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करोड़ों की ठगी के मास्टर माइण्ड महमूद के पुश्तैनी मकान पर ईडी की दबिश, आठ घंटे चला सर्च ऑपरेशन

- महमूद के खिलाफ एसओजी के साथ ईडी में दर्ज अकूत सम्पत्ति का मामला, ईडी टीम ने किए दस्तावेज जब्त, ली सम्पत्तियों की जानकारी - करीब दो साल पहले दिए गए परिवाद पर पहली बार हुई कार्रवाई, महमूद करीब अस्सी करोड़ की ठगी का आरोपी, जयपुर में चला रहा कॉल सेंटर

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 दबिश

सस्ते ब्याज पर लोन देने के नाम पर अमरीका के करीब पांच सौ लोगों से करोड़ों की ठगी करने वाले महमूद के पुश्तैनी मकान पर मंगलवार तड़के ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) की टीम ने दबिश दी। एसओजी के बाद ईडी तक पहुंचे महमूद के अकूत सम्पत्ति के मामले में यह कार्रवाई की गई।



नागौर. सस्ते ब्याज पर लोन देने के नाम पर अमरीका के करीब पांच सौ लोगों से करोड़ों की ठगी करने वाले महमूद के पुश्तैनी मकान पर मंगलवार तड़के ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) की टीम ने दबिश दी। एसओजी के बाद ईडी तक पहुंचे महमूद के अकूत सम्पत्ति के मामले में यह कार्रवाई की गई। लक्ष्मी तारा सिनेमाघर के पीछे कालू खां की बाड़ी स्थित मकान में यह सर्च ऑपरेशन करीब आठ घंटे चला।

ईडी अफसरों ने अकूत सम्पत्ति के तहत ही यह जांच करने के साथ मामला दर्ज होने की बात स्वीकारी। हालांकि एसओजी/ईडी के साथ नागौर के तत्कालीन एसपी अभिजीत सिंह को इस बाबत परिवाद अगस्त 2021 को ही सौंप दिए गए थे। लगभग बाईस महीने बाद ईडी ने कार्रवाई शुरू की तो महमूद के पुश्तैनी मकान से। सूत्रों की माने तो तड़के दो गाडिय़ों में जयपुर से ईडी अफसरों की टीम सुरक्षाकर्मियों के साथ इस मकान पर पहुंची। मकान में महिलाएं व बच्चे थे। अफसरों ने घर के भीतर मौजूद दस्तावेजों को कब्जाया। साथ ही महमूद एवं भाईयों सहित परिवार के सदस्यों के मकान/डिपार्टमेंटल स्टोर सहित अन्य व्यवसाय के बारे में जानकारी ली। जानकारी के अनुसार महमूद सहित पांचों भाइयों के नागौर के साथ जयपुर ही नहीं बाड़मेर/जैसलमेर के अलावा राज्यों के बाहर भी करोड़ों की अकूत सम्पत्ति की जांच के तहत यह सब हो रहा है।फोन बंद, ना बातचीत ना अंदर-बाहर

सूत्रों के अनुसार ईडी टीम ने घर में प्रवेश करते ही सभी के मोबाइल बंद कर दिए। साथ ही उनसे बातचीत करने से मना करते हुए जांच में सहयोग करने को कहा। एक- दो बार घर के कुछ सदस्यों ने बाहर जाने की भी इजाजत मांगी। यही नहीं कुछ रसूखदार लोग भी वहां पहुंचे हालांकि ईडी अफसरों के अलावा वो परिजन से भी बात नहीं कर पाए। इक्का-दुक्का बार ही ईडी अफसरों ने परिजनों को बातचीत अथवा बाहर जाने की अनुमति दी। सिर्फ एक-दो जनों से बातचीत कराने के लिए जरूर अफसरों ने परिजनों से कहा। घर में रह रहा शमशेर, महमूद व अन्य भाइयों की तरह धोखाधड़ी के किसी मामले में शरीक नहीं है, बावजूद इसके शुरुआती दौर में हवाला से किसी रकम की खबर सोशल साइट पर जमकर वायरल हुई।

यह था परिवाद जो बड़ा मामला बना

अगस्त 2021 में ईडी के पास पहुंचे परिवाद में कहा गया था कि महमूद खान और उसके भाइयों की राजस्थान में करोड़ों की सम्पत्ति है। आधा दर्जन से अधिक लग्जरी गाडिय़ों के मालिक महमूद खान के कई डिपार्टमेंटल स्टोर चल रहे हैं। इसके तीन भाइयों पर आपराधिक मामले दर्ज हैं, वहीं बाड़मेर-जैसलमेर में भी इसकी करोड़ों की पुश्तैनी वसीयत है। परिवाद मिलने के बाद एसओजी-ईडी ने जहां अपनी कार्रवाई शुरू की। वहीं इसके भाई समेत अन्य पार्टनर तो उस समय भूमिगत हो गए थे। महमूद कई वर्षों से जयपुर रह रहा है। मोहाली/चण्डीगढ़ के अलावा इसका सारा कारोबार राजस्थान में ही बताया जाता है।

