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शिक्षक ने बंजर भूमि में खिला दिए फूल, 22 साल की मेहनत से विद्यालय में छायी हरियाली

-पिपराली गांव की पूनिया की ढाणी के राजकीय प्राथमिक विद्यालय स्कूल में बच्चों को शिक्षा के साथ संस्कार एवं पर्यावरण का पढ़ाया जा रहा पाठ

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शिक्षक की 22 साल की मेहनत से विद्यालय में छायी हरियाली

चौसला. पिपराली के पास पूनिया की ढाणी में शिक्षक की मेहनत से फैली हरियाली व अभ्यास करते बच्चें।



शिक्षक बेमिसाल

चौसल (nagaur).अगर दिल में कुछ अलग करने का जज्बा हो तो इंसान के लिए सब संभव है। ऐसा ही कर दिखाया है पिपराली गांव की पूनिया की ढाणी के राजकीय प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक जग्गाराम सेवदा ने। इन्होंने अपने 22 साल के अथक प्रयास से न सिर्फ स्कूल की तस्वीर बदल दी, बल्कि पर्यावरण के प्रति एक नजीर पेश की है।शिक्षक द्वारा पर्यावरण संरक्षण क्षेत्र में किए काम दूसरे स्कूलों के लिए मिसाल बन चुके है। इनके स्कूल में प्रवेश करने पर नहीं लगता है कि हम सरकारी स्कूल में आ गए हैं। विद्यालय का अनुशासन और रखरखाव मॉडल स्कूल जैसा नजर आएगा। विद्यालय से बच्चे के लगातार दो-तीन दिन गायब रहने पर माता-पिता से संपर्क करना। पेड़-पौधों की बच्चों की तरह देखभाल करना। यह जग्गाराम की दिनचर्या में शामिल है। अपनी तैनाती के बाद उन्होंने विद्यालय की बदहाली देखी तो विभाग से बजट लेेने का प्रयास किया, लेकिन कामयाबी नहीं मिली।

जग्गाराम ने बताया कि जब मैं 2001 में इस विद्यालय में लगे तब परिसर में एक भी पौधा नहीं था। तब स्कूल परिसर को हरा-भरा करने की ठानी, ताकि स्कूल में पढ़ने वाले हर बच्चें को शीतल छांया नसीब हो सके। ढाणी के झाझड़ा परिवार के सहयोग स्कूल में कई कार्य करवाए। सुरक्षा की दृष्टि से विद्यालय की चारदीवारी का निर्माण करवाकर बिजली-पानी की समुचित व्यवस्था करवाई।

मन को सुकून दे रही हरियाली-प्रधानाध्यापक जग्गाराम सेवदा ने बच्चों को बेहतर शिक्षा देने के साथ उन्हें बागवानी से भी जोडने का काम किया है। 22 वर्षों की मेहनत का परिणाम है कि एक बंजर जमीन पर हरियाली छाई हुई है। शिक्षक पुराराम जैवल्या भी पिछले 6 साल से पेड-पौधों की देखभाल की कर रहे हैं। उनके जुनून से प्रेरित होकर और भी लोग हाथ बंटाते हैं। स्कूल में आज 40- 45 पेड़-पौधे लहलहा रहे है। कई अन्य कार्य भी स्कूलों के लिए प्रेरणा बने।