4 अप्रैल 2026,

शनिवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

पांच साल में मेड़ता की रेल सेवा पूरी तरह बदहाल

-मेड़ता सिटी-मेड़ता रोड के बीच रेल सेवा का सिस्टम फेल - यात्रियों ने सुविधा के लिहाज से रेण स्टेशन को चुना विकल्प --एक डीएमयू उसके सिर्फ दो फेरे, वो भी एक घंटे से अधिक समय में हो रहा पूरे

3 min read
Google source verification
 पांच साल में मेड़ता की रेल सेवा पूरी तरह बदहाल

मेड़ता सिटी. रेलवे स्टेशन

मेड़ता सिटी. मेड़ता सिटी-मेड़ता रोड के बीच रेल सेवा का सिस्टम फेल सा हो गया है। शहर के लोगों को यहां से 16 किमी दूर मेड़ता रोड के लिए रेल सेवा मुश्किल से नसीब हो रही है। रेलबस को रेलवे ने कंडम घोषित करके रूट से हटाया, तब से इस स्टेशन को मानो मूर्छा का Òबाण' लग गया हो। यहां अभी दो डिब्बों वाली डीएमयू ट्रेन आती है, वो भी 24 घंटे में मात्र दो फेरे करती है। मेड़ता सिटी-मेड़ता रोड के बीच मानवरहित फाटकों के कारण एक फेरे में अभी एक घंटे से अधिक का समय लग रहा है। इसकी वजह से शहर