
Heaps of dirt can spoil people's health
शहर की सफाई व्यवस्था पटरी से उतर चुकी है। कई जगहों पर कचरों के ढेर के साथ नालियों के किनारे के लग रहे गंदगी के पहाड़ों ने स्थिति विकट कर दी है। यह स्थिति केवल नालियों एवं नालों की ही नहीं, बल्कि रिहायसी क्षेत्र के कई मार्गों की है। शहर के गली-मोहल्लों में सडक़ों पर लगे कचरे व गंदगी के ढेर लोगों की सेहत बिगाड़ सकते हैं। कुछ समय से बेपटरी हो चुकी सफाई व्यवस्था की वजह से स्थिति विकट होने लगी है। स्थिति यह है कि शहर में नया दरवाजा के अंदर यहां से कांकरिया विद्यालय की ओर जाने वाले रास्ते पर कई जगह आपको बिखरा हुआ कचरा नजर आ जाएगा। इसी तरह से कलक्ट्रेट से रेन बसेरा के निकट से जड़ा तालाब की ओर जाने वाले मार्ग पर तो कई जगह बिखरे कचरे के पहाड़ के कारण यह अघोषित कचरा डिपो के तौर नजर आने लगा है। सफाई व्यवस्था की स्थिति अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि नगरपरिषद से महज सौ मीटर की दूरी पर रेलवे स्टेशन रोड पर कचरा के लगे अंबार पर आवारा पशु कभी भी गंदगी में भोजन की तलाश करते हुए देखे जा सकते हैं। इसके साथ ही किले की ढाल, बाठडियों का चौक, मच्छियों का चौक आदि रास्तों पर बिखरे कचरे भी खुद-ब-खुद सफाई व्यवस्था की कड़वी सच्चाई दिखाते हुए नजर आते हैं।
तालाब को भी नहीं बख्शा, बना दिया कचरा डिपो
प्रतापसागर तालाब के पास विभिन्न प्रकार की गंदगियों का ढेर पिछले काफी समय से लगा हुआ है। तालाब के बगल में पक्षियों को दाना डालने की जगह को नहीं बख्शा गया। यहां पर भी कचरा का ढेर लगने के कारण इस पूरे क्षेत्र में दुर्गन्ध का वातावरण बना रहता है। यह स्थिति तब है, जबकि नगरपरिषद ने यहां तालाब के पास एक पूरा पार्क बना रखा है। ऐसे में यहां पर सुबह व शाम आने वालों को बेहद मुश्किल स्थिति का सामना करना पड़ रहा है।
शहर में नहीं नजर आते हैं डस्टबीन
शहर के प्रमुख स्थलों में पुराना हॉस्पिटल से लेकर अंतिम छोर यानि की केन्द्रीय बस स्टैंड अथवा बाजारों में डस्टबीन नजर नहीं आते हैं। शहरवासियों का मानना है कि डस्टबीन होने की स्थिति में लोग कम से कम कचरा इसमें डाल देते। अब इसके नहीं होने से कचरा को सडक़ पर फेकने की प्रवृति बढऩे से स्थिति विकट होती नजर आने लगी है।
सफाई व्यवस्था के संसाधनों पर एक नजर
कुल सफाई कर्मियों की संख्या-387
ठेके पर लिए गए सफाई कर्मी-120
नगरपरिषद के सफाई कर्मी-267
कुल आटो टिप्पर-58
कुल ट्रेक्टर-3
गाडिय़ां कब आती हैं, पता ही नहीं चलता
शहर में कचरा संग्रहण के लिए नगरपरिषद की ओर से आने वाली गाडिय़ां रिहायशी क्षेत्रों में कब आती हैं, और चली जाती हैं। इसका लोगों को पता ही नहीं चलता है। कचरे के अंबार लगे रहने के बाद भी नगरपरिषद की कचरा संग्रहण की गाडिय़ां कागजी आंकड़ों में तेजी से दौड़ रही हैं। गंदगी की वजह से लोगों में अब असंतोष के स्वर मुखर होने लगे हैं।
इनका कहना है...
सफाई व्यवस्था को सुचारु रूप से व्यवस्थित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए गए हैं। शहर क्षेत्र को तीन सेक्टर में बांटकर पूरी व्यवस्थात्मक तरीके से सफाई कराई जा रही है। फिर भी कहीं, कोई अव्यवस्था है तो उसे व्यवस्थित कर लिया जाएगा।
अनिल कुमार मुख्य स्वच्छता निरीक्षक नगरपरिषद नागौर
Published on:
27 Oct 2022 10:17 pm

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