधियों को कराने का दावा भी विभाग की ओर से किया गया। इसके बाद भी डेंगू कैसे फैल गया के सवाल पर अधिकारियों का कहना है कि यह तो साफ पानी में होता है। लोगों को खुद जागरुक होना पड़ेगा। इतनी गतिविधियों के बाद भी गलती का ठीकरा आम आदमी पर फोड़ दिया गया। इसके अलावा नागौर की रेलवे कॉलोनी में अब तक 57 घरों की जांच की गई। इसमें कुल 261 लोगों का चिकित्सकीय परीक्षण के दौरान केवल 11 बुखार के रोगी मिले हैं। इसके अलावा 71 कूलर और 73 टंकियों की भी जांच की गई।
यह हंै लक्षण
चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार डेंगू के लक्षण तेज बुखार आने के साथ ही जोड़ो में दर्द होने लगता है। तेज उल्टी-दस्त आदि होने लगते हैं। इस तरह के लक्षण डेंगू होने पर पाए जाते हैं।
सावधानी बरतें
&चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि घर में कूलर का पानी बदलते रहे। आवश्यक न हो तो उसे खाली कर सूखा कर रखे, अनावश्यक रूप से जल का संग्रहण न करें। सभी जल स्रोतों को ढककर रखे ताकि मच्छर उसमें न जा पाए और अंडे न दे सके। डेंगू वाहक मच्छर मादा एडिज साफ पानी में ही अंडे देती है, और सामान्यत: दिन के समय ही काटती है। इसलिए दिन में भी मोस्क्यूटों रीपलेंट का इस्तेमाल करने के साथ ही पूरी बाँह के कमीज पहनने को प्राथमिकता दें। डेंगू से बचाव के लिए लोगों को जागरुक किए जाने के साथ ही विभाग की ओर से आवश्यक कदम उठाए गए हंै।
डॉ. सुकुमार कश्यप, सीएमएचओ, नागौर