
जांच के घेरे में डेयरी के आधा दर्जन कर्मचारी आए हैं। अनियमितता के मामले में नामजद ठेकेदारों के साथ इनके भी मिलीभगत के संकेत मिले हैं।
पत्रिका न्यूज नेटवर्क
नागौर. दूध परिवहन की अनियमितता को लेकर सात करोड़ की हेराफेरी दस करोड़ पार कर गई है। जांच के घेरे में डेयरी के आधा दर्जन कर्मचारी आए हैं। अनियमितता के मामले में नामजद ठेकेदारों के साथ इनके भी मिलीभगत के संकेत मिले हैं। पुलिस अब नए सिरे से इनसे पूछताछ शुरू करेगी। बीस अक्टूबर को हाईकोर्ट जोधपुर में आईओ अपनी रिपोर्ट पेश करेंगे।
सूत्रों के अनुसार नामजद ठेकेदारों की गिरफ्तारी पर हाईकोर्ट की रोक है। हाईकोर्ट ने पुलिस के सहयोग की शर्त पर उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगाई थी। बताया जाता है कि इक्का-दुक्का बार ये आईओ नागौर सीओ विनोद कुमार सीपा के समक्ष पेश हुए। यहां तक कि उनसे मांगे गए बिल समेत अन्य दस्तावेज भी ठीक ढंग से प्रस्तुत नहीं किए। पुलिस की जांच में तकरीबन ढाई साल पहले के तत्कालीन प्रबंध संचालक समेत आधा दर्जन कर्मचारियों को घेरे में लिया है। इन्होंने ठेकेदारों से मिलीभगत कर दूध के बदले रकम को खुर्द-बुर्द कर दिया। जहां ठेकेदार अपनी पूरी रकम जमा कराने की बात बार-बार दोहराते रहे, वहीं डेयरी कर्मचारी/प्रबंधन ठेकेदारों को ही टारगेट करता रहा। बताया जाता है कि इसमें अलग-अलग समय पर रहे तीन लेखाकर्मी भी शामिल हैं। पुलिस इनसे फिर पूछताछ कर सकती है।
सूत्र बताते हैं कि पिछले दिनों डेयरी के एक लेखाकर्मी को जानकारी के लिए तलब भी किया था, लेकिन वो पहुंचा ही नहीं। और तो और जो जांच अधिकारी ने जमा राशि और उठाए गए दूध के समस्त दस्तावेज मांगे थे, वो भी शक के घेरे में हैं। मामला दर्ज हुए 11 महीने से अधिक हो गए हैं, लेकिन जांच-दर जांच के चलते मामला उलझता ही जा रहा है।
विभाग से लेकर थाने फिर कोर्ट-कचहरी में नाना प्रकार की जांच से यह मामला पहले ही उलझा हुआ है। बजाय सुलझने के एक और जांच शुरू करवाई गई है। करीब सात-साढ़े सात करोड़ के गबन/उधारी के इस मामले में पांच ठेकेदार व एक अन्य संविदाकर्मी के खिलाफ मामला पिछले साल नवंबर में कोतवाली थाने में दर्ज हुआ था। कुछ समय पहले तत्कालीन एमडी प्रमोद चारण ने नागौर डेयरी के दो अफसर निलम्बित कर दिए पर कोई नतीजा नहीं निकला। एक अलग जांच सहकारी समितियां अजमेर की रीजनल ऑडिटर रेनू अग्रवाल कर रही हंै, जो भी अभी किसी नतीजे पर नहीं पहुंची।
पिछले सितम्बर माह से शुरू हुई घोटाले की कहानीपिछले साल सितंबर से यह कहानी शुरू हुई। पहले परिवाद, फिर मामला दर्ज करने के लिए डेयरी ने हाईकोर्ट जोधपुर की शरण ली। मामला दर्ज हुआ तो जांच तेज करने के लिए फिर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। जांच बदली, इससे पहले ठेकेदारों के चेक बाउंस होने के साथ एक मामला और दर्ज कराया। इधर, ठेकेदारों ने गिरफ्तारी पर रोक का आदेश अदालत से ले लिया। यही नहीं पहले आरसीडीएफ की दो बार हुई जांच के बाद तो मामला दर्ज कराना तय किया गया। मामला यहीं नहीं रुका, दो अफसर निलम्बन पर एमडी के खिलाफ हाईकोर्ट चले गए। पुलिस कह रही है कि गिरफ्तारी पर रोक है, इसलिए जांच धीमी चल रही है। इधर, सहकारी समितियां, अजमेर से एक जांच और बैठी तो थी, लेकिन यह भी आगे नहीं बढ़ पाई।
इन पर मामला दर्ज
गत 11 नवंबर को कोतवाली में दर्ज इस मामले में ठेकेदार रामचंद्र चौधरी, लीला ट्रेडर्स के मालाराम, विजय चौघरी, रामनिवास चौधरी और राजूराम पर यह बकाया है। कहा तो यह गया कि इन्हें बार-बार नोटिस दिए गए, लेकिन बकाया जमा नहीं कराया गया। इससे इतर इस पर भी सवाल उठे कि जब दुग्ध परिवहन की गाड़ी को एक-दो दिन से अधिक उधार देने का नियम ही नहीं तो यह क्यों इतना हो गया। एक संविदा कर्मी अनिल भी इनके साथ नामजद है।
जांच का नया घेरा
सूत्र बताते हैं कि दूध परिवहन को लेकर पुलिस को जांच में नई बातों का पता चला है। गेट पास से लेकर जमा रकम तक में हेराफेरी हुई। ठेकेदारों के साथ डेयरी के कुछ कर्मचारियों ने इसमें भूमिका निभाई। पुलिस हाईकोर्ट की रोक के चलते ठेकेदारों को न गिरफ्तार कर पा रही है न ही अपने ढंग से कर्मचारियों तक सख्ती शुरू की। अब बीस अक्टूबर के बाद ही इस मामले की रफ्तार तय होगी।
गौरतलब है कि दूध परिवहन में अनियमितता के मामले में राजस्थान उच्च न्यायालय जोधपुर ने जांच अधिकारी (आईओ) को बीस अक्टूबर को तलब किया है। हाईकोर्ट के न्यायाधीश पुष्पेंद्र सिंह ने सीओ को 20 अक्टूबर को केस डायरी के साथ तलब किया है।
इनका कहना
जांच पूरी है, हाईकोर्ट में रिपोर्ट पेश करेंगे। मामले में गड़बड़ी करने वाले जो-जो सामने आ रहे हैं, उनसे पूछताछ कर रहे हैं।
-विनोद कुमार सीपा, सीओ नागौर।
Published on:
13 Oct 2022 09:48 pm
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