
खींवसर। देखरेख के अभाव में क्षतिग्रस्त हुआ भावण्डा पटवार घर।
सवाईसिंह हमीराणा
खींवसर(नागौर). सरकार द्वारा डिजिटल इंडिया लैण्ड रिकॉर्ड मार्डनाईजेशन प्रोग्राम के तहत राजस्व विभाग को हाईटेक बनाने की तैयारी चल रही है तो दूसरी ओर राजस्व विभाग की कड़ी माने जाने वाले पटवारी के लिए बैठने का ना कोई ठोर है ना ठिकाना। हालात यह है कि जिले के 73 पटवार मण्डलों के पटवार घर मरम्मत के अभाव में क्षतिग्रस्त होने से इनके कार्यालय थैले में संचालित हो रहे हैं। एक पटवार मण्डल में औसतन तीन से पांच गांव के लोगों को अपने राजस्व कार्य के लिए थैले के पीछे भागना पड़ रहा है। दशकों पूर्व बने पटवार घर जीर्ण-शीर्ण अवस्था में बड़े हादसे को आमंत्रण देते नजर आ रहे हैं। स्वयं विभाग के अधिकारियों ने इन जर्जर भवनों को खतरनाक माना है तथा राजस्व विभाग ने भी इनके कई बार प्रस्ताव बनाकर राजस्व मण्डल भेजे, लेकिन वहां केवल तकमीना मांगवाया जाता है, बजट आज तक नहीं दिया है। यहां नऐ भवन बनाना तो दूर सरकार इन भवनों की मरम्मत करवाकर किसी बड़े हादसे को रोकने के प्रयास तक नहीं कर रही है। जिलेभर में राजस्व कार्य को लेकर कर्मचारियों के बैठने व रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने के लिए बनाए गए पटवार भवन देखरेख के अभाव में जीर्ण-शीर्ण हो पहुंच चुके हैं।
बिन ठिकाने भटक रहे
पटवारी व राजस्व कर्मचारी अपनी जान दाव पर लगाकर इन भवनों में ही कार्य करने को मजबूर है। लेकिन इन भवनों की मरम्मत को लेकर भू अभिलेख अधिकारियों द्वारा कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। हालात यह है कि ग्राम तरनाऊ में बनाया गया पटवारी भवन देखरेख के अभाव में पूरी तरह नष्ट हो चुका है। इन जर्जर भवनों में ना पटवारी जाना चाहते हैं ना ग्रामीण। ऐसे में पटवारियों के थैले में ही राजस्व कार्य सम्पादित हो रहे हैं। जिला कलक्टर द्वारा वर्ष 2014 में जिलेभर में मरम्मत योग्य 73 पटवार भवनों को चिन्हित किया गया था जो सरकारी कार्यालय संचालन के लिहाजे खतरनाक थे, लेकिन 6 वर्ष बीतने के बाद भी अभी तक इन भवनों के मरम्मत का कार्य नहीं होने से राजस्व कार्मिकों व ग्रामीणों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
काश्तकार परेशान
पटवार भवनों के नहीं होने से काश्तकारों अपने राजस्व कार्यों के लिए पटवारियों के पीछे चक्कर काटने को मजबूर है। काश्तकारों को सीमाज्ञान, राजस्व नकले, केसीसी योजना, प्रधामंत्री सम्मान निधि योजना, भूमि प्रमाण पत्र, खाद्य सुरक्षा योजना सहित अनेक योजनाओं का लाभ लेने के लिए पटवारी की रिपोर्ट अनिवार्य होती है ऐसे में स्थाई ठिकाने के अभाव में काश्तकारों को चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
इन भवनों की स्थिति जीर्ण-शीर्ण
जिले के खींवसर ब्लॉक में भेड़, तांतवास, भूण्डेल, पंाचलासिद्धा, पिपलिया, कांटिया, मूण्डवा ब्लॉक में थिरोद, ईनाणा, गोवाकला, गोठड़ा, कड़लू, फिड़ौद, जायल ब्लॉक में आकोड़ा, गुगरियाली, बोड़वा, खियांला, तंवरा, जायल, मेड़ता ब्लॉक में इन्दावड़, छताणी, पुन्दलु, सातलवास, रियांबड़ी ब्लॉक में बीजाथल, निम्बोला बिस्वा, पदूखुर्द, कात्यासनी, पदूकलां, डीडवाना ब्लॉक में खरेश, आकोदा, दौलतपुरा, धनकोली, नूवां, दीनदारपुरा, लाडनूं ब्लॉक में दूजाद, सांवराद, बल्दू, ढींगसरी, परबतसर ब्लॉक में कुराड़ा, जावला, राबडिय़ाद, नेतियास, किनसरिया, मकराना ब्लॉक में गच्छीपुरा, अलतवा, भींचावा, राणीगांव, कुचामनसिटी ब्लॉक में अडक़सर, पांचवा, पलाडा, नावां ब्लॉक में खाखडक़ी, भगवानपुरा, इन्दौखा, टोडास, मारोठ व लूणवा में भवनों की स्थिति जीर्ण-शीर्ण है।
इनकी स्थिति खतरनाक
जिले के खींवसर ब्लॉक में नागड़ी, भावण्डा, जायल ब्लॉक में रोहिणा, बरनेल, ढेहरी, रियांबड़ी में जसनगर, गवारड़ी, धांधलास उदा, ढाणीपुरा, डेगाना में मांझी, गुणसली, मेवड़ा, चांदारूण व कुचामनसिटी ब्लॉक में रसाल व परेवड़ी में बने पटवार भवन खतरनाक स्थिति में पहुंच चुके हैं जो कभी भी गिरकर जमीदोज हो सकते हैं।
भेजे गए हैं प्रस्ताव
रेवेन्यू बोर्ड द्वारा क्षतिग्रस्त पटवार घरों की जानकारी मांगी गई थी जिस पर हमने सम्पूर्ण जानकारी की सूची बनाकर भेज दी है। वहां से बजट मिलने के बाद ही पटवार घरों की मरम्मत हो पाएगी।
- रामस्वरूप जौहर तहसीलदार , खींवसर
बरसात में हालत खराब
पटवार घर अत्यधिक क्षतिग्रस्त है। बरसात में तो बैठने लायक तक नहीं है कई बार प्रस्ताव बनाकर भिजवाया गया है। लेकिन अभी तक मरम्मत नहीं करवाई गई है।
- रामपाल पटवारी, भेड़
Published on:
23 Jul 2020 05:12 pm
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