
जिले भर में संचालित होने वाली आंगनबाड़ी केन्द्र अब शाला दर्पण पोर्टल से जोड़े जा रहे हैं। जिसके चलते आंगनबाड़ी केन्द्रों की ऑनलाइन मॉनिटरिंग की जा सकेगी। विभागीय अधिकारियों द्वारा यह भी दावा किया जा रहा है कि शाला दर्पण से जुडऩे के बाद आंगनबाड़ी केन्द्रों गतिविधियों में सक्रियता आएगी और दशा भी सुधरेगी। इसके अलावा आंगनबाड़ी केन्द्रों पर बच्चों को प्री एजुकेशन का फायदा मिलेगा।
जानकारी अनुसार शिक्षा विभाग ने शाला दर्पण पोर्टल पर राजकीय माध्यमिक व उच्च माध्यमिक विद्यालयों में संचालित आंगनबाड़ी के समन्वयन के लिए नया मॉड्यूल शुरू किया है। इसमें आंगनबाड़ी केन्द्रों को स्कूलों के साथ जोड़े जाने से केन्द्रों का डाटा भी शाला दर्पण पोर्टल पर ही मिल सकेगा।
पोर्टल पर क्षेत्र के केन्द्र फीड किए जाएंगे, जिसमें संस्था प्रधान बालक-बालिकाओं की संख्या, रजिस्टर में उपस्थिति रिकॉर्ड, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की उपस्थिति आदि सूचनाएं शाला दर्पण पोर्टल ऑनलाइन अपडेट करनी होगी।
ऐसे होगी मॉनिटरिंग
आंगनबाड़ी केन्द्रों का समय भले ही आइसीडीएस के अनुसार होगा, लेकिन आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की उपस्थिति जांचने की जिम्मेदारी संस्था प्रधान की रहेगी। प्राथमिक कक्षाओं के शिक्षक प्रमुख तौर पर आंगनबाड़ी केन्द्र की मैटर्न के रूप में कार्य करेंगे। संस्था प्रधान किसी शिक्षिका को मैटर्न के रूप में नियुक्त करेंगे।
कार्यकर्ता को अवकाश की सूचना इसी मैटर्न को देनी होगी। वैकल्पिक व्यवस्था होने तक स्कूल में पढऩे वाली बालिकाओं के सहयोग से आंगनबाड़ी केन्द्र के बच्चों की खेल गतिविधियों का संचालन किया जाएगा। केन्द्र पर बनने वाले पोषाहार की गुणवत्ता की देख-रेख संस्था प्रधान की होगी। जानकारी अनुसार जिन विद्यालय परिसरों में आंगनबाड़ी केन्द्र पहले से संचालित हैं वे तो वहीं रहेंगे।
इसके अलावा विद्यालय परिसर की 500 मीटर की दूरी तक के केन्द्रों को स्कूल परिसर में स्थापित किया जाएगा। रमसा की एडीपीसी वीणा सोलंकी ने बताया कि इससे गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा से प्राथमिक शिक्षा का ढांचा सुधरेगा और केन्द्रों की गुणवत्ता में भी सुधार आएगा।
यह है स्थिति
राजस्थान काउंसिल ऑफ सेकण्डरी एजुकेशन से मिली जानकारी के अनुसार जिले में कक्षा 1 से 10 व1 से 12वीं कक्षा तक के 660 विद्यालय संचालित हैं। इनमें 162 विद्यालय ऐसे बताए जा रहे हैं, जिनके वर्तमान समय में विद्यालय परिसर में केन्द्र संचालित किए जा रहे हैं। जबकि 84 विद्यालय ऐसे हैं, जिनमें पूर्व में आंगनबाड़ी केन्द्र संचालित नहीं थे, लेकिन विद्यालय में स्थानांतरित किए जाने हैं। इतना ही नहीं जिले में 211 विद्यालय ऐसे भी हैं जिनके पास आंगनबाड़ी केन्द्र संचालित करने के लिए कमरा तक नहीं है। इसी प्रकार 110 विद्यालय ऐसे हैं, जो विद्यालय से अधिक दूरी पर होने के कारण मर्ज करना सम्भव नहीं है।
दिशा-निर्देश दिए...
आंगनबाड़ी केन्द्रों की सूचना शाला दर्पण पोर्टल पर फीडिंग करने के लिए संस्था प्रधानों को दिशा-निर्देश दिए हैं। अधिकतर ने यह जानकारी पोर्टल पर अपडेट कर दी है। शेष रहने वालों को शीघ्र ही सूचना पोर्टल पर फीड करने के निर्देश दिए हैं।
वीणा सोलंकी, एडीपीसी, रमसा नागौर
Published on:
11 Feb 2017 10:27 am
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