29 जनवरी 2026,

गुरुवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Video : जिला परिषद की बैठक में जनप्रतिनिधियों के निशाने पर रहे अधिकारी, सीईओ से बार-बार हुई हॉट टॉक

जिला परिषद साधारण सभा की विशेष बैठक में बिजली, पानी, मौसमी बीमारियों के साथ विकास के मुद्दों पर हुई चर्चा

5 min read
Google source verification
Members Hot talks with the CEO In the meeting of Nagaur Zilla Parishad

Members Hot talks with the CEO In the meeting of Nagaur Zilla Parishad

नागौर. जिला परिषद साधारण सभा की बैठक में बुधवार को जनप्रतिनिधियों ने अधिकारियों को भ्रष्टाचार सहित जनसमस्याओं को लेकर आड़े हाथों लिया। बैठक के दौरान जिला परिषद सीईओ जवाहर चौधरी से खींवसर विधायक नारायण बेनीवाल, जिला परिषद सदस्य डॉ. सहदेव चौधरी, संजीव सिंह चौधरी, ओमप्रकाश सेन सहित अन्य से हॉट टॉक हुई। सदस्य डॉ. चौधरी ने बिना बजट पेश किए उसका अनुमोदन करने व भ्रष्टाचार के आरोप लगाए तो सीईओ चौधरी तैश में आ गए, जिससे दोनों के बीच काफी हॉट टॉक हुई। इसके बाद सीईओ व विधायक बेनीवाल की हॉट टॉक हुई। जिस पर विधायक ने उन्हें अंग्रेजी में निर्देश देते हुए कहा कि मैं जो कह रहा हूं, उसे ध्यान से सुनो और अपने प्रोटोकोल का ध्यान रखो। विधायक ने कहा कि आप यहां बैठकर किस बात की मॉनिटरिंग कर रहे हैं, आपके अधिकारी जनप्रतिनधियों से बात ही नहीं करते। विधायक ने नागौर पत्रिका अखबार दिखाते हुए कहा - आज का पत्रिका पढ़ा क्या? सरपंच को इस्तीफा क्यों देना पड़ा? पंचायती राज को भ्रष्टाचार का अड्डा बना रखा है। उन्होंने कलक्टर से जांच इस मामले की मांग की। इसके बाद सदस्यों ने भी सीईओ की अन्य सदस्यों से भी बहस हुई, जिस सदस्यों ने कहा, ‘सीईओ साहब आप हमें बच्चों की तरह धमकाओ मत।’ हालांकि जब भी मामला गर्माने लगा, तब बैठक में उपस्थित जिला कलक्टर डॉ. जितेन्द्र कुमार सोनी एवं जिला प्रमुख भागीरथ चौधरी ने बात को संभालने का प्रयास किया और सदस्यों को शांत किया।

पिछली बैठक के मुद्दे शामिल नहीं किए तो नाराज हुए
निर्धारित समय से करीब 20 मिनट देरी से शुरू हुई बैठक में सदस्य डॉ. चौधरी, सेन सहित अन्य कुछ सदस्यों ने 26 मार्च को हुई बैठक में उठाए गए मुद्दों को अनुपालना रिपोर्ट में शामिल नहीं होने पर नाराजगी जाहिर करते हुए नाराजगी जताई। सीईओ ने कहा कि सब शामिल है, इस पर सदस्यों ने कहा कि उन्हें जो अनुपालना रिपोर्ट दी गई है, उसमें उनके मुद्दे शामिल नहीं हैं, यदि हैं तो बताए अन्यथा यह अपराध है। सदस्यों ने कहा कि हमें जवाब दो, उनके द्वारा उठाए गए मुद्दे क्यों नहीं लिखे गए। हमारा यहां आने का क्या औचित्य रह जाएगा। बात बढऩे लगी तो कलक्टर सोनी ने बात संभालते हुए निर्देश दिए कि भविष्य में अनुपालना समय पर सुनिश्चित हो।

78 लाख के ट्यूबवैल खोदे, लेकिन पानी नहीं मिला
विधायक बेनीवाल ने कहा कि बैठक में छोटे-छोटे इश्यू पर चर्चा करने की बजाए जनता से जुड़े बड़े मुद्दों पर चर्चा होनी चाहिए, ताकि बैठक का सार्थक परिणाम सामने आए। उन्होंने कहा कि नागौर पंचायत समिति से गत कार्यकाल में 78 लाख की स्वीकृति निकालकर ट्यूबवेल खोदे, लेकिन ग्रामीणों को पानी नहीं मिला। इसमें भारी भ्रष्टाचार हुआ है, इसकी जांच करवाई जाए। इसी प्रकार गगवाना में 33 लाख के काम पंचायत समिति ने करवाए, ऐसा क्यों? ये काम ग्राम पंचायत ने क्यों नहीं करवाए? वेबसाइट पर हो नाम व नम्बर विधायक बेनीवाल ने जिला कलक्टर को जोधपुर का उदाहरण देते हुए कहा कि नागौर की वेबसाइट पर अधिकारियों के नाम, नम्बर व ई-मेल आईडी नहीं है। एक तरफ हम आईटी युग में जाने की बात कर रहे हैं, दूसरी तरफ यह शर्म की बात है। इस पर कलक्टर ने हाथों हाथ सम्बन्धित अधिकारी को निर्देश देते हुए 10 जुलाई तक जानकारी अपडेट करने के लिए कहा।

