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स्कूलों में लड़कियों की ताक-झांक कर रहे हैं ड्रोन कैमरे

संदीप पाण्डेयनागौर. ड्रोन कैमरों की आजादी पर पहरा लग सकता है। निजता भंग होने की आशंका के चलते इन्हें एसपी अथवा जिला कलक्टर से अनुमति भी लेनी पड़ सकती है। इसके लिए कवायद शुरू हो गई है। बढ़ते ड्रोन कैमरों के बारे में सीआईडी (अपराध जांच विभाग) पड़ताल तो कर रही है पर असल में जिलेभर के ड्रोन कैमरों की संख्या तक की पुख्ता जानकारी उसके पास भी नहीं है।

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अब लगा अंकुश, अनुमति लेनी होगी

-जिले में सौ से ज्यादा हो गए ड्रोन कैमरे

सूत्रों के अनुसार आवासीय बालिका विद्यालय ही नहीं बालिका स्कूल/कॉलेज के साथ शिक्षिकाओं के अलावा कामकाजी महिलाएं ही नहीं गृहिणियों की आवाज भी इस ड्रोन कैमरे के खिलाफ बुलंद हो रही है। एक से आठ किलोमीटर तक की रेंज वाले ये ड्रोन कैमरे को निजता उल्लंघन का दोषी माना जाने लगा है। फोटोग्राफी प्रोफेशन के लिए आधुनिकता रंग का यह ड्रोन बदमाश-शातिरों के हाथों लोगों को डराने के काम भी आ रहा है। पुलिस के पास भले ही अभी तक इस तरह का कोई मामला दर्ज नहीं हुआ हो पर दूर से लुभाने वाला यह च्विमानज् बहुतों को तनाव देने लगा है। करीब आधा दर्जन मामले तो ऐसे सामने आए हैं जहां ड्रोन कैमरे की च्आवाजाहीज् पर बखेड़ा तक खड़ा हो चुका है। मामला पुलिस तक पहुंचाने से बचने की वजह से भी शायद मामले थाने में दर्ज नहीं हुए।
तकरीबन दस साल से ड्रोन कैमरों की न सिर्फ अहमियत बढ़ी, बाजार में प्रतिस्पद्र्धा के चलते इनकी संख्या में भी इजाफा हुआ। वर्ष २०१२-१३ में जिलेभर में इक्का-दुक्का के पास ही ड्रोन कैमरे उपलब्ध थे। अब आलम यह है कि पूरे जिले में इनकी संख्या करीब सौ को भी पार कर चुकी है। इस पर भी खास बात यह कि पुलिस तक को पता नहीं कि ड्रोन कैमरे की संख्या कितनी है और ये किस-किस के पास हैं। नियम-कायदे ही नहीं बन पाए हर गतिविधि पर नजर रखने के लिए ड्रोन कैमरों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। पुलिस हो या कोई सरकारी कार्यक्रम, ये अब शान बन चुके हैं पर इनको मिली आजादी ने ही बहुतों की स्वतंत्रता पर बंदिश लगा दी है। इनके आते ही तो खूब-सारे नियम कायदों का ऐलान किया गया थ्रर। इनमें कि रिहायशी इलाकों में बिना परमीशन ड्रोन नहीं उड़ाया जाएगा। एयरपोर्ट दिन के समय और अच्छे मौसम में ही ड्रोन उड़ाया जाए, सेंसेटिव जोन या खास सुरक्षा वाले इलाके में ड्रोन न उड़ाया जाए, सरकारी ऑफिस, सेना छावनी के आसपास में ड्रोन वर्जित हो। इसके साथ ड्रोन उड़ाने वाला कम से कम १८ साल या उससे ऊपर की होनी चाहिए। सबके सब बेकार साबित हुए। इतने साल बाद भी बिना परमीशन के ड्रोन जैसे चाहे, जहां चाहे उड़ रहे हैं।
सीआईडी करती है पूछताछ
सूत्र बताते हैं कि पुलिस महकमे का तो पता नहीं पर सीआईडी के जिम्मेदार इन ड्रोन कैमरे चलाने वालों से यदा-कदा पूछताछ करते रहते हैं। इनकी संख्या के साथ कुछ जरूरी सवाल कर इतिश्री कर ली जाती है जबकि कई आपराधिक कारनामों में ड्रोन कैमरों का इस्तेमाल हुआ है। परमीशन के बारे में भी बातचीत होती है तो ड्रोन कैमरे वाले ही यह कह देते हैं कि हम तो परमीशन ले लेंगे, आप तो यह बताओ किससे लेनी है? असल में इसका ही कोई सिस्टम अब तक तैयार नहीं हो पाया।नागौर में पहल, अब अनुमति के साथ दायरा तयसूत्रों ने बताया कि नागौर कलक्टर और एसपी को जिला बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) की ओर से पत्र भेजा गया है। इस पत्र में कहा गया है कि नागौर जिले में आवासीय बालिका विद्यालय/बालिका स्कूल समेत कई ऐसे इलाकों में ड्रोन कैमरों की आजादी निजता भंग कर रही है। ऐसे में परमीशन की व्यवस्था की जाए। यही नहीं ड्रोन कैमरे के जरिए लोगों को बेवजह डराने, तनाव देने वाले कुछ शातिर ड्रोन कैमरा चलाने वालों की शिकायत दर्ज तो नहीं होती, सुनने में आ जाती है। ऐसे में उन पर भी रोक लगाई जाए।