
कैसे मिले दिव्यांगों को रोजगार का सम्बल
रविन्द्र मिश्रा
नागौर. केन्द्र व राज्यसरकार दिव्यांगजनों को सम्बल देन के लिए कई योजनाएं संचालित कर रही है, लेकिन पूरी जानकारी का अभाव व लापरवाही बरतने के कारण दिव्यांगजन सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ लेने से वंचित रह जाते हैं। यही हाल राज्य सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग की ओर से संचालित विशेष योग्यजन स्वरोजगार योजना का है। विभाग की इस योजना में रोजगार ऋण के लिए आवेदन करने वाले दिव्यांगजनों में से कुछ को ही ऋण स्वीकृत हो पाता है। इसके पीछे एक कारण बैंकों की ऋण अदायगी को लेकर संतुष्टि भी एक कारण माना जा रहा है। ऋण स्वीकृत होने के बाद विभाग की ओर से दो किश्तों में 50 हजार रुपए का दिव्यांगजन को अनुदान दिया जाता है, ताकि वह छोटा-मोटा रोजगार कर अपना जीवन यापन कर सके।
क्या है योजना
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग विशेष योग्यजन स्वरोजगार योजना के तहत दिव्यांगों को रोजगार के लिए 50 हजार रुपए का ऋण अनुदान देता है। आवेदक कितनी भी राशि का ऋण ले उसे विभाग 25-25 हजार की राशि दो किश्तों में अनुदान के रूप में देता है। इसके लिए राष्ट्रीयकृत बैंक में ऋण के लिए आवेदन करना होता है। अनुदान राशि ऋण स्वीकृति पर ही मिलती है। आवेदक को फाइल के साथ बिल कोटेशन, दुकान का किरायानामा, शपथ पत्र, मूल निवास व जाति प्रमाण पत्र लगाना होता है।
ब्लॉक स्तर पर लगती है फाइल
दिव्यांगजनों को ऋण के लिए ब्लॉक स्तर पर फाइल लगानी होती है। ब्लॉक सामाजिक सुरक्षा अधिकारी अनुशंसा कर फाइल स्वीकृति के लिए बैंक भेजते हैं। फाइल को देखकर व ऋण अदायगी से संतुष्ट होने पर बैंक आवेदन स्वीकृत करता है। इसके लिए नागौर जिले के आठ ब्लॉक नागौर, जायल, मूण्डवा, खींवसर, डेगाना, मेड़ता,रिया व भैरूंदा में ब्लॉक सुरक्षा अधिकारी लगे हुए।
आवेदन की तुलना में कम स्वीकृत
जानकारी के अनुसार नागौर ब्लॉक में पिछले पांच साल में 138 दिव्यांगों ने ऋण के लिए आवेदन लगाए, इनमें से सिर्फ 70 के ही आवेदन स्वीकृत हुए। जबकि डेगाना ब्लॉक में 2020 में ऑनलाइन प्रक्रिया होने के बाद 12 आवेदन लगाए गए, लेकिन 10 ऑब्जेक्शन में होने के कारण मात्र 2 ही आवेदन स्वीकृत हो सके। जबकि इसके पहले ऑफलाइन लगाए गए सभी 6 आवेदकों को ऋण स्वीकृत हो चुका है। जानकारों के अनुसार प्रत्येक ब्लाॅक से औसतन हर साल 15-20 आवेदन भेजे जाते हैं, लेकिन बैंक 8-10 ही स्वीकृत करती है। इसके पीछे एक कारण अनुजा निगम से ऋण लेना भी है। आवेदक दो जगह से आवेदन नहीं कर सकता है।
इनका कहना...
विभाग की ओर से दिव्यांगों की रोजगार ऋण की फाइल बैंक को भेजी जाती है। बैंक पूरी तरह संतुष्ट होने पर ही ऋण स्वीकृत करता है। इस कारण ऋण स्वीकृति का आंकड़ा कम रहता है। कई बार कलक्टर ने भी लीड़ बैंक अधिकारी को इनकी संख्या बढ़ाने के लिए कहा है। ऋण स्वीकृति के बाद विभाग 50 हजार का अनुदान देता है।
मांगीलाल हटीला, ब्लॉक सामाजिक सुरक्षा अधिकारी, नागौर
सरकारी योजना है। इसमें आवेदकों के लापरवाही बरतने के ऋण की राशि वापस आने की थोड़ी कम संभावना रहती है। इस कारण बैंक पूरी तरह संतुष्ट होने व गारंटर आदि को देखकर ही ऋण स्वीकृत करते हैं। लक्ष्य की कोई बात नहीं है, जो आवेदन करता है उसे मना नहीं कर सकते हैं। कई बार प्रोजेक्ट रिपोर्ट भी आधी अधूरी होने से बैंक प्रबंधन ऋण स्वीकृत नहीं करता है। क्लियर फाइल पर कभी समस्या नहीं आती है।
जीवन ज्योति, लीड़ बैंक अधिकारी, नागौर
Published on:
11 Jan 2024 04:45 pm
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