22 जनवरी 2026,

गुरुवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

यहां तो योजना पर अधिकारी ही पड़ गए भारी

ेकुचामन की मृदा परीक्षण प्रयोगशाला तकरीबन दो साल से बंद पड़ी हुई है। इस प्रयोगशाला का संचालन नहीं होने से मिट्टी जांच की पूरी प्रक्रिया को ही अस्तव्यस्त कर दिया। नमूने तो विभाग की ओर से लक्ष्य के अनुसार ले लिए गए, लेकिन उनकी जांच ही नहीं हो पा रही। इसका सीधा असर फसल उत्पादन पर भी अब पडऩे लगा है।

less than 1 minute read
Google source verification

ेकृषि विभाग की ओर से इस वर्ष का लक्ष्य ८४२७४ निर्धारित किया गया था। इसमें से ३५०७४ नमूने जांच के लिए लैब भेजे गए। ४६२११ नमूनों को अभी जांच के लिए ही नहीं भेजा गया, क्योंकि पहले से भेजे गए जांच की रिपोर्ट ही अब तक नहीं मिली है। २९८८ नमूनों को अभी विभिन्न क्षेत्रों से जांच के लिए लिया जाना है। धीमी गति से होती जांच की स्थिति का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वर्ष ०१५ से अब तक विभाग को कुल ४६४९ की ही जांच रिपोर्ट अधिकारिक तौर पर मिल पाई है। अब ऐसे में शेष नमूनों की जांच रिपोर्ट भी इसी साल मिल पाएगी, इस पर कुछ भी कहने से कृषि विभाग के आलाधिकारी कतराने लगे हैं।