
-सीवरेज पानी के साथ ही आसपास के क्षेत्रों की कई छोटी नालियों से भी तालाब में हो रही गंदे पानी की निकासी
नागौर. परंपरागत जलस्रोतों के रूप में कभी मीठे तालाब पानी के नाम से मशहूर रहे समस तालाब का स्वरूप अब बदल चुका है। तालाब में आसपास के नालों का पानी सीधा छोड़ा जा रहा है। हालाता इतने ज्यादा खराब हैं कि इसमें अक्सर मृत जानवरों के शव भी फेक दिए जाते हैं। इसके चलते इस पूरे तालाब का मूल स्वरूप ही बदल चुका है।
समस तालाब का पानी हुआ काला
कालेज रोड के निकट स्थित समस तालाब का रंग बदरंग हो चुका है। अब तालाब के नजदीक जाने पर भी दुर्गन्ध का सामना करना पड़ता है। इसके पास जाने पर तालाब का गंदगी से गहरा काला हो चुका पानी भी स्पष्ट तौर पर अब नाले के रूप में नजर आने लगा है। पड़ताल किए जाने पर पता चला कि समस तालाब के उत्तरी एवं दक्षिणी सिरे से न केवल गंदा पानी नाले के माध्यम से डाला जा रहा है, बल्कि सीवरेज में जाने वाला पानी भी इसी में जा रहा है। इसकी वजह से इसकी जैविक प्रकृति बिगडऩे के कारण पानी का रंग भी बदल चुका है। इतना ही नहीं, बल्कि आसपास का पर्यावरण प्रदूषित होने के साथ ही जलीय एवं भूजलीय प्रदूषण का संकट बढऩे लगा है।
जहरीले मच्छरों से भरा एरिया
गंदगी के चलते यह परंपरागत जलस्रोत भी अब विषैले मच्छरों की फैक्ट्री बन गया है। इसके आसपास की कई छोटी नालियां बताते हैं कि इसके आसपास करीब साढ़े तीन हजार से ज्यादा घर हैं। इन घरों का गंदा पानी भी छद्म रूप से बनी नालियों के रास्ते सीधा गिनाणी तालाब में गिर रहा है। हजारों घरों के पानी के साथ ही नाले के आ रहे गंदे पानी के कारण अब यह पूरा तालाब लगभग खत्म हो चुका है। यह पूरी तरह से एक नाले के तौर पर बदल चुका है। स्थिति इतनी ज्यादा खराब हो गई है कि तालाब के किनारे दुर्गन्ध के चलते खड़ा तक होना मुश्किल हो गया है।
ताकि तालाब खत्म हो जाए
तालाब में कई जगहों पर कचरा एवं मलबा आदि डालकर उसका पानी वाला एरिया सुखाया जा रहा है। इसकी वजह से तालाब का 35 प्रतिशत हिस्सा खत्म हो चुका है। तालाब के चारो ओर से देखे जाने पर यह स्थिति स्पष्ट रूप से नजर आती है। जानकारों का कहना है कि इसके पीछे कथित रूप से भूमाफियाओं की साजिश है कि धीरे-धीरे तालाब को नाले के रूप में परिवर्तित तालाब को खत्म कर इसके भूभाग पर अवैध कब्जे किए जा सकें।
सीवरेज का पानी तालाब में जाने पर यह होता है दुष्परिणाम
.तालाब का पानी पीने योग्य नहीं रहता.
.गंदे पानी से कई तरह के रोग हो सकते हैं, जैसे कि दस्त, आंत में सूजन, पेट में दर्द, टायफ़ाइड, हैज़ा, हेपेटाइटिस वगैरह.
.तालाब के पानी में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है, जिससे फ़ायदेमंद बैक्टीरिया मरने लगते हैं और कीचड़ बढऩे लगती है.
तालाब के पानी में अपशिष्ट से कार्बनिक गंदगी आ जाती है, जिससे पानी गंदा और अस्वास्थ्यकर हो जाता है.
.तालाब के पानी को साफ़ रखने के लिए, तालाब में कार्बनिक गंदगी की मात्रा को कम करना चाहिए. इसके लिए, स्थानीय प्राधिकारियों द्वारा गंदे पानी और सतही जल निकासी प्रणालियों को अलग रखने के नियमों का पालन करना चाहिए
इनका कहना है…
समस तालाब के प्रकरण की कोई जानकारी नहीं है, और न ही इस तरह की कोई शिकायत आई है। फिर भी इस पूरे प्रकरण की जांच करा ली जाएगी। इससे सही वस्तुस्थिति सामने आ जा जाएगी।
हरदीप सिंह, तहसीलदार नागौर
Published on:
07 Oct 2024 10:03 pm
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