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Nagaur patrika news. नागौर में हर जगह सडक़ों पर चलते-फिरते खतरों का कब्जा

Nagaur patrika-जिले के सार्वजनिक मार्गों, उपमार्गो, हाइवे, गलियों आदि में भटकते गोवंशों का कब्जा, पिछले तीन से चार सालों में सांडों ने जिंदगियां भी लीली, अस्पताल भी पहुंचाया, फिर भी हालात बेहाल, सो रहे जिम्मेदार

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Everywhere in Nagaur, the occupation of the dangers on the roads

Everywhere in Nagaur, the occupation of the dangers on the roads

नागौर. जिले के प्रमुख सार्वजनिक मार्गों, उपमार्गों एवं गलियों में लावारिश की हालत में घूमते आवारा जानवरों का बसेरा रहता है। नागौर का गांधी चौक स्थित सब्जीमंडी हो या फिर कुचामन की बस स्टैंड के पास स्थित सब्जीमंडी! सभी जगहों पर इनका कब्जा रहता है। जिम्मेदारों की बेपरवाही के चलते पिछले तीन से चार सालों के अंतराल में तकरीबन तीन जनों की जहां इस बेरवाही के चलते आवारा जानवरों ने जान ले ली, वहीं दर्जनों अब तक घायल हो चुके हैं। अकेले नागौर के ही शहर के मुख्य इलाकों और कई छोटी-बड़ी गलियों में आवारा पशुओं ने हर जगह अपना अड्डा बना रखा है। यहां तक की रेलवे स्टेशन से लेकर कलेक्ट्रेट रोड पर भी इनका राज है। लावारिस गोवंश से लोग परेशान हैं। आवारा पशु सडक़ हादसों का कारण बन रहे हैं। चौराहे पर आवारा पशुओं की भीड़ लोगों के लिए इतना परेशान का सबब बन चुकी है कि लोगों के वाहनों को निकलने में दिक्कतें आ रही है। रोडवेज डिपो परिसर में भी आवारा पशुओं जमावड़ा रहने लगा है। हाईवे और शहर की सडक़ों पर आए दिन दुपहिया वाहन आवारा पशुओं से टकरा कर घायल हो जाते है। आवारा गौवंशों की संख्या भी दिन ब दिन बढ़ती चली जा रही है। आवारा पशुओं को जितना दूर इन्हें ले जाकर छोडकऱ आते है, कुछ ही दिनों में उनकी मौजूदगी साफ नजर आती है। इसी कारण हाइवे पर भिड़ंत से जानमाल की हानि होने की संभावनाएं बनी रहती है।
यही नहीं, सब्जी मंडी हो या बस स्टैण्ड अथवा शहर का भीतरी भाग। लावारिस सांडों के आतंक से शहर का कोई भी क्षेत्र अछूता नहीं है। बंशीवाला मंदिर क्षेत्र में सांडों का सबसे ज्यादा जमावड़ा रहता है और आए दिन ये लोगों को चोटिल करते हैं। मवेशियों ने शहरवासियों का जीना मुश्किल कर रखा है। बाजार में शहर की संकरी गलियों में तो हालात और भी खराब है। सुबह-शाम मंदिर जाने या अन्य काम से बाहर जाने वाली महिलाओं व राजमार्ग पर वाहन चालकों को संभलकर चलना पड़ता है। पशुओं के आतंक से तंग आ चुके विभिन्न संगठनों व संस्थाओं के लोग प्रशासन को अपनी पीड़ा बता चुके हैं लेकिन जिम्मेदारों के कान पर जूं तक नहीं रेंगती।
आंखों देखा हाल...
पालीटेक्निक कॉलेज: सडक़ों पर कब्जा.........
कॉलेज के ठीक सामने स्थित सडक़ों के दोनो ओर आवारा सांडों का कब्जा नजर आया। स्थिति यह रही कि वाहन को भी सडक़ पर से निकालने में दिक्कत हो रही थी। दस मीटर आगे चले तो दो सांड सामने आ गए। बमुश्किल गाड़ी को बचाकर निकाला।
जेएलएन के पास-हाइवे पर भटकते साड़...............
जेएलएन के ठीक बगल में ही आवारा गोवंशों का जमावड़ा नजर आया। यहां पर रिजका भी डालकर बेचा जा रहा था। आते-जाते वाहन चालकों को रिजका पकड़ाया जा रहा था, और यहां भटकते सांड लोगों को खतरे का आमंत्रण देते नजर आए।
सुगनसिंह सर्किल: फुटपाथ पर कब्जा...........
इस सर्किल के चारों कोनों पर सांड नजर आए। विशेष बात यह रही कि सडक़ के दोनों ओर एक-एक की संख्या में सांड बैठे आराम कर रहे थे। यही भोजन की तलाश में निकलते हैं तो फिर हादसे का सबब भी बन जाते हैं।
रीको एरिया: प्रवेश करते ही सांडों से स्वागत.......
रीको एरिया में प्रवेश करते ही सीधा सामना सांडों से हुआ। मुख्य रास्ते से प्रवेश करने के बाद विवेकानंद राजकीय मॉडल स्कूल के रास्ते पहुंचने तक दर्जन भर सांड भटकते मिले। आगे यहीं स्कूल के पास कचरे के ढेर में भी यह आवारा जानवर भोजन की तलाश में जुटे मिले।
कलक्ट्रेट रोड: सडक़ों के दोनों तरफ इनका राज
कलक्ट्रेट रोड पर नगरपरिषद, नकासगेट से लेकर इस रास्ते से मानासर चौराहे तक कई जगहों पर यह भोजन की तलाश में भटकते गोवंश नजर आए, लेकिन इनकी रोकथाम करने के लिए जिम्मेदार कहीं नहीं दिखाई दिए।
बीकानेर रोड: हाइवे पर मिले चलते-फिरते खतरे
रेलवे लाइन पार बीकानेर रोड पर हाइवे के दोनों ओर गुजरते वाहनों के बीच भी भटकते गोवंशों का कब्जा नजर आया। पूर्व में इस मार्ग पर सांडों के चलते पिछले तीन सालों में बड़े हादसे भी हो चुके हैं। इसके बाद भी यहां पर रिजका की बिक्री के साथ भटकते सांड चलते-फिरते खतरे के तौर पर मंडराते मिले।

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