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ग्राम पंचायतों के पास नहीं पुराने पट्टों का रिकॉर्ड

देश को पंचायती राज व्यवस्था देने वाले राजस्थान की ग्राम पंचायतों में ही भूमि के पट्टों का रिकार्ड नहीं है। 2 अक्टूबर 1959 में नागौर में पंचायती राज की स्थापना करने के समय से ही विक्रय विलेख, पट्टा जारी किया जा रहा है लेकिन प्रशासनिक व्यवस्थाओं में अभाव के चलते वर्ष 2000 से पूर्व के विक्रय विलेखों का रिकॉर्ड ग्राम पंचायतों के पास नहीं है।

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वर्ष 2000 से पहले के पट्टों का अता-पता नहीं , दोहरे पट्टे जारी होने पर बढ़ सकती है परेशानी, 2017 में सरकारी आदेश देने के बावजूद नहीं हुआ सीमांकन, नगरीय निकायों में पटवारी कर रहे हैं पत्थरगढ़ी , ग्राम पंचायतों के साथ किया जा रहा सौतेला व्यवहारGram Panchayat News
धर्मेन्द्र गौड़ @ नागौर. देश को पंचायती राज व्यवस्था देने वाले राजस्थान की ग्राम पंचायतों में ही भूमि के पट्टों का रिकार्ड नहीं है। देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू द्वारा 2 अक्टूबर 1959 में नागौर में पंचायती राज की स्थापना करने के समय से ही विक्रय विलेख, पट्टा जारी किया जा रहा है लेकिन प्रशासनिक व्यवस्थाओं में अभाव के चलते वर्ष 2000 से पूर्व के विक्रय विलेखों का रिकॉर्ड ग्राम पंचायतों के पास उपलब्ध नहीं है। सुनने में भले ही अजीब लगता हो लेकिन यह बात सौ फीसदी सत्य है। राजस्थान के 33 जिलों की 295 पंचायत समितियों की 9892 ग्राम पंचायतों में से 80 फीसदी पंचायतों में पुराने पट्टों का रिकॉर्ड नहीं है। राजस्थान पंचायती राज नियम 1996 के नियम 157 के अन्तर्गत वर्ष 1996 तक आबादी भूमि पर निर्मित मकानों के नियमन एवं पट्टा जारी करने का प्रावधान है।

Gram Panchayat
सरकार के आदेश भी दरकिनार
राजस्थान पंचायती राज नियम 1996 के नियम 140 के अंतर्गत पट्टा जारी किए जाने सकने वाली भूमि की स्थिति स्पष्ट नहीं है। पंचायती राज विभाग ने 5 अप्रेल 2017 को जारी आदेश के बिन्दु संख्या 2 में सभी जिला कलक्टर को आदेश दिए थे कि ग्राम पंचायतों में पट्टे जारी की जा सकने वाली आबादी भूमि का सीमांकन/पत्थरगढ़ी करना सुनिश्चित करें। इसके बावजूद ग्राम पंचायतों में पत्थरगढ़ी व सीमांकन नहीं करवाया गया। ग्राम पंचायतों की आबादी, आबादी भूमि के साथ ही सिवाय चक भूमि, कृषि भूमि, चारागाह भूमि व गैर मुमकिन अंगोर रास्तों में भी बसी हुई है। इस भूमि का बिना राजस्व कर्मचारी या अधिकारी की रिपोर्ट के भूमि की किस्म का पता करना ग्राम पंचायत के लिए संभव नहीं है। Delimitation of Gram Panchayat


गांवों में पटवारी नहीं करते रिपोर्ट
शहरी क्षेत्र में प्रत्येक पत्रावली पर संबंधित हल्का पटवारी की ओर से भूमि की किस्म की रिपोर्ट इंद्राज की जाती है लेकिन ग्राम पंचायतों में गत 2017 में अभियान के दौरान मिली पत्रावलियां ही लम्बित है। पट्टों का डिजिटाइजेशन नहीं होने के कारण भूमि विक्रय लेख दुबारा जारी संभावना रहती है। गत अभियान के दौरान पत्रावलियों में भूमि संबंधी किस्म की रिपोर्ट नहीं होने पर ऑडिट में पेरा इंद्राज कर ग्राम विकास अधिकारियों को आरोपित किया गया तथा गैर आबादी भूमि में त्रुटिवश पट्टे जारी होने पर सरपंच व ग्राम विकास अधिकारियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई व न्यायालय तथा पुलिस में मामले तक दर्ज हुए हैं। ऐसे में नए पट्टे जारी करने से पंचायतें दूरी बना रही है। जिससे लोगों को पट्टे बनवाने में दिक्कत हो रही है। Nagaur latest news in Hindi

ऑनलाइन होने से मिलेगी राहत
ग्राम पंचायतों में पुराने पट्टों का रिकॉर्ड नहीं होने से नए पट्टे जारी करने में आ रही दिक्कत के संबंध में सरकार को अवगत करवाया था। सरकार से हमने चर्चा की है जिसमें सरकार ने पट्टों को ऑनलाइन करने की बात कही है। इसके बाद समस्या नहीं होगी और हमें राहत मिलेगी।
महावीर शर्मा, प्रदेशाध्यक्ष, राजस्थान ग्राम विकास अधिकारी संघ, जयपुरNagaur Hindi News