
Rajasthan News: केराप गांव के चार मासूमों की डूबने से एक साथ हुई मौत के बाद गांव में शोक की लहर छा गई। चारों में अच्छी दोस्ती थी, साथ खेलते-कूदते थे। गांव में इन मासूमों की एक साथ अर्थी और जनाजा निकला तो हर किसी की आंखें नम हो गई। जिसे भी सूचना मिली कांधा देने पहुंचा। परिवार वालों का रो-रोकर बुरा हाल था।
ग्रामीणों के अनुसार भूपेश लुहार पुत्र केशाराम अपने माता -पिता इकलौता पुत्र था। उसके तीन बड़ी बहने हैं। वह पढ़ाई में काफी होशियार था। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण पिता बाहर रह कर मजदूरी करते है। अपने इकलौते पुत्र के इस तरह छोड़कर चलने जाने से माता -पिता की आंखों से आंसू नहीं थम रहे थे, तो बहनों के लिए आने वाला रक्षांबधन का त्योहार सूना हो गया। शिवराज लुहार पुत्र गिरधारी पढाई में ठीक था। पिता मजदूरी कर अपने परिवार का पालन पोषण करते है।
विशाल जाट भी अपने माता पिता इकलौता पुत्र था, एक बड़ी बहन है। पिता खेती व मजदूरी अपने परिवार पालन करते है। मां-बाप को विश्वास नहीं हो रहा है कि विशाल उन्हें इस तरह छोड़ हमेशा के लिए चला जाएगा। साहिल पुत्र संजय मिराशी हमेशा दोस्तों के साथ खेलने जाता था। पिता जयपुर में गाने बजाने का काम करते हैं। विशाल और शिवराज एक ही सरकारी विद्यालय में पढते थे। विशाल कक्षा सात और शिवराज कक्षा आठ का छात्र था, जबकि भूपेश गांव के निजी स्कूल में पढता था।
पुलिस सूत्रों के अनुसार केराप निवासी विशाल (13) पुत्र बलदेवराम ढाका, शाहिल (15) पुत्र संजय मिराशी, भूपेश (15) पुत्र केशाराम लुहार, शिवराज (14) पुत्र गिरधारी लुहार खेलने के बाद नहाने के लिए गांव के तालाब पहुंच गए। वहां नहाते समय चारों तालाब की गहराई में चले गए। रात तक चारों बच्चे जब घर नहीं पहुंचे तो परिजनों ने उनकी तलाश शुरू की। चारों के तालाब की ओर जाने की जानकारी पर परिजन वहां पहुुंचे तो किनारे पर उनके कपड़े व चप्पल मिले। खुनखुना थाना पुलिस व एसडीआरएफ की टीम पहुंची सरपंच सुशील ने तरनाऊ से तैराक बलदेवराम सांगवा को बुलाया। एसडीआरएफ टीम ने दस बजे दो बालकों के शव मिले, देर रात एक बजे दो और शव बाहर निकाले गए। इस दौरान डीडवाना अतिरिक्त जिला कलक्टर जेपी गौड, एएसपी हिमांशु शर्मा, उप अधीक्षक धरम पूनिया व तहसीलदार मौके पर मौजूद रहे। शवों को डीडवाना के राजकीय बांगड जिला चिकित्सालय लेकर आए, जहां सोमवार को पोस्टमार्टम कराकर परिजनों के सुपुर्द किया।
सरपंच सुशील ने बताया कि एक चरवाहे ने चारों को तालाब की ओर जाने रोका था, लेकिन वे अनसुना कर वहां पहुंच गए। चरवाहे ने तालाब में पानी अधिक होने की बात मासूमों को कही थी।
हादसे के बाद गांव में शोक की लहर दौड़ गई। ग्रामीण कैलाश दायमा ने बताया कि भूपेश और विशाल माता- पिता के इकलौते पुत्र थे। भूपेश के तीन और विशाल के दो बड़ी बहने हैं। भूपेश व शिवराज चचेरे भाई है।
मानसून अब सभी जगहों पर पूरी तरह सक्रिय हो गया। ताल-तलैयों में पानी जमा होना शुरू हो गया। कुछ तालाब और तलैयों की गहराई में पानी जमा हो गया। ऐसे में अब सतर्कता बरतने की महती आवश्यकता है। यदि तैरना नहीं आता हो तो बच्चों को इन तलाशयों में अकेले नहाने नहीं जाने दें। बच्चों को तालाब की गहराई का ज्ञान नहीं होता है। न ही उन्हें तेज बहाव की जानकारी होती है। जलाशयों में कूदकर नहाने से बच्चों को रोकें। जिससे मानसून के दौरान किसी भी अनहोनी को होने से रोका जा सके।
Updated on:
30 Jul 2024 03:09 pm
Published on:
30 Jul 2024 02:16 pm
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