
पड़ताल
नागौर. जमीन व सम्पत्ति का विवाद या फिर लेन-देन को लेकर बलात्कार/पोक्सो का झूठा मामला दर्ज कराया जा रहा है। नागौर (डीडवाना-कुचामन) में जनवरी से सितम्बर तक इस साल में 142 मामलों में से 27 सामूहिक बलात्कार (गैंगरेप) के हैं, यानी हर माह औसतन तीन। हैरत की बात यह कि तीस फीसदी से अधिक मामले झूठे यानी रंजिशवश कराए गए। नियम की पालना नहीं हो रही, ऐसे में पीडि़ता की पहचान उजागर हो रही है। इस पर ध्यान नहीं दिया जा रहा। मेडिकल मुआयने पर भी नए आपराधिक कानून की कई बार अवहेलना होती देखी जा रही है।
सूत्रों के अनुसार बलात्कार व पोक्सो पीडि़ता की पहचान आए दिन उजागर हो रही है। अदालत में पेशी अथवा बयान के समय उनका चेहरा भी नहीं छिपा होता है। इसके अलावा अदालत के बाहर भी पुलिस के साथ उनकी मौजूदगी के बावजूद इस पर ध्यान नहीं दिया जाता। जबकि नियम यह है कि बलात्कार/पोक्सो पीडि़ता की पहचान कोर्ट/अस्पताल समेत अन्य स्थानों पर भी उजागर ना हो, इस पर पुलिसकर्मी ध्यान दें।
ऐसे भी कई मामले आए हैं जब पीडि़ता को मेडिकल के लिए चार-चार घंटे अस्पताल/स्थानीय पीएचसी तक में इंतजार करना पड़ा। स्थानीय होने के नाते पहले ही उसकी जान-पहचान रहती है, उसे देखते ही उसके साथ हुए दुष्कर्म की खबर लोगों के जरिए नाम समेत सोशल साइट पर वायरल हो जाती है। नासमझी ऐसी कि अनेकों बार पीडि़ता का पूरा ब्योरा ही नहीं उसकी फोटो तक सोशल साइट पर डाल दी जाती है जो नियमों के विपरीत है।
सूत्रों के अनुसार पिछले दिनों नावां में एक आपराधिक मामले में व्यक्ति का दत्तक पुत्री से सम्बंध का जिक्र खुद पुलिस ने सार्वजनिक कर दिया। इससे संबंधित व्यक्ति का भले ही अपराध उजागर हो पर युवती/बालिका की पहचान भी उजागर हो गई। यह सामाजिक जीवन में काफी मुश्किलभरा होता है। खुद पुलिस कई बार ऐसे मामलों में फूंक-फूंक कर कदम रखती है, वो भी नहीं चाहती कि जरा सी गलती पर युवती अथवा आरोपी के रिश्ते उजागर करने पर उसकी पहचान आमजन के सामने आए। पुलिस ने इसे लेकर कड़ी कोशिश भी की है।
आरोपी तक से नहीं हो पीडि़ता का आमना-सामना
जुलाई से लागू नए आपराधिक कानून में बलात्कार/यौन अपराध के संबंध में बयान लेने के दौरान किसी भी हाल में आरोपी से आमना-सामना पीडि़ता से नहीं कराने की पाबंदी लगाई गई है। साथ ही ऐसे मामलों की सुनवाई बंद कमरे में करने को कहा गया है। बावजूद इसके ऐसा हो नहीं रहा। ना बयान के लिए बंद कमरा मिल रहा है ना ही आरोपी के आमने-सामने होने पर रोक लग पाई है। कई बार तो ये आमने-सामने खड़े मिल रहे हैं। पीडि़ता के बयान महिला न्यायिक अधिकारी ही दर्ज करेगी, अधिकांश मामलों में ऐसा हो रहा है। पीडि़ता की मेडिकल रिपोर्ट भी डॉक्टर सात दिन में आईओ को उपलब्ध नहीं करा रहा। किसी ना किसी बहाने से यह अब भी समय पर नहीं मिल रही।
महिला चिकित्सक मिलना अब भी दूभर
कुछ दिन पहले ही पोक्सो के एक मामले में मेडिकल कराने के लिए पुलिस के साथ पीडि़ता को करीब छह घंटे दौड़-भाग करनी पड़ी। पहले सुरपालिया फिर रोल, यहां भी नहीं हुआ तो जायल निकल गए थे पर बीच रास्ते रोल वापस आने को कहा गया। यह कोई एक मामला नहीं है। कुछ समय पहले गैंगरेप की शिकार बालिका को अलाय स्थित पीएचसी ले जाया गया, जहां से महिला चिकित्सक को बुलाते-बुलाते चार घंटे बीत गए। ऐसे में पोक्सो/बलात्कार पीडि़ता की पहचान कैसे छिपे जब उसके साथ पुलिस हो और चेहरे पर भी कोई नकाब ना हो। बताया जाता है कि नागौर में पहले भी कई महिला चिकित्सक ऐसे मामलों में मेडिकल करने से बचती रही हैं।
सोशल मीडिया पर सख्ती नहीं...
सूत्र बताते हैं कि ऐसे मामलों में सोशल मीडिया पर कोई सख्ती नहीं हो रही। तरह-तरह के लांछन के साथ पीडि़ताओं की पहचान उजागर की जा रही है। ऐसी शिकायतें असल में पुलिस तक पहुंचती ही नहीं है। इसे लेकर लोगों में जानकारी तक नहीं है कि कानूनन ऐसी पीडि़ता का नाम/पहचान उजागर करना अपराध है, इस पर सजा का भी प्रावधान है।
एक नजर आंकड़ों पर..
जनवरी से सितम्बर तक (नागौर-डीडवाना) जिले में 142 मामले बलात्कार/पोक्सो के दर्ज हुए। इनमें 27 गैंगरेप के हैं। इनमें तीस फीसदी से अधिक झूठे पाए गए। किसी में खेत/जमीन के विवाद में पनपी दुश्मनी में मामला दर्ज कराया तो किसी साहूकार पर उधारी लेने से परेशान होकर झूठी रिपोर्ट दर्ज करा दी । कुछ समय पहले एक जने ने साजिशन अपने दुश्मन व उसके साथियों पर नाबालिग से गैंगरेप का मामला दर्ज करवा दिया। पुलिस अफसर खुद तक मानते हैं कि बलात्कार के कई मामले झूठे होते हैं तो कई दबाव में दर्ज कराए जाते हैं।
इनका कहना...
ऐसे मामलों में पीडि़ताओं की पहचान छिपाने की भरसक कोशिश की जाती है। इस संबंध में थाना प्रभारी के साथ सभी पुलिसकर्मियों को भी सावचेत किया गया है। किसी भी हाल में इनकी पहचान उजागर ना हो, इनके बयान/मेडिकल भी नियमों के तहत हों, इस पर भी ध्यान देंगे।
-रामप्रताप विश्नोई, सीओ, नागौर शहर
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इस तरह की गोपनीयता उजागर होने पर जुर्माने के साथ छह मास तक कारावास की सजा का प्रावधान है। नियम-कायदों का ध्यान रखा जाए, इसके लिए पुलिस/चिकित्सक समेत अन्य जिम्मेदार भी इस पर सजगता रखें।
- मनोज सोनी,अध्यक्ष, बाल कल्याण समिति,नागौर।
Updated on:
23 Oct 2024 09:23 pm
Published on:
23 Oct 2024 09:23 pm
