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डाक विभाग की नौकरी में फर्जीवाड़ा, 37 अभ्यार्थियों ने लगाई फर्जी मार्कशीट

डाक विभाग में सरकारी नौकरी पाने के लिए फर्जी मार्कशीट बनवाने वाले कोई एक-दो नहीं पूरे 37 निकले। अधिकांश नागौर के युवक-युवती हैं । मार्कशीट किसी ने आंधप्रदेश से ली तो किसी ने तेलंगाना से, कोई भोपाल से ले आया तो कोई तमिलनाडू से।

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नागौर

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Kirti Verma

Jul 22, 2023

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नागौर. डाक विभाग में सरकारी नौकरी पाने के लिए फर्जी मार्कशीट बनवाने वाले कोई एक-दो नहीं पूरे 37 निकले। अधिकांश नागौर के युवक-युवती हैं । मार्कशीट किसी ने आंधप्रदेश से ली तो किसी ने तेलंगाना से, कोई भोपाल से ले आया तो कोई तमिलनाडू से। नागौर के डाक विभाग ने जब संबंधित बोर्ड से इनकी मार्कशीट की असलियत जानी तो यह खेल सामने आया। अभी 21 अभ्यर्थी के दस्तावेज जांचे जाने बाकी हैं। इस बड़े फर्जीवाड़े में किसी स्थानीय किसी गिरोह के शामिल होने की आशंका जताई जा रही है। डाकघर अधीक्षक रामवतार सोनी ने कोतवाली थाने में दो अलग-अलग एफआईआर दर्ज कराई है। फर्जी मार्कशीट के लाखों के खेल में किसी रसूखदार या नेता के होने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।

सूत्रों के अनुसार पिछले साल मई तो इस साल जनवरी में निकली दो अलग-अलग भर्ती के दौरान हुआ यह फर्जीवाड़ा पकड़ में आया है। डाक विभाग की ओर से मई-2022 और जनवरी 2025 में ग्रामीण डाक सेवक, शाखा डाकपाल और सहायक शाखा डाकपाल की भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन मांगे थे। इसके लिए योग्यता सिर्फ दसवीं पास थी। आवेदन के समय अभ्यर्थी ने केवल दसवीं के प्राप्त नंबर का ही उल्लेख किया था। उसके बाद मेरिट के आधार पर चयनित होने पर मार्कशीट/मेडिकल बिल व अन्य दस्तावेज दिए, जो जांचने के लिए नागौर मण्डल आए। यहां संबंधित बोर्ड से जांच में कुल 37 जनों की मार्कशीट फर्जी मिली, जबकि ये एक तरह से नौकरी के लिए अंकों के आधार पर चयनित हो गए थे।


सबकी जन्मतिथि 2005
यही नहीं फर्जी मार्कशीट वाले सभी 37 अभ्यर्थियों की जन्मतिथि में वर्ष 2005 ही दर्ज है। इसके अलावा आधा दर्जन युवतियां इसमें शामिल हैं। फिलहाल पूछताछ में इन्होंने किसी भी स्तर से ना तो मार्कशीट को गलत बताया ना ही किसी को पैसे देने की बात कही है।

डाकघर अधीक्षक ने दो अलग-अलग एफआईआर में फर्जी मार्कशीट पेश करने वाले 37 जनों का उल्लेख किया है। अधिकांश नागौर जिले के ही हैं, पुलिस अपने स्तर पर जांच कर रही है, इसके पीछे किसका हाथ है, जल्द ही खुलासा किया जाएगा।
रमेंद्र सिंह हाडा, सीआई कोतवाली, नागौर

दो अलग-अलग भर्ती में जब अभ्यर्थियों के दस्तावेज संबंधित बोर्ड से तस्दीक किए गए तो उन्होंने इनके संबंध में मना कर दिया। इस तरह फर्जी मार्कशीट पेश कर अन्य योग्य उम्मीदवारों के साथ भी इन्होंने विश्वासघात किया। फर्जी मार्कशीट देने वाले सभी अभ्यर्थियों के खिलाफ कोतवाली में दो मामले दर्ज कराए हैं।
रामवतार सोनी, अधीक्षक डाकघर नागौर

