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गो चिकित्सालय ने खड़े किए हाथ, नगर परिषद को देंगे कांजी हाउस की चाबी

नागौर नगर परिषद की ओर से भुगतान नहीं करने से अटके 50 लाख, कांजी हाउस में लावारिस जानवरों के लिए बचा दो दिन का ही चारा

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नागौर शहर में लावारिस सांड ने ली एक व्यक्ति की जान

Elderly man died as unclaimed Bull attack on him in nagaur

नागौर. नगर परिषद की ओर से कांजी हाउस में लावारिस जानवरों के लिए चारे-पानी की व्यवस्था के लिए राशि का भुगतान नहीं किए जाने के चलते दो दिन बाद कांजी हाउस की चाबी नगर परिषद को सौंप दी जाएगी। इससे कांजी हाउस में रखे गए लावारिस जानवरों के लिए चारे-पानी का संकट खड़ा हो सकता है। गौरतलब है कि नगर परिषद द्वारा संचालित कांजी हाऊस में लावारिस जानवरों के लिए चारे-पानी की व्यवस्था गो चिकित्सालय द्वारा की जा रही है। भुगतान को लेकर बुधवार को आयोजित बैठक में दो दिन बाद कांजी हाउस का संचालन नहीं किए जाने का निर्णय लिया गया।

कई महीनों से बकाया है भुगतान कांजी हाऊस के व्यवस्थापक बुधाराम मेघवाल ने बताया कि कांजी हाऊस की व्यवस्था लगभग 4 साल से गो चिकित्सालय द्वारा की जा रही है। नगर परिषद द्वारा दी जाने वाली राशि में कुछ राशि संस्था द्वारा मिलाकर लावारिस जानवरों की सेवा की जा रही है। पिछले कई महीनों से नगर परिषद ने गो चिकित्सालय को चारे-पानी के लिए राशि का भुगतान नहीं किया है। करीब 50 लाख से अधिक का भुगतान अभी बकाया है। जानवरों के लिए केवल दो दिनों का ही चारा बचा है। नगर परिषद के पदाधिकारियों को भुगतान के लिए बार-बार कहने के बाद भी अभी तक भुगतान नहीं हुआ। ऐसे में कांजी हाऊस में सांडों के लिए उचित व्यवस्था संभव नहीं है।

शहर में घूम रहा लावारिस गो वंशमेघवाल ने बताया कि जयपुर स्थित हिंगोनिया गौशाला में सरकार 70 रुपए प्रति गोवंश प्रति दिन भुगतान कर रही है जबकि नगर परिषद नागौर संस्था को केवल 45 रुपए प्रति गोवंश देती है। यहां गो वंश की अच्छी सेवा होने के बावजूद भी कम अनुदान मिल रहा है। समय पर भुगतान भी नहीं किया जा रहा है। इस कारण अब संस्था 2 दिन बाद कांजी हाऊस की चाबी नगर परिषद नागौर को सौंप देगी। गौरतलब है कि शहर में लावारिस पशु लोगों के लिए परेशानी का सबब बने हुए हैं। कांजी हाउस में करीब 700 गो वंश है जबकि इनसे कहीं अधिक संख्या में लावारिस गो वंश शहर में घूम रहा है। जिनकी वजह से आए दिन लोग चोटिल होते रहते हैं।

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