
Ganesh Chaturthi will be celebrated today in five types of auspicious yogas
-गणेश बावड़ी मंदिर में भरेगा मेला, तैयारियां शुरू, होंगे विविधि कार्यक्रम
-मिट्टी के गणपति की ही की जा सकती है स्थापना, प्लास्टर ऑफ पेरिस आदि से निर्मित प्रतिमाओं का पूजन है निषेध
नागौर. गणेश चतुर्थी मंगलवार को वैधृति योग के साथ ही स्वाति एवं विशाखा नक्षत्र के संयोग में मनाई जाएगी। बताते हैं कि इस योग में पूजन करने से न केवल तीन गुना फल ज्यादा प्राप्त होता है, बल्कि सभी प्रकार के विध्नों का भी नाश होता है। पंडित सुनील दाधीच ने बताया कि पंचांग के अनुसार गणेश चतुर्थी के दिन दो शुभ योग बन रहे हैं। जिसमें इस दिन वैधृति योग बन रहा है और दूसरा दोपहर 1 बजकर 48 मिनट तक स्वाति नक्षत्र रहेगा। इसके बाद विशाखा नक्षत्र शुरू होगा। यह नक्षत्र देर रात तक रहेगा। इन योगों को ज्योतिष में विशेष माना जाता है। साथ ही इन योगों में पूजा करने का दोगुना फल प्राप्त होता है। इसके साथ ही केतु नामक शुभ योग रवि योग भी इस दिन बन रहा है।
मिट्टी बनी प्रतिमा का पूजन ही सर्वश्रेष्ठ
ज्योतिषविदों के अनुसार शास्त्रों में मिट्टी से बनी प्रतिमा की पूजा को सर्वश्रेष्ठ बताया गया है। मिट्टी से बनी प्रतिमा में पंच तत्व रहते हैं। मिट्टी यानी पृथ्वी, जल, वायु, अग्नि और आकाश, इन पांचों तत्वों से प्रतिमा बनती है और इन्हीं पांचों तत्वों से हमारा शरीर भी बना है। इसलिए गणेश उत्सव में पंच तत्वों से बनी गणेश प्रतिमा स्थापित करनी चाहिए। ये प्रतिमाएं आसानी से पानी में घुल जाती है, मिट्टी से बनी गणेश प्रतिमा पर्यावरण के लिए भी श्रेष्ठ रहती है। गणेश प्रतिमा बनाने के लिए किसी नदी या तालाब या किसी अन्य साफ-सुथरी जगह की मिट्टी का उपयोग करना चाहिए। ध्यान रखें मिट्टी में कंकड़-पत्थर, पेड़-पौधे की जड़ें या घास नहीं होनी चाहिए।
वैदिक मंत्रोच्चार के साथ विराजित होंगे गणपति
नागौर. गणेश चतुर्थी पर गणपति प्रतिमा स्थापना के लिए चौघडिय़ा अनुसार मुहूर्त 9 बजकर 21 मिनट से 1 बजे बजे तक तथा लग्न अनुसार स्थापना के लिए मुहूर्त 11 बचकर 5 मिनट से 1 बजकर 10 मिनट तक रहेगा। गणपति स्थापना में भद्रा का दोष मान्य नहीं होता है
गणपति पूजा की तैयारी, सजे मंदिर
नागौर. गणेश चतुर्थी पर मंदिरों विविधि प्रकार के धार्मिक कार्यक्रम होंगे। गणपति को घरों एवं पंडालों में वैदिक मंत्रोच्चारों के साथ विराजित कराया जाएगा। इसके पश्चात अनंत चर्तुदशी पर विसर्जन होगा। गणेश चतुर्थी पर गणपति का विशेष अर्चन किया जाएगा। शहर के गणेश मंदिरों में गणेश बावड़ी एवं किले के अंदर स्थित करीब साढ़े चौदह सौ साल पुरानी मूर्ति का शृंगार करने के साथ ही अन्य तैयारियां चलती रही। किले में गणेश चतुर्थी पर मेला भी भरता है। पुराना मंदिर होने के कारण इसकी मान्यता भी बहुत है। बताते हैं कि इसका किले के अंदर शुभता को प्राप्त करने के लिए कराया गया था। गणेश बावड़ी मंदिर भी साफ-सफाई एवं रंगरोगन के साथ ही पूरे मंदिर को सजाने का काम सोमवार को चलता रहा। नया दरवाजा बाहर स्थित गणपति को भी गणेश चतुर्थी के लिए रंग-रोगन कर सुव्यवस्थित करने की तैयारियां चलती रही। इसी तरह शहर के मानासर एवं मूण्डवा चौराहों पर विभिन्न आकार-प्रकारों में गणपति की मूर्तियां सजी हुई हैं। मोर, मछली एवं चूहे की सवारी के साथ ही पगड़ी पहने गणेशजी की मूर्ति भी लेने में श्रद्धालुओं ने खासी दिलचस्पी दिखाई है।
