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video—….जानिये क्यों प्रसिद्ध है ईनाणा की ऐतिहासिक होली

- फूहड़पन से अछूती यहां की होली में सामाजिक समरसता- ईनाणा की ऐतिहासिक होली देखने उमड़ा हुजूम

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....जानिये क्यों प्रसिद्ध है ईनाणा की ऐतिहासिक होली

मूण्डवा के निकट ईनाणा गांव में होली दहन का दृश्य व उमड़ी भीड़।

नागौर जिले के ईनाणा गांव की ऐतिहासिक होली देखने के लिए रविवार को बड़ी संख्या में आसपास के गांवों से लोग पहुंचे। फूहड़पन से अछूती यहां की होली में सामाजिक समरसता, परम्परा, एकता एवं भाईचारे की मिसाल है। इस अवसर पर बगड़ावत गायन, तेजागायन तथा मुगदर उठाने जैसी परम्पराएं को आज भी कायम हैं।

रात्रि में सवा ग्यारह बजे होलिका दहन किया गया। इसमें आसपास के गांवों के से लोग पहुंचे। होलिका दहन के दौरान जलती होली को बुझाने के लिए युवकों ने आग की परवाह नहीं की। करीब छह फीट गहरी जमीन में गाडी गई होली को करीब आधे घंटे की मशक्कत के बाद गिराया जा सका।
अच्छी बारिश का संकेत

होली दहन के समय लोग आग की लपटों पर टकटकी लगाए देखते रहे। इस बार होलिका दहन के समय आग की लपटें उत्तर-पश्चिम की तरफ गई जो अच्छी बारिश की ओर संकेत हैं। मान्यता है कि होली दहन के समय आग की लपटें जिस दिशा में जाती है उस दिशा में अच्छी वर्षा होती है। यदि ये लपटें सीधे दक्षिण में चली जाती है तो अकाल माना जाता है।
ली ढूंढ व किया रामा-श्यामा

होली गिरने के बाद युवकों की टोलियों ने पिछली होली के बाद जन्मे बालकों की ढूंढ ली। दूसरे दिन रामा-श्यामा के बाद रात्रि में डांडिया नृत्य हुआ। जिसमें युवा एवं बुजुर्गो ने विभिन्न वेश धारण कर नगाड़े की थाप के साथ जुगलबंदी की। इस दौरान हंसोड़ों ने स्वांग रचकर खूब गुदगुदाया।
ईनाणा व मूण्डवा में निभाई जाती है परम्पराएं

ईनाणा व मूण्डवा में धार्मिक उत्सवों पर लोक कला , लोकगीतों एवं अन्य खेलों के माध्यम से आज भी युवाओं परम्पराओं से जुड़े हुए हैं। मूण्डवा में लाखोलाव तालाब की पाळ के पास युवा ठीया दड़ी खेलते हैं, वहीं निकटवर्ती गांव ईनाणा में मुगदर उठाने, बगड़ावत गायन, डांडीया, परम्परागत होली तथा शक्ति परीक्षण के खेल आकर्षण के केन्द्र रहते हैं। इसी प्रकार मुगदर उठाने की परम्परा को सुरेश ईनाणियां व महेन्द्र ईनाणियां जैसे कुछ युवा आज भी जिंदा रखे हुए हैं।