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पांच साल पूरे हो रहे, पर घूंघट की ओट से बाहर नहीं निकल पाई महिला जनप्रतिनिधि

नागौर पंचायत समिति की बैठक आयोजित, सड़क, बिजली, पानी जैसे मुद्दों पर हुई चर्चा, प्रधानमंत्री ग्राम सडक़ योजना-चतुर्थ के लिए डीआरआरपी केन्डीडेटरोड एवं सीएनसीपीएल के प्रस्तावों का अनुमोदन किया

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Panchayat samiti meeting

नागौर पंचायत समिति की बैठक में घूंघट में बैठी महिला जनप्रतिनिधि

नागौर. पंचायत राज व्यवस्था में 50 प्रतिशत आरक्षण के बल पर महिलाओं के सिर पर प्रधान, पंचायत समिति सदस्य व सरपंच का ताज तो सज गया, लेकिन राजनीति में उनकी भागीदारी शोपीस से अधिक कुछ नहीं है। पंचायत समिति सदस्यों के कार्यकाल के पांच साल पूरे होने को हैं, लेकिन निर्वाचित महिलाएं घूंघट की ओट से बाहर नहीं निकल पा पाई हैं। इसे चाहे गांवों की मर्यादा कहें या रूढि़वादी परंपरा। महिला जनप्रतिनिधि बैठकों में भी घूंघट की आड़ में रहती हैं, जबकि नागौर पंचायत समिति की प्रधान एवं उप प्रधान महिलाएं हैं। इसके बावजूद सोमवार को आयोजित बैठक में प्रधान, उप प्रधान सहित अन्य महिला सदस्य घूंघट की ओट में दिखीं। इन पांच सालों में ज्यादातर महिला जनप्रतिनिधि राजनीतिक कार्यों की जगह रसोई व खेत में ही काम करती नजर आई। कुछेक को छोडक़र अधिकांश महिलाएं कभी भी घूंघट से बाहर नहीं आ सकी। कहने को तो महिलाएं चुनकर असली जनप्रतिनिधि होती हैं, लेकिन पंचायत में उनकी भागीदारी धरातल पर देखने को नहीं मिलती। कहीं उनके पति तो कहीं बेटे या परिवार का पुरुष सदस्य काम करता है। ज्यादातर कार्यक्रमों में महिलाओं की जगह उनके प्रतिनिधि ही भाग लेते हैं। हालांकि कुछ महिला जनप्रतिनिधि ऐसी भी हैं, जो अपने दम पर सत्ता को चलाती हैं और पुरुषों से बेहतर काम करके दिखाती हैं।

इन मुद्दों पर हुई चर्चा

कार्यवाहक बीडीओ चरणसिंह ने बताया कि प्रधान सुमन मेघवाल की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में प्रधानमंत्री ग्राम सडक़ योजना-चतुर्थ के लिए डीआरआरपी केन्डीडेटरोड एवं सीएनसीपीएल के प्रस्तावों का अनुमोदन किया गया। इसी प्रकार राज्य वित्त आयोग-छह व बीपीडीपी प्लान 2025-26 एवं मुख्यमंत्री जल स्वावलम्बन योजना का अनुमोदन किया गया। इसके साथ क्षेत्र की बिजली, पानी व सडक़ों से जुड़ी समस्याओं को लेकर चर्चा की गई।

वन्य जीवों के लिए हो पानी की व्यवस्था

पंचायत समिति सदस्य अनोपचंद विश्नोई ने बैठक में वन्य जीवों के लिए पानी की व्यवस्था का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि गर्मियों में हर बार जलदाय विभाग की ओर से टेंकर की व्यवस्था की जाती है, जिनसे वन्य जीवों के लिए खेळियों को भर दिया जाता है, लेकिन इस बार टेंकरों की व्यवस्था नहीं हुई है, ऐेसे में वन्य जीव-जन्तुओं के जीवन पर संकट खड़ा हो गया है। विश्नोई ने बताया कि दानदाता टेंकर के पैसे देने को भी तैयार हैं, लेकिन गोगेलाव डेम से पानी भरने की व्यवस्था नहीं हो रही है। उन्होंने विभागीय अधिकारियों से रोजाना दो टेंकर दो बजे बाद भरने का आग्रह किया, लेकिन स्वीकृति नहीं मिल पाई है।

न विधायक पहुंचे, न सांसद

पंचायत समिति की बैठक में सांसद हनुमान बेनीवाल सहित राज्य मंत्री डॉ. मंजू बाघमार, नागौर विधायक हरेन्द्र मिर्धा, खींवसर विधायक रेवंतराम डांगा एवं जिला प्रमुख भागीरथराम चौधरी को आमंत्रित किया गया था, लेकिन कोई नहीं पहुंचा। हरेन्द्र मिर्धा नागौर के विधायक होने के बावजूद अब तक एक बार भी पंचायत समिति व जिला परिषद की बैठक में शामिल नहीं हुए हैं। गौरतलब है कि पंचायत समिति की गत बैठक में सांसद बेनीवाल शामिल हुए थे।