24 जनवरी 2026,

शनिवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

नागौर जिले में साढ़े 13 हजार लोगों ने बनवाए जॉबकार्ड, तीन माह से रोजगार का इंतजार

- मुख्यमंत्री शहरी रोजगार गारंटी योजना - कोरोना व महंगाई के बाद बेरोजगारी से जनता परेशान - डीएलबी के कोई दिशा- निर्देश नहीं मिले

2 min read
Google source verification
नागौर जिले में साढ़े 13 हजार लोगों ने बनवाए जॉबकार्ड, तीन माह से रोजगार का इंतजार

शहरी रोजगार गारंटी योजना जॉब कार्ड

पत्रिका एक्सपोज

नावां शहर .नागौर. गांवों में लोकप्रिय मनरेगा की तर्ज पर शहरों में भी जरूरमंद लोगों के लिए गहलोत सरकार ने शहरी रोजगार गारंटी योजना लागू की है। इसके तहत लोग जॉब कार्ड भी बनवा रहे हैं। नागौर जिले में जॉब कार्ड तो हजारों की तादात में बन रहे हैं, लेकिन काम कब दिया जाएगा इस संबंध में डीएलबी की ओर से कोई दिशा-निर्देश अब तक नहीं मिले हैं।
जॉबकार्ड बनने के बाद नगरपालिका व नगरपरिषद में काम के लिए आवेदन करना होता है। उसके बाद जॉब मिलती हैं। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बजट में इंदिरा गांधी शहरी रोजगार गारंटी स्किम लागू करने की घोषणा की थी। इसे लेकर सभी निकायों में इसके लिए जॉब कार्ड बनाए जा रहे हैं। सरकार ने 15 मई तक सभी तैयारी पूरी करने के निर्देश दिए थे पर बजट के अड़चन के चलते गति सुस्त पड़ गई है। नागौर जिले में अब तक 13 हजार 655 जॉबकार्ड बन चुके हैं। है। रोजगार कब मिलेगा यह सरकार की मंशा पर निर्भर है।
मेड़ता में सबसे ज्यादा तो जायल में सबसे कम जॉबकार्ड
शहरी मनरेगा योजना के तहत पालिका व परिषद क्षेत्रों में जॉबकार्ड बनाएं जा रहे है। जिले में सबसे अधिक मेड़ता में 1993 व सबसे कम जायल में 26 जॉबकार्ड बने हैं। लेकिन जगार देने को लेकर कोई निर्देश नहीं है।
नागौर जिले में जॉबकार्ड की स्थिति एक नजर
नगरपालिका/नगरपरिषद जॉबकार्ड
नागौर- 1634
लाडनूं -500
कुचामन - 1965
डेगाना -1208
डीडवाना- 874
मकराना - 1053
मेड़ता- 1993
नावां - 1081
परबतसर - 938
डीडवाना- 1325
कुचेरा- 1059
जायल - 26
इसलिए लोग काम में कम रुचि दिखा रहे

शहरी लोग मजदूरी की बजाए संविदा पर दफ्तर में कुर्सी पर बैठनेवाला काम, ठेला-रेहड़ी लगाने जैसे काम चाहते हैं। वे श्मशान-कब्रिस्तान में, नाले-नालियों, कुंड-बावडिय़ों की सफाई, डोर टू डोर कचरा कलेक्शन, ठोस कचरा प्रबंधन जैसा काम नहीं करना चाहते हैं।

शहरों में नरेगा के तहत ये काम होंगे

पर्यावरण-जल संरक्षण, स्वच्छता-सेनिटेशन, हेरिटेज संरक्षण, प्लांटेशन, बगीचों की देखभाल, फुटपाथ, डिवाइडर, पौधों में पानी-देखभाल, निकायों, वन, उद्यानिकी, कृषि विभाग की नर्सरी में पौधे तैयार करना, श्मशान-कब्रिस्तान में सफाई, पौधरोपण, उद्यानिकी, वानिकी के काम, तालाब, टांके-बावड़ी, जोहड़ की सफाई व मेंटिनेंस, रेन वाटर हार्वेस्टिंग स्ट्रक्चर बनाने, मरम्मत व सफाई, जलस्रोतों का जीर्णोद्धार, ठोस कचरा प्रबंधन, डोर टू डोर कचरा कलेक्शन, जैसे काम कराए जाएंगे। हाजिरी और कार्य माप पर ऑनलाइन मजदूरी मिलेगी व स्कीम में लेबर-मैटेरियल का अनुपात 75:25 रहेगा। स्कीम में कुशल, अर्द्धकुशल, अकुशल श्रमिकों को श्रम विभाग की तय मजदूरी मिलेगी।

इनका कहना

यह योजना अभी लांच नहीं हुई है। लांच होने के बाद ही स्थिति क्लियर हो पाएगी।
पीयूष सामरिया, जिला कलक्टर, नागौर।