एफबीआई के दखल पर चेती थी सरकारें

सस्ते ऋण का झांसा देकर अमरीका के करीब पांच सौ लोगों से तीस करोड़ की ठगी के मामले में मुख्य आरोपी महमूद खान समेत नौ जनों का हवाला देते हुए अमरीका की जांच एजेंसी फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (एफबीआई) ने करीब ढाई साल पहले ठगी की रकम वापसी के लिए केन्द्र सरकार को पत्र लिखा था। इसके लिए एफबीआई ने एसओजी को भी पत्र भेजा है। पत्र में मुख्य आरोपी महमूद खान समेत करीब नौ जनों को कार्रवाई के बाद सुपुर्द करने को कहा था। इस ठगी में अमरीका के पांच सौ लोगों से करीब तीस-पैंतीस करोड़ की ठगी करने का जिक्र किया था। जबकि अन्य स्थानों से भी उसने करीब पचास करोड़ की ठगी की है।

अमरीकी टीचर ने की थी शिकायत, कॉल सेंटर पर भी पड़ा छापा

अमरीका में हुई ठगी के मामले में एक अमरीकी टीचर ने शिकायत की थी। जयपुर में एक मामला शिप्रा पथ पर तो दूसरा साइबर थाने में दर्ज हुआ। इन दोनों मामलों में परिवादी पुलिस ही है। इनकी चार्जशीट पेश हो चुकी है। अमरीका का मामला एफबीआई के जरिए भारत पहुंचा। महमूद ने अमरीकी कम्पनी बनवाई, यहीं बैठकर सस्ते लोन देने के नाम पर करोड़ों डालर की ठगी की बताई। मजे की बात यह कि लोगों को झांसा देकर रकम जमा कराने के लिए अमरीकी बैंक में ही खाते खोले गए, इनमें भी कई मासूम नागौर और आसपास के थे। अमरीकी बैंक से यह पैसा कई जगह होते हुए भारत पहुंचता था। उसे शिप्रा पथ थाना इलाके में चल रहे कॉल सेंटर में पुलिस ने दबिश दी थी।

यूं करते थे ठगी

विदेशियों को सस्ते लोन का झांसा देकर फोन करते थे, लोन लेने वाले से अलग-अलग मद में पैसे मांगते थे। कंपनी के नाम चेक मंगवाते फिर आई रकम को डकार लेते। यही नहीं अलग-अलग कंपनी के संचालन के लिए अलग-अलग शख्स तैयार करते हैं। जांच में सामने आया है कि जयपुर के एक कॉल सेंटर से ठगी की वारदात की गई। एफबीआई ने अनुसंधान कर बताया कि 500 अमरीकी नागरिकों से उपरोक्त आरोपियों ने ठगी की। आरोपी सस्ती दर पर लोन दिलाने का झांसा दे प्रोसेसिंग फीस, फाइल चार्ज, रजिस्ट्रेशन, कैशियर चेक के नाम पर करीब 10 हजार डॉलर की ठगी कर चुके। इसके लिए अमरीका में खोली गई कंपनियों के नाम से वर्चुअल ऑफिस (अमरीका के) पते पर कैशियर चेक मंगवा लेते। इसके बाद वर्चुअल ऑफिस पर सेवा प्रदाता कंपनी उक्त चेकों के संबंध में अवगत करवाकर यूएस के बैंक में जमा करवाते थे। आरोपी बैंक में चेक जमा होने के बाद वाया ट्रांसफर अमरीका से भारत में स्वयं और अन्य कंपनियों के बैंक खातों में जमा करवा लेते। आरोपी यूएस में किराए पर ऑनलाइन सर्वर के जरिए रिमोट पीसी एक्सेस कर स्थानीय आईपी एड्रेस को काम में लेते, जिससे बैंक को संदेह नहीं हो कि वायर ट्रांसफर किसी अन्य देश की आइपी एड्रेस पर किया जा रहा है।

भाई रफीक भी शातिर

महमूद खान की फर्जी कंपनियों के सह संचालक के रूप में काफी लोग काम करते थे। महमूद खान की कई कंपनी के डायरेक्टर-असिस्टेंट डायरेक्टरों की एक लंबी फेहरिस्त थी। महमूद का भाई रफीक भी पूरी तरह इस गौरखधंधे में लिप्त रहा है, तो दो अन्य भार्ई अपने नाम के खाते खुलवाकर रकम ट्रांसफर कराने के आरोपी हैं। एसओजी/साइबर के बाद अब ईडी के पास उसकी अकूत सम्पत्ति की जांच करने का जिम्मा है। महमूद अभी जमानत पर है। बताया जाता है कि महमूद के परिवार के सभी भाइयों के अलावा कुछ खास रिश्तेदार अथवा बिजनस पार्टनर की भी कुण्डली खंगाली जाएगी।