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चुनाव में देसी की बढ़ी खपत, अंग्रेजी शराब व बीयर का घटा कारोबार

-पिछले साल के मुकाबले एक करोड़ 22 लाख की शराब कम बिकी इस बार-15 अक्टूबर से तीन दिसम्बर की खपत के आधार पर दो साल का आकलन -शराब बांटी गई तो बाजार से क्यों नहीं उठ पाई, यह राज भी रह गया राज

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चुनाव में शराब

चुनाव में शराब की बात ना हो, ऐसा कैसे हो सकता है। लोग कहते भी हैं कि वोटों के लिए या तो शराब या फिर इसके लिए पैसे बांटे गए। चुनाव जीतने के लिए दारू/शराब बांटने का भरम इस बार कुछ टूट सा गया है।

चुनाव में शराब की बात ना हो, ऐसा कैसे हो सकता है। लोग कहते भी हैं कि वोटों के लिए या तो शराब या फिर इसके लिए पैसे बांटे गए। चुनाव जीतने के लिए दारू/शराब बांटने का भरम इस बार कुछ टूट सा गया है। वो इसलिए भी कि चुनाव के तकरीबन डेढ़ महीने में शराब व बीयर की खपत ही घटकर रह गई। पिछले साल के मुकाबले इस बार चुनावी डेढ़ महीने में शराब व बीयर की खपत में करीब एक करोड़ 22 लाख रुपए की कमी आई है।

सूत्रों के अनुसार चुनाव आचार संहिता लागू होने से चुनावी परिणाम आने (15 अक्टूबर से तीन दिसम्बर) यानी 48 दिन में शराब की बिक्री व उपयोग को लेकर जिलेभर का आकलन किया गया तो यह सच सामने आया। पिछले साल में इन्ही दिनों में पी गई शराब व बीयर इससे बहुत ज्यादा थी। आबकारी विभाग से मिले आंकड़ों पर नजर डालें तो इस बार इन 48 दिन में देसी मदिरा/ राजस्थान मेड लिकर (आरएमएल) की बिक्री जरूर पिछले साल के मुकाबले बढ़ी। पिछले साल इन दिनों में जहां 20 लाख 42 हजार 84 लीटर देसी/आरएमएल की बोतल बिकी तो इस बार इनकी संख्या 21 लाख 21 हजार 782 बोतल थी। पिछले साल 15 अक्टूबर से तीन दिसम्बर तक इनसे 16 करोड़ 68 लाख 59 हजार 164 रुपए आए तो इस बार यह राशि 17 करोड़ 5 लाख 70 हजार 969 रुपए रही। यानी केवल देसी/आरएमएल की बिक्री ही बढ़ी है।

सबको पता ही है कि शराब महंगी होने के साथ सेहत के लिए हानिकारक भी है। इस सामाजिक बुराई को बंद करने की समय-समय पर मांग भी उठती रहती है। बावजूद इसके नागौर जिले में औसतन 35 हजार से अधिक बीयर रोजाना पी जा रही है। सेहत के लिए नुकसानदायक मानी जाने वाली शराब सरकार के लिए फायदे का सौदा बनती जा रही है। इसकी खपत भी बढ़ रही है और सरकार की आमदनी भी। चुनाव में अवैध शराब के कारोबार से मना नहीं किया जा सकता। एक ट्रक तो सदर थाना पुलिस ने पकड़ा था, जिसमें 75 लाख से अधिक की शराब थी।

अंग्रेजी शराब और बीयर में पीछे

आंकड़ों के हिसाब से इस साल चुनावी सीजन के 48 दिन में 5 लाख 48 हजार 525 बोतल अंग्रेजी शराब तो 14 लाख 85 हजार 593 बोतल बीयर बिकी। इसके बदले 23 करोड़ 15 लाख 88 हजार रुपए की आय हुई पर पिछले साल इन्हीं दिनों में अंग्रेजी शराब की 5 लाख 91 हजार 390 बोतल तो बीयर की 15 लाख 61 हजार 715 बोतल बिकीं। इसके बदले 41 करोड़ 29 लाख 11 हजार रुपए की कमाई हुई। यानी इस बार इन दिनों में चुनाव होने के बावजूद एक करोड़ 22 लाख रुपए कम की शराब बिकी। मतलब साफ है या तो चुनाव में शराब बांटी गई तो वो यहां से नहीं खरीदी गई या फिर चुनाव आचार संहिता की सख्ती के चलते शराब का उपयोग/दुरुपयोग हो ही नहीं सका।

देसी के शौकीन ज्यादा

सूत्रों का कहना है कि अंग्रेजी शराब के मुकाबले देसी मदिरा की खपत चौगुनी है। अकेले वर्ष 2020-21 में ही 82 लाख 92 हजार 900 लीटर देसी शराब बिकी तो वर्ष 2021-22 में तो देसी मदिरा इससे दस लाख अधिक लीटर बिकी। अंग्रेजी शराब की वर्ष 2020-21 में करीब अठारह लाख लीटर तो वर्ष 21-22 में करीब 23 लाख 64 हजार लीटर से अधिक की बिकवाली हुई। वर्ष 22-23 में यह आंकड़ा तीस लाख लीटर से अधिक था जो इस साल और बढ़ गया है।

शुरुआती चार महीने में ही दो सौ करोड़

आधिकारिक रूप से तो डीडवाना-कुचामन जिला अभी अलग हुआ ही है। इसको मानते हुए नागौर जिले में अप्रेल से जुलाई तक दो सौ करोड़ रुपए तो यहां के शौकीनों ने शराब पर खर्च कर दिए, जिसमें करीब सौ करोड़ सरकार की जेब में गए। पिछले साल के मुकाबले इस शुरुआती चार महीने में साढ़े तीन लाख बीयर ज्यादा बिकी। अब तक करीब आठ महीने में आबकारी विभाग को छह सौ करोड़ से अधिक की आय हो चुकी है। हमेशा की तरह इस बार भी कहा गया था कि शराब चुनाव में खूब बंटी पर बंटी तो खरीदी कहां से?

इनका कहना

पिछले साल के मुकाबले करीब डेढ़ महीने में शराब की खरीद चुनाव के दौरान कम रही। करीब एक करोड ़22 लाख की शराब/बीयर कम थी, देसी की खपत इस बार ज्यादा थी।

-मनोज बिस्सा, जिला आबकारी अधिकारी, नागौर।