
Shravak listening to the discourse at Jaimal Jain Poushdashala.
नागौर. जयमल जैन पौषधशाला में साध्वी बिंदुप्रभा ने शुक्रवार को प्रवचन में कहा कि दूसरों के दुख में दुखी होना ही सच्ची दया है। जबकि दूसरों के दुख में सुखी होना क्रूरता का लक्षण है। मानव होकर भी ह्रदय में करुणा का अभाव होने पर वह पत्थर की तरह होता है। कोमल मिट्टी में ही फसल उगती है। उसी प्रकार कोमल ह्रदय में ही सदगुण विकसित होते हैं। दया धर्म का मूल है। दया रूपी नदी के किनारे ही धर्म की फुलवारी लगती है। दयालु व्यक्ति दूसरे की आंखों में आंसू देख स्वयं के आंसू रोक नहीं पाता है। दूसरे की पीड़ा को दूर करने के लिए जो अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाला ही वास्तव में श्रेष्ठ इंसान बनते हुए दया के गुण को अपना सकता है। करुणा मानवता का लक्षण होता है। दया के फलस्वरूप सद्गति, सौभाग्य, सद्बुद्धि की प्राप्ति होती है। जघन्य श्रेणी का व्यक्ति केवल स्वयं का ही चिंतन करता है। जबकि उत्कृष्ट श्रेणी का व्यक्ति स्व और पर दोनों का चिंतन करता है। अनुकंपा सम्यक्त्व का लक्षण होता है। कोई भी धर्म हिंसा को बढ़ावा नहीं देता। संचालन पूनमचंद बैद ने किया। प्रवचन और जय-जाप की प्रभावना तथा प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता के विजेताओं को पुरस्कृत करने के लाभार्थी कंवरीलाल, राजकुमार ललवानी थे। प्रवचन में पूछे गए प्रश्नों के उत्तर हेमराज खींवसरा, सुनील ललवानी, राजकुमारी सुराणा एवं संगीता ललवानी ने दिए। आगंतुकों के भोजन का लाभ प्रकाशचंद, प्रदीप बोहरा ने लिया। मुदित पींचा ने बताया कि दोपहर में महाचमत्कारिक जय-जाप का अनुष्ठान किया गया। इस मौके पर अमीचंद सुराणा, प्रेमचंद चौरडिय़ा, जितेंद्र चौरडिय़ा, सोहनलाल नाहर आदि उपस्थित थे।
Published on:
20 Aug 2021 11:31 pm
बड़ी खबरें
View Allनागौर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
