
जन्म लेते ही नसीब में भले ही पालना गृह आए पर अपनों से ठुकराए इन बच्चों को अपनाने वालों की भी कमी नहीं है। एक-दो साल शिशु-गृह में रहने के बाद किसी को देश में तो किसी को विदेश में घर मिल रहा है यानी गोद लेने वाले देश ही नहीं विदेशी भी कम नहीं हैं।
नागौर. जन्म लेते ही नसीब में भले ही पालना गृह आए पर अपनों से ठुकराए इन बच्चों को अपनाने वालों की भी कमी नहीं है। एक-दो साल शिशु-गृह में रहने के बाद किसी को देश में तो किसी को विदेश में घर मिल रहा है यानी गोद लेने वाले देश ही नहीं विदेशी भी कम नहीं हैं। एक अनुमान के मुताबिक पिछले दस साल में करीब सौ से अधिक लावारिस बच्चे विदेशी दंपती के गोद जा चुके हैं।
करीब दो साल पहले कुचामन के पालना गृह में मिला लावारिस बच्चा अब मॉरिशस में पाला-पोसा जाएगा। वहां के दम्पती को करीब चार साल के इंतजार के बाद यह खुशी मिली है। कानूनी प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। बच्चे की खुशनसीबी का पासपोर्ट/वीजा तैयार होते ही वो अपने नए घर के लिए उड़ान भरेगा। यह दूसरा बालक है जो विदेश जा रहा है। दिसम्बर-2021 में एक शिशु स्वीडन गया था।
सूत्रों के अनुसार मॉरिशस में उसे गोद लेने वाले दम्पती नर्सिंग अधिकारी लक्ष्मीनारायण और उनकी पत्नी रिद्धिमा ने इस बच्चे को गोद लिया है। बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) के जरिए नागौर जिले के शिशु गृह से गोद जाने वाला यह 19वां बच्चा है। बच्चे की उम्र करीब दो साल है। दंपती ने इंटरनेशनल एडोप्शन एजेंसी (आईएए) के जरिए बच्चा गोद लेने के लिए करीब चार साल पहले ऑनलाइन आवेदन किया था। आईएए में होने वाले रजिस्ट्रेशन में दूसरे देश का बच्चा गोद लिया जा सकता है। दंपती के कोई संतान नहीं है। केन्द्रीय दत्तक ग्रहण एजेंसी (कारा) के संयोजन से इस दंपती को नागौर के इस बच्चे को गोद दिया गया है। बच्चे की फोटो व अन्य दस्तावेज-जानकारी मिलने के बाद इस दंपती ने शिशु को लेने की जानकारी दी। बाद में दोनों नागौर पहुंचे, यहां जिला कलक्टर डॉ अमित यादव ने तमाम कानूनी प्रक्रिया को हरी झण्डी देकर इन्हें बच्चा सुपुर्द किया। अब बच्चे के पासपोर्ट/वीजा की प्रक्रिया चल रही है। उसके बाद दंपती उसे अपने साथ ले जाएंगे।
सौ के आसपास
जोधपुर जिले के सरकारी गृह से 3 और अन्य संस्था से 17 लावारिस बच्चों को विदेशी दम्पती गोद ले चुके हैं। अजमेर जिले से चार बच्चे विदेश में गोद जा चुके हैं। राज्यभर से विदेश में गोद गए बच्चों की संख्या सौ के आसपास है। भीलावाड़ा जिले के 48 बच्चों को भारत में ही गोद दिया गया। अन्य जिलों से भी बच्चे विदेश गए।
ऐसे होता है फॉलोअप
गोद दिए गए बच्चे का फॉलोअप आईएए करेगी, आवश्यकता पडऩे पर कारा उससे जानकारी लेती है। प्रारंभ के तीन साल में बराबर फॉलोअप लिया जाता है। पहले साल चार, दूसरे साल दो और तीसरे साल एक बार फ ॉलोअप लिया जाता है।
इनका कहना है
समस्त कागजी कार्रवाई पूरी कर मॉरिशस दम्पती को यह शिशु गोद दिया गया है। पासपोर्ट/वीजा बनने के बाद बच्चा इनके साथ रवाना होगा।
-सहायक निदेशक सुरेंद्र पूनिया, बाल अधिकारिता विभाग नागौर
Published on:
11 Jan 2024 08:59 pm
बड़ी खबरें
View Allनागौर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
