
तरनाऊ. सुनसान पड़ी कोयला खदान।तरनाऊ. मांइस बंद होने के कारण धूल फांक रहे सैकड़ों वाहन।
तरनाऊ (नागौर). जिले की प्रसिद्ध मातासुख- कसनाऊ लिग्नाइट परियोजना पिछले साठ दिन से किसानों द्वारा जमीन मुआवजे की मांग के कारण पूर्णतः बंद पड़ी है। ना तो खनन करने वाली आरएसएमएमएल ने किसानों की मांगों पर गौर किया और ना ही सरकार ने कभी सुध ली है।
जमीन के मुआवजे की मांगगौरतलब है कि मातासुख गांव में राजस्थान स्टेट मिनरल एंड मांइस द्वारा वर्ष 1997 में साढे़ तीन सौ के करीब किसानों से साढे़ सात हजार बीघा जमीन को मात्र साढ़े सात हजार रुपए प्रति बीघा की दर से अव्याप्त कर ली तथा वर्ष 2002 में इस जमीन पर आरएसएमएमएल ने नीजि कम्पनियों के माध्यम से लिग्नाइट कोयला खदान की खुदाई शुरू कर दी। इस दौरान किसानों ने मामले को कोर्ट में दर्ज करवा कर अपनी जमीन के मुआवजे की मांग की। जमीन मुआवजे को लेकर किसान पिछले बीस साल से नागौर कोर्ट से लेकर दिल्ली सुप्रीम कोर्ट तक जा चुके है तथा किसानों के हित में फैसला मिलने के बाद भी किसानों को आरएसएमएमएल विभाग द्वारा मुआवजा नहीं दिया गया। जिसे लेकर 28 मार्च को किसानों ने प्रशासन व जनप्रतिनिधियों को ज्ञापन देकर अवगत करवाया तथा मुआवजा दिलवाने की मांग की।
नहींं हो रही सुनवाईज्ञापन में किसानों ने बताया कि अगर आरएसएमएमएल मुआवजा नहीं देती है तो धरना देकर विरोध जताएंगें तथा अनिश्चतकालीन धरना जारी रखेंगे। कहीं पर भी किसानों की सुनवाई नहीं होने के बाद तीन मार्च को किसानों ने मातासुख लिग्नाइट मांइस क्षेत्र स्थित अपने खेतों में धरना दे दिया, वही आरएसएमएमएल को 11 मार्च तक मांगे मान लेने को लेकर ज्ञापन सौंपा गया तथा मांगे नहीं मानने पर 11 मार्च से मांइस का पूरा काम बंद करवाया गया। दो महीने से खेतों में साठ डिग्री सेल्सियस तापमान में भी सैकड़ों किसान धरने पर बैठे है, वही आरएसएमएमएल के आला अफसर किसानों की सुनने की बजाय अपने कार्यालयों में एसी की हवा खा रहे है,पर सुनवाई करने वाला कोई नही है। पिछले दो महीने में सरकार को करोड़ों का नुकसान झेलना पड़ रहा है पर किसानों की मांगों पर कोई सहमति नहीं बन पाई है।
सुनसान मांइस,तेज धूप में जल रहे किसान-तेज गर्मी में आज कोई भी अपने घर से बाहर निकलने से कतरा रहा है, लेकिन अपनी जमीन के मुआवजे की मांग को लेकर मातासुख लिग्नाइट मांइस क्षेत्र में मातासुख,कसनाऊ,इग्यार गांव के सैकड़ों किसान तेज गर्मी,लू में धरने पर बैठे हैं। पचास डिग्री तापमान में आए दिन किसानों की तबीयत बिगड़ रही है पर एसी की हवा खाने वाले अधिकारियों के कानों पर जूं तक रेगती नजर नहीं आ रही है। उधर, लिग्नाइट मांइस का पूरा काम बंद होने से कोयला खदान क्षेत्र सुनसान पड़ा है,वही अब मांइस शुरू होने की उम्मीद छोड़ चुके नीजि कम्पनियों के मजदूर भी कई ओर जा चुके हैं। हालांकि मांइस क्षैत्र में सैकड़ों वाहन खड़े-खड़े धूल हांक रहे है पर किसानों की मांगों पर सहमति नहीं बन पाने के कारण सब कुछ शांत है। पत्रिका ने मंगलवार को मांइस क्षैत्र की स्थिति जानी तो सुनसान मांइस क्षैत्र में दूर-दूर तक केवल कोयले की डस्ट उड़ती नजर आई। मांइस के पास धरने के सामने एक पुलिस की अस्थाई चौकी व सामने धरने पर बैठे सैकड़ों किसानों के अलावा सब कुछ सुनसान नजर आ रहा था। अमुमन व्यस्त रहने वाली नागौर जिले की प्रसिद्ध लिग्नाइट कोयला खदान पूर्णतः शांत नजर आ रही है।
रोजाना का एक करोड़ के लगभग नुकसान-मातासुख लिग्नाइट कोयला खदान बंद होने से आरएसएमएमएल को रोजाना अस्सी से नब्बे लाख रुपए का नुकसान हो रहा है। सरकार को भी इस खदान से रोजाना बड़ा नुकसान उठाना पड़ रहा है, लेकिन किसानों की मांगों पर कोई समाधान नहीं होने से कोयले की लोडिंग ठप है। उधर, किसान संगठन प्रतिनिधि शिम्भुपुरी,नाथूराम,भुराराम,शौकत खान,मुस्ताक खान,धुलाराम ने बताया कि किसान तीन मार्च से धरने पर बैठे हैं, लेकिन हमारी मांगों पर कोई सुनवाई नहीं हो रही है। तेज गर्मी व लू से रोजाना किसानों की तबीयत बिगड़ रही है पर गूंगे राजे में सुनने वाला कोई नही है। किसानों ने कहा कि जब तक मुआवजा नहीं मिलेगा धरना जारी रहेगा।
Published on:
10 May 2022 06:54 pm
बड़ी खबरें
View Allनागौर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
