
Diwali will be celebrated today in conjunction with Shubh Chitra Nakshatra...see the auspicious time of Deepawali in the magazine
नागौर. दीपावली सोमवार को चित्रा नक्षत्र से युक्त दीपमाला में मनाई जाएगी। कार्तिक कृष्ण अमावस्या सोमवार को शाम पांच बजकर 27 मिनट से आरंभ होकर अगले दिन 25 अक्टूबर मंगलवार को शाम चार बजकर 18 मिनट तक रहेगी। हस्त नक्षत्र अपराह्न 2 बजकर 41 मिनट तक होगा। इसके उपरांत दीपावली पूजा में विहित चित्रा नक्षत्र होगा। हस्त चित्रा नक्षत्र में वैधृति योग का संयोग सुखद रहेगा। हस्त नक्षत्र लघु छित्र संज्ञक और चित्रा मृदु मैत्र संज्ञक है। दीपावली पर हस्त नक्षत्र और चित्रा नक्षत्र का खास संयोग बनने के साथ ही इस दिन बुध ग्रह के अपनी उच्च राशि में होने के अलावा गुरु, शुक्र व शनि ग्रह की अपनी स्वराशि में रहने की वजह इस बार दीपोत्सव बेहद फलदायी रहेगा। पंडित सुनील दाधीच ने बताया कि कार्तिक कृष्ण पक्ष चतुर्दशी सोमवार तिथि मानक रचना अनुसार 24 अक्टूबर को दिवस वेला पर प्रालेपन गादी स्थापना शाही भरना कलम दवा संवारने के लिए शुभ मुहूर्त में अमृत का चौघडिय़ा सुबह छह बज कर 41 मिनट से 8 बजकर 6 मिनट एवं शुभ का चौघडिय़ा सुबह नौ बजकर 30 मिनट से 10 बजकर 55 तक मिनट तक रहेगा।
महालक्ष्मी पूजन का मुहूर्त
महालक्ष्मी पूजन के लिए स्थिर तथा द्वीस्वभाव लग्न को शुभ माना जाता है आवश्यकता अनुसार इस दिन सुबह 8 बजकर 33मिनट से 10 बजकर 50 मिनट तक वृश्चिक उपरांत 12 बजकर 53 मिनट तक धनु लग्न रहेगा। वृश्चिक लग्न पर देवगुरु बृहस्पति की नवम दृष्टि और धनु को ग्रह मंगल संपूर्ण दृष्टि से देखता है। वृश्चिक लग्न में ऑटो-मोबाइल वर्कशॉप, तांबा, पीतल, कांसा एवं स्टील का व्यवसाय फैक्ट्री कार्य तथा वस्तुएं निर्माण का कार्य करने वाले व्यक्ति महालक्ष्मी पूजन करें तो विशेष लाभ होगा। कुछ व्यापारी दीपावली पूजन के लिए धनु लग्न को श्रेष्ठ मानते हैं। क्योंकि धनु लग्न का स्वामी बृहस्पति ग्रह है। अभिजीत नामक शुभ मुहूर्त 11 बजकर 57 मिनट से 12 बजकर 42 मिनट तक रहेगा। अपराह्न 2 बजकर 37 मिनट से 4बजकर 07मिनट तक कुंभ और इसके बाद 5 बजकर 35 मिनट तक मीन लग्न रहेगा। मीन लग्न का स्वामी देवगुरु बृहस्पति अपने घर (स्वगृही) में बैठकर तत्काल प्रभाव से उद्योग-धन्धों में दिन दूनी रात चौगुनी उन्नति का आशीर्वाद प्रदान करेंगे। । मीन लग्न में विशेषकर तेजी मंदी का व्यापार करने वालों, फाइनेंसरों और बैंक वालों को पूजा करनी चाहिए। साथ ही दोपहर 3 बजकर 8 मिनट से 5 बजकर 57 मिनट तक लाभ अमृत का चौघडिय़ा उपलब्ध रहेगा। प्रदोषकाल में दीपावली-महालक्ष्मी पूजन मे सर्वाधिक महत्व होता है। शाम को 5 बजकर 58 मिनट से रात्रि 9 बजकर 10मिनट तक रहेगा। प्रदोषकाल में ही मेष, वृष लग्न और अमृतचर के चौघडिय़ा भी विराजमान रहेंगे। रात्रि 9 बजकर 10 मिनट से 11बजकर 23 मिनट तक मिथुन लग्न भी पूजन के लिए श्रेष्ठ रहेगा। प्रदोषकाल का अर्थ है दिन-रात्रि का संयोग। दिन विष्णुरूप और रात्रि लक्ष्मीरूपा है। प्रदोष काल के स्वामी (अधिपति) अवढऱ दानी आशुतोष भगवान सदाशिव स्वयं हैं। इसमें चित्रा नक्षत्र से बना मृदु मैत्र संज्ञक योग व्यापारियों व गृहस्थियों के लिए दीपावली, महालक्ष्मी, कुबेर, दवात-कलम, तराजू, बाट, तिजोरी इत्यादि पूजन के लिए अक्षय श्रीप्रद एवं कल्याणकारी सिद्ध होगा। अर्धरात्रि लग्न सिंह एक बजकर 41 मिनट से 03 बजकर 56 मिनट तक तक रहेगी। यह भी व्यापार में विपुल लाभ दिलाने वाली है। इस दिन श्रिीसूक्त, महालक्ष्मी स्तोत्र और कनकधारा स्तोत्र का पाठ करना शुभ माना जाता है।
Published on:
23 Oct 2022 08:47 pm
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