बिजली में पावर नहीं : मुरावतिया
बैठक में शामिल हुए मकराना विधायक रूपाराम मुरावतिया ने बिजली के वॉल्टेज की समस्या का मुद्दा उठाते हुए कहा कि मकराना में बिजली तो आ रही है, लेकिन उसमें पावर नहीं है। मुरावतिया ने कहा कि हमारे अधिकारी भी अच्छे हैं, लेकिन उनमें करंट नहीं है। उन्होंने डिस्कॉम एसई से कहा कि हम धरना या आंदोलन नहीं करना चाहते, लेकिन यदि सात दिन में समस्या का समाधान नहीं हुआ तो उनकी भाषा बदल जाएगी।

बकरी चराने वाला जीएसएस चला रहा है
बिजली के मुद्दे पर सदस्य दिनेश गोदारा ने अपने क्षेत्र में बिजली से जुड़े मुद्दे फिर दोहराए। अन्य सदस्यों ने कहा कि गांवों में बार-बार ट्रिपिंग हो रही है। इस पर विधायक बेनीवाल ने फिर पत्रिका की कटिंग दिखाते हुए कहा कि एसई साहब अखबार भी पढ़ा करो, खुडुखुड़ा खुर्द में पांच दिन बिजली गुल रही। कैसी व्यवस्था है आपकी? उन्होंने कहा कि ठेकेदार पर संचालित जीएसएस पर तीन आईटीआई होल्डर व्यक्ति होने चाहिए, जो कहीं नहीं है, इसका भौतिक सत्यापन करवाएं। ठेकेदारों ने बकरी चराने वाले को जीएसएस संचालन का जिम्मा दे रखा है, ट्रिपिंग की समस्या कैसे मिटेगी। एसई आरबी सिंह ने कहा कि उन्होंने जांच करवाई है और जहां जहां कमी पाई, वहां ठेकेदार के पैसे भी काटे हैं। हैल्पलाइन नम्बर का प्रोपर रेस्पॉन्स नहीं जिला परिषद सदस्यों ने कहा कि डिस्कॉम द्वारा जारी हेल्पलाइन नम्बर का न तो प्रोपर रेस्पॉन्स मिलता है और न ही समस्या का समाधान होता है। इस पर कलक्टर ने एसई व नागौर एक्सईएन को निर्देश देते हुए कहा कि इसकी जांच करवाओ, क्या वाकई हैल्पलाइन की व्यवस्था के अनुसार छह घंटे में काम हो रहा है? कलक्टर ने सप्ताह में एक बार ग्रामीण क्षेत्रों में जनसुनवाई करने के निर्देश भी दिए। इस दौरान एक सदस्य ने बिजली कनेक्शनों में नाम परिवर्तन की फाइलों का निस्तारण करने की मांग की। उन्होंने कहा कि जहां एक महीने में काम हो जाना चाहिए, वहां वर्षों से सैकड़ों फाइलें कार्यालयों में धूल फांक रही है, जबकि जो लोग दुनिया में नहीं रहे, उनके स्थान पर उनके रिश्तेदारों के नाम परिवर्तन करने हैं, ताकि उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ मिल सके।

सदस्यों का एक ही सवाल - गांवों में पानी कब आएगा?
पानी के मुद्दे पर सदस्य ओमप्रकाश सेन ने कहा कि जिला मुख्यालय सहित जिले में पानी की समस्या गहराई हुई है, रोज मटकियां फूट रही हैं। विधायक बेनीवाल ने कहा कि नहरी परियोजना के बाद अब जल मिशन के तहत अधिकारी उन स्थानों पर लाइनें बिछा रहे हैं, जहां पानी जाना ही नहीं है। उन्होंने सवाल करते हुए कहा कि जनता के पैसे बर्बाद क्यों कर रहे हो? जसवंतगढ़ की महिला सदस्य व मकराना क्षेत्र की महिला सदस्यों ने भी अपने अपने क्षेत्र की पानी से जुड़ी समस्याएं बताते हुए अधिकारियों से समाधान का जवाब मांगा। डीडवाना से आए सदस्य मुश्ताक खान ने कहा कि जलेबी की तरह लाइनें बिछा दी, लेकिन पानी नहीं आ रहा है। डीडवाना में चार दिन से पानी की सप्लाई हो रही है। इस पर कलक्टर इस बात को स्वीकार करते हुए कहा कि नागौर शहर में अव्यवस्था है। नई व पुरानी दोनों लाइनों में पानी जा रहा है। इसको ठीक करवा रहे हैं। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्र की समस्याओं के लिए नहरी विभाग व जलदाय विभाग के अधिकारियों से भी जवाब दिलवाए।

10 में से दो विधायक ही पहुंचे
पंचायतीराज की सबसे बड़ी संस्था जिला परिषद की साधारण सभा की बैठक में बुधवार को दो विधायक ही पहुंचे, जबकि जिले में कुल 10 विधायक हैं, जिनमें दो भाजपा, दो आरएलपी व छह सत्ताधारी पार्टी कांग्रेस के हैं। बैठक में खींवसर व मकराना विधायक ही पहुंचे। कांग्रेस पार्टी से एक भी विधायक बैठक में शामिल नहीं हुआ। वहीं जिला मुख्यालय पर बैठे भाजपा विधायक ने भी बैठक में आना उचित नहीं समझा। जनता के हितैषी बनने का दंभ भरने वाले विधायकों के पास साधारण सभा जैसी महत्वपूर्ण बैठक में शामिल होने का समय नहीं है।


पंचायती राज के अधिकारी बजट का आवंटन करने में भारी भ्रष्टाचार करते हैं, जिसके कारण ग्रामीण विकास के सपने आज तक अधूरे हैं। हम प्रयास करेंगे कि ऐसे अधिकारियों के खिलाफ सरकार कार्रवाई करे, ताकि समाज के अंंतिम छोर बैठा व्यक्ति भी सरकार की योजनाओं से लाभान्वित हो।
- नारायण बेनीवाल, विधायक, खींवसर

Story Loader