सूत्र बताते हैं कि पहली भर्ती मई 2022 में ग्रामीण डाकसेवक, शाखा डाकपाल और सहायक शाखा डाकपाल के नागौर जिले में 106 पदों के लिए निकाली गई थी। आवेदन भी खूब हुए पर नागौर के 87 अभ्यर्थियों को ही वरीयता सूची में शामिल किया गया। इनमें 49 ने ज्वॉइन कर लिया, जबकि 28 की मार्कशीट ही फर्जी पाई गई। इसमें आंध्रप्रदेश ओपन स्कूल सोसायटी की चार, बोर्ड ऑफ सैकण्डरी एजुकेशन की चार, तेलंगाना बोर्ड ऑफ एजुकेशन की पांच तो स्टेट बोर्ड ऑफ स्कूल एग्जामिनेशन तमिलनाडू की 12 मार्कशीट फर्जी निकली। डाक विभाग के जिम्मेदार अफसर रमेश ने इसकी संबंधित बोर्ड/विभाग से तस्दीक की तो वहां के प्रबंधन ने इनको जाली बताया।

दूसरी भर्ती में नौ फर्जी, अभी 21 की जांच बाकी
सूत्रों का कहना है कि जनवरी 23 को इन्हीं पदों पर 77 भर्ती के लिए आवेदन ऑनलाइन मांगे गए। इनमें 53 अभ्यर्थी वरीयता सूची में पाए गए। इनके दस्तावेज की जांच कराई गई तो नौ की मार्कशीट फर्जी पाई गई। यह मार्कशीट महर्षि पतंजलि संस्कृत संस्थान भोपाल की थीं। जब नागौर मण्डल से संस्थान को इस बाबत जानकारी दी गई तो उन्होंने मना कर दिया कि इन नौ ने उनके यहां ना पढ़ाई की ना ही परीक्षा दी। इस भर्ती के 21 अभ्यर्थियों के दस्तावेज जांचे जाने बाकी हैं। हो सकता है कि उसमें भी कुछ की मार्कशीट जाली निकले।

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सबके नंबर 95 से सौ फीसदी
फर्जी मार्कशीट वालों को तुरंत ही नौकरी पाने वालों की लिस्ट में शामिल कर लिया गया। इसकी वजह भी थी कि सभी के नंबर 95 से सौ फीसदी तक थे। मतलब साफ है जिसने भी कारस्तानी की, उसमें नंबर खूब दिए गए। शुरुआत में तो नंबर देखने पर शक भी हुआ पर कोई कुछ नहीं बोला। बाद में जब फर्जी डिग्री का खुलासा हुआ तो हकीकत सामने आई।


आखिर मास्टर माइण्ड या सूत्रधार कौन?
सूत्रों की मानें तो एसपी राममूर्ति जोशी के पास भी जब इस मामले की जानकारी पहुंची तो खुद अचरज में आ गए। इन अभ्यर्थियों के लिंक तमिलनाडू, तेलंगाना, आंध्रप्रदेश या फिर भोपाल से कैसे जुड़ते हुए फर्जी मार्कशीट बनाने वाले मास्टरमाइण्ड तक पहुंचे। जाहिर सी बात है कि इसके लिए अभ्यर्थियों ने मोटी रकम भी दी होगी। इन अभ्यर्थियों से जब डाक विभाग ने औपचारिक बातचीत में पूछा तो वे अपने को सही बताते रहे। नागौर मुख्यालय ही नहीं मेड़ता, रियांबड़ी, मकराना समेत अन्य उपखण्डों के भी अभ्यर्थी इस फर्जीवाड़े में शामिल हैं। बाहरी जिले के इक्का-दुक्का ही पाए गए।

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