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चवला-मूंग के घर मूंगफली का बसेरा, बाजरे का तोड़ रही गुरुर

चौसला-लूणवां क्षेत्र में दूसरी बार लहलहाने लगी मूंगफली की फसल, हाइब्रिड बीजों के साथ उत्पादन बढ़ाने की तैयारी

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चवला-मूंग के घर मूंगफली का बसेरा, बाजरे का तोड़ रही गुरुर

चौसला. पर्याप्त बारिश होने से एक खेत में परवान पर मूंगफली की फसल।

चौसला (नागौर). क्षेत्र में अब कई किसान आय बढ़ाने वाली फसलें कर रहे हैं। मांग और ऊंचे दाम के चलते मूंगफली की ओर किसानों का रुझान और बढ़ गया।

कृषि विभाग के अनुसार क्षेत्र में इस बार मूंगफली की बुआई अधिक हुई। यहां बुआई का रकबा गत वर्ष से बढ़ गया। इन्द्रदेव की मेहरबानी से इस बार मूंगफली की अच्छी पैदावार की उम्मीद रहेगी। चौसला-लूणवां की बात करें तो यहां गत वर्ष पहली बार कुछ ही किसानों ने मूंगफली की पैदावार की। जिसमें लोहराणा के किसान रामानुज ने साढ़े चार लाख का मुनाफा कमाया। पहली बार अच्छी पैदावार होने से इस बार अधिकांश किसानों ने चवला-मूंग की जगह मूंगफली की बुआई की। मौसम अनुकूल और पर्याप्त बारिश होने से अब किसानों को पैदावार भी अच्छी मिलने की उम्मीद बंध गई।
उपयुक्त जलवायु
नावां सहायक कृषि अधिकारी सरला कुमावत ने बताया कि क्षेत्र में मूंगफली फसल के लिए उपयुक्त जलवायु है। यहां इस फसल का अच्छा उत्पादन लिया जा सकता है। गत वर्ष कई किसानों ने मूंगफली की अच्छी पैदावार ली। इसकी खेती के लिए सूर्य की अधिक रोशनी और उच्च तापमान की आवश्यकता होती है, जो नागौर के लिए अनुकूल है।
इस बार सिंचाई की नहीं जरूरत
पहले कई जगह कम बारिश होने से मूंगफली को सिंचाई की जरूरत पड़ती थी, लेकिन इस बार इन्द्रदेव की मेहरबानी से किसानों को मूंगफली फसल में सिंचाई की जरूरत नहीं रहेगी। बारिश अच्छी हुई। इसे सभी फसलों की बढ़वार काफी अच्छी रही।
खरपतवार नियंत्रण पर रखे ध्यान

सरला ने बताया कि इस बार मूंगफली की फसल अच्छी होने की उम्मीद रहेगी। ऐसे में किसानों को खरपतवार एवं कीटों का विशेष ध्यान रखना चाहिए। मूंगफली के लिए खरपतवार नियंत्रण करना बेहद जरूरी है। बुआई के 25- 30 दिन बाद एक निराई-गुड़ाई करने से मूंगफली का उत्पादन अच्छा होता है। वहीं रस चूसक कीटों पर नियंत्रण के लिए डायमिथोएट 30 ईसी का 4 मिली प्रति लीटर के मान से एक लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें।
तेल की महंगाई से मिलेगी राहत
मूंगफली एक तिलहनी फसल है। जब खेतों से मूंगफली का बंपर उत्पादन निकलेगा, तब खाद्य तेल की महंगाई से आम आदमी को राहत मिलेगी। बता दे कि किसानों को रबी फसलों के अच्छी दाम मिले थे, जिसके चलते उन्होंने खरीफ फसल में मूंगफली की रिकॉर्ड बुआई की है।
क्षेत्र में मूंगफली के लिए जलवायु अनुकूल है। इस वर्ष नावां, कुचामन, डीडवाना, लाडनूं, परबतसर, मकराना क्षेत्र में 13142 हैक्टेयर में मूंगफली की बुआई हुई है। इस बार सबसे ज्यादा नावां तहसील में चौसला के आस-पास एवं कुचामन क्षेत्र में मूंगफली का रकबा बढ़ा है।
सरला कुमावत, सहायक कृषि अधिकारी, नावां