पांच सौ बरस से ज्यादा पुराना मंदिर है गणेश बावड़ी
गणेश बावड़ी मंदिर पांच-छह सौ साल से ज्यादा पुराना बताया जाता है। इसके बारे में मान्यता है कि बगल में स्थित नाडी में यह खुद-ब-खुद प्रगट हुई थी। मंदिर के पुजारी धीरेन्द्र मिश्रा ने बताया कि गणपति के मंदिर में दर्शन के लिए आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से भी काफी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। हर साल गणेश चतुर्थी पर उत्सव की परंपरा भी मंदिर के स्थापनकाल से ही चल रही है। इस बार भी गणेश चतुर्थी पर भगवान श्री गणेश का महापूजन होगा। वैदिक मंत्रोंच्चार के साथ शृंगार भी किया जाएगा। इसमें वस्त्र, आहरण एवं प्रसाद अर्पण आदि का पूरा कार्य वैदिक मंत्रोच्चार से किया जाएगा। इस मौके पर मेला भी भरेगा। श्रद्धालुओं में 51 किलो मोदक के प्रसाद का वितरण किया जाएगा। मंदिर में पूरे दिन भजन एवं कीर्तन आदि के कार्यक्रम चलते रहेंगे।
गणेश चतुर्थी पर ऐसे करें पूजन
गणपति की स्थापना करने से पहले कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है। पूजन सामग्री लेकर पूर्व दिशा की ओर मुख कर शुद्ध आसन पर बैठ जाएं। अपने घर के उत्तर भाग या पूर्वोत्तर भाग में भी गणेश जी की प्रतिमा या मूर्ति रख सकते हैं और दक्षिण पूर्व में दीपक जलाएं। गणेश जी की मूर्ति को किसी लकड़ी के पटरे या गेहूं, मूंग, ज्वार के ऊपर लाल वस्त्र बिछाकर स्थापित करें। भगवान की प्रतिमा की पूर्व दिशा में कलश रखें गणपति की प्रतिमा के दाएं-बाएं रिद्धि-सिद्धि को भी स्थापित करें और साथ में एक-एक सुपारी रखें। अपने ऊपर जल छिडक़ते हुए पुण्डरीकाक्षाय नम: मंत्र का जाप करें। भगवान गणेश को प्रणाम करते हुए तीन बार आचमन करने के साथ माथे पर तिलक लगाएं। मूर्ति स्थापित करने के बाद गणेश जी को पंचामृत से स्नान कराएं। उन्हें वस्त्र, जनेऊ, चंदन, दूर्वा, अक्षत, धूप, दीप, शमी पत्ता, पीले पुष्प और फल से पूजन आरंभ करें। इसके पश्चात आरती करनी चाहिए।
इसका भी रखना होगा ध्यान
गणेश प्रतिमा लेने के दौरान ध्यान रखना चाहिए कि उनका एक हाथ वरदान की मुद्रा में हो, एक हाथ में दंत, एक हाथ में लडडू होना चाहिए। इसके साथ ही उनका वाहन मूषक राज भी अवश्य होना चाहिए। आजकल बाजार में अनेक प्रकार की मूर्तियां भी देखने को मिलती है मसलन गजानन भगवान को मोटरसाइकिल, शेर ,गाड़ी आदि अन्य वहां पर भी बैठा हुआ देखने को मिलता है ऐसी मूर्ति की स्थापना हमें नहीं करनी चाहिए। क्योंकि यह शास्त्र सम्मत नहीं है।
नागौर. गणेश बावड़ी मंदिर में भगवान का शृंगार करते हुए
नागौर. गणेश चतुर्थी की तैयारियां शुरू
Published on:
18 Sept 2023 10:32 pm
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