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प्रभु की भक्ति निस्वार्थ भाव से करनी चाहिए

Nagaur. भागवत कथा में कथा वाचिका ममता देवी ने श्री कृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन करते हुए कहा कि भगवान की अद्धभुत लीलाएं मानव जीवन के लिए प्रेरणादायाक है

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Devotion to the Lord should be done selflessly

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नागौर. जोधपुर रोड स्थित गोचिकित्सालय में चल रही भागवत कथा में कथा वाचिका ममता देवी ने श्री कृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन करते हुए कहा कि भगवान की अद्धभुत लीलाएं मानव जीवन के लिए प्रेरणादायाक है। भगवान कृष्ण बचपन में अनेक लीलाएं करते हुए सभी का मन मोह लिया करते थे। भगवान स्वयं रसरूप है। वे अपनी रसमयी लीलाओं से सभी को अपनी ओर खींचते है। इस लीला के दौरान भगवान 2-3 वर्ष के बच्चे थे, और गोपियां अत्याधिक स्नेह के कारण उनकी ऐसी मधुर लीलाए देखकर आनन्दमग्न हो जाती। ् भक्त मीरा व श्री कृष्ण की अनन्य भक्त करमा बाई का वर्णन करते हुए कहा कि प्रभु की नि:स्वार्थ भाव सरलता से भक्ति करें तो ईश्वर जरूर सुनते है। जिस प्रकार करमा बाई भगवान को अपना मानकर श्री कृष्ण को खिचड़े का भोग लगाकर उन्हे खाने के लिए बुलाती थी। करमा बाई की तरह भगवान की शुद्ध भाव से सरलता से ,सहजता से अनन्य भक्ति करनी चाहिए। कथा के दौरान भगवान कृष्ण की नटखट बालरूपज् च्कृष्ण भक्त मीरा के वीणा में श्री कृष्ण प्रकटज् एवं च्छप्पन भोगज् की दिव्य सजीव झाँकी का प्रस्तुतिकरण दिया गया। स्वामी कुशालगिरी ने युवाओं को पुरुषार्थ से किए जाने वाले कार्यों को करने के लिए प्रेरित किया। इसमें संत दुलाराम कुलरिया के परिवारजनों में रामप्यारी देवी, पूनम कुलरिया, बबिता कुलरिया, भंवरी कुलरिया, शांतिदेवी, जनक कुलरिया का सम्मान किया गया। कुलरिया परिवार की ओर से गोसेवा के लिए 11 लाख की राशि दिए जाने की घोषणा की गई। संत हीरादास ने भजन प्रस्तुत किया। इस दौरान दयाराम महाराज, संत गिरधारीराम महाराज व संत गोविंदराम महाराज आदि मौजूद थे।