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कहर बरपाता कोहरा बढ़ाता है हादसे

-गर्मी के बजाय सर्दी में सड़क हादसे ज्यादा, मृतकों की संख्या भी 17 फीसदी अधिक, सर्दी में 57 फीसदी हादसों में 32 फीसदी का मुख्य कारण कोहरा, गाइड लाइन का वाहन चालक उड़ा रहे हैं मखौल

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बदलते मौसम में कोहरा सड़क हादसों में तेजी से इजाफा कर रहा है

सर्दी में सड़क हादसे करीब तेरह फीसदी बढ़ जाते हैं, यही नहीं मरने वालों की संख्या में भी गर्मी की तुलना में बढ़ोत्तरी होती है।

नागौर. बदलते मौसम में कोहरा सड़क हादसों में तेजी से इजाफा कर रहा है। सुबह ही नहीं देर रात में छाई धुंध वाहन चालकों के लिए मुसीबत बन रही है। सर्दी में सड़क हादसे करीब तेरह फीसदी बढ़ जाते हैं, यही नहीं मरने वालों की संख्या में भी गर्मी की तुलना में करीब सत्रह फीसदी बढ़ोत्तरी होती है।

सूत्रों के अनुसार पिछले सात साल में नागौर जिले में हुए सड़क हादसों की पड़ताल में कमोबेश यही सामने आया। करीब 57 फीसदी बड़े हादसे (बड़े वाहन-मरने वाले अधिक) सर्द मौसम में ही हुए। इनमें 32 फीसदी हादसों का मुख्य कारण कोहरा बना। वाहन चालकों की समझाइश अब तक रंग नहीं ला पा रही है। सात साल में करीब 2764 जने सड़क हादसे में काल का शिकार हुए हैं, जबकि घायलों की संख्या छह हजार से अधिक रही।

असल में बार-बार सर्दी के मौसम में वाहन चालकों को सुरक्षित वाहन चलाने का पुलिस आग्रह करती रही, लेकिन ऐसा नहीं होने से कमी नहीं आ सकी। कोहरे में एक मीटर की दूरी पर ही देखना मुश्किल हो जाए तो ऐसे में तेज गति से चलते वाहन कभी सामने से भिड़ जाते हैं तो कभी खड़े वाहन में घुस जाते हैं। वाहन चालक ना गाड़ी धीरे चलाते हैं ना ही बेवजह ओवरटेक से बचते हैं।

पुलिस ने कई बार वाहन चालकों को कहा गया कि वे कोहरे में गाड़ी चलाते समय दिन में भी पार्किंग लाइट जलाकर चलें , ताकि दूसरे वाहन चालकों को गाड़ी दिख सके। बावजूद इसके कोई इस पर ध्यान नहीं दे रहा। ना वाहन चलाते समय फोग लाइट का इस्तेमाल कर रहे हैं और ना ही सामने वाली गाड़ी से आवश्यक दूरी बनाकर चलते हैं। हाई-वे पर सड़क किनारे पट्टी का ध्यान रखने के साथ रियर व्यू मिरर पर ध्यान देने की भी नसीहत दी जा चुकी है।

यह भी रखें ध्यान

- सभी यात्री सीट बेल्ट अवश्य लगाएं

-लिंक रोड से आने वाली गाडिय़ों पर ध्यान देकर बचाव करें।

-फ्लाईओवर, हाईवे पर गाड़ी कभी न रोकें।

-मोबाइल फ ोन का इस्तेमाल न करें। बाहर की आवाज सुनने के लिए शीशा थोड़ा नीचे रखें।

- लो बीम पर रखें लाइट। कोहरे में गाड़ी ड्राइविंग करते समय हेडलैम्प्स को हाई बीम पर न रखें, इससे कोहरे में रोशनी फैल जाती है और सामने कुछ नजर नहीं आता।

-ऐसे कपडे पहनें जिनसे लाइट रिफ्लेक्ट करे। रिफ्लेक्टिव जैकेट का यूज करें।

40 फीसदी तोड़ देते हैं दम

एक अनुमान के मुताबिक तीस से चालीस फीसदी घायल समय पर उपचार नहीं मिलने की वजह से दम तोड़ देते हैं। हादसे के बाद भागी गाडिय़ां पकड़ पाने में पुलिस को कामयाबी कम ही मिल पाती है। करीब छह साल पहले नाकाबंदी के दौरान श्रीबालाजी थाना प्रभारी पूर्णमल मीणा को कुचलने वाली गाड़ी का अब तक पता नहीं चल पाया है। अधिकांश सड़क हादसों में घायलों की मौत का सबसे बड़ा कारण यही है कि वे समय पर अस्पताल तक नहीं पहुंच पाते। घायल लहूलुहान पड़े रहते हैं, खून का बहना बंद नहीं होता और उनकी मौत हो जाती है।

हादसे के साथ जान जाने के कारण और भी

बढ़ते सड़क हादसे में लापरवाही अथवा शराब पीना भी मुख्य कारणों में माना जाता है तो बिना हेलमेट पहने वाहन चलाते समय घायलों में से 35 फीसदी की मौत हो जाती है। टूटी सड़कों पर चलना दूभर हो रहा है, कई बार यह भी दुर्घटना की वजह बनती हैं। कुछ समय पहले सुप्रीम कोर्ट ने भी हादसों में हो रही मौतों को पचास फीसदी से कम करने के आदेश दिए थे। बावजूद इसके ये रुक नहीं रहे। ऐसा भी नहीं है कि सड़क सुरक्षा सप्ताह नहीं मन रहा या फिर जागरूकता की कोई कमी है। बावजूद इसके वाहन चालक नियमों को ताक पर रखकर चल रहे हैं। कुछ ब्लैक स्पॉट चिन्हित तो हैं पर यातायात सुगम करने की दृष्टि से यहां कुछ नहीं हो पा रहा। सड़क हादसों से संबंधित एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि सड़क हादसों में चालीस फीसदी उन घायलों की मौत हो जाती है जो बिना हेलमेट के वाहन चलाते हैं। यह भी बताया जाता है कि अधिकांश सड़क हादसों में दुपहिया वाहन चालक के सिर पर चोट आती है। हेलमेट इसका बचाव करता है। ऐसे में माना जाता है कि हेलमेट लगाकर सभी गाड़ी चलाएं तो इनमें कमी आ सकती है।

मदद का इनाम बस पांच को

हादसे के गंभीर घायल को समय पर अस्पताल पहुंचाने वाले मददगारों को पांच हजार रुपए का इनाम व प्रशस्ति पत्र देने की योजना लोगों को भा नहीं रही है। लगभग तीन साल में जीवन बचाने वाले सिर्फ पांच मददगार के नाम इनाम-प्रशस्ति-पत्र के लिए सामने आ पाए, बढ़ते सड़क हादसों में हो रही मौत को कम करने के लिए जीवन रक्षक योजना (जेआरवाय) का गठन कर गंभीर घायल को समय पर अस्पताल पहुंचाकर उसका जीवन बचाने वाले को पांच हजार का इनाम व प्रशस्ति-पत्र देने की घोषणा हुई थी। हादसों में हो रही मौत पचास फीसदी करने के सुप्रीम कोर्ट की कमेटी ने निर्देश दिए तो राज्य सरकार ने गंभीर घायल व्यक्ति के मददगार (गुड सेमेरिटन) को पांच हजार का नकद पुरस्कार व प्रशंसा पत्र देने की शुरुआत की गई। इसमें मददगार को जल्द से जल्द सिर्फ नजदीकी अस्पताल तक पहुंचाना होता है, इसके बाद वो कोई बयान ना भी दे तो इसके लिए भी उसे छूट है। इन मददगारों को पुलिस की तमाम झंझटों से मुक्त रखा गया, फिर भी इसका कोई खास असर देखने को नहीं मिल रहा।

इनका कहना

सर्दी में कोहरे का कहर वाहन चालकों पर टूटता है। वाहन चालक अनावश्यक लापरवाही करते हैं, नियमों की गाइड लाइन का भी पालन नहीं करते। हादसों में कमी तब ही आएगी जब चालक जागरूक हों।

-रवींद्र बोथरा, सीओ ट्रेफिक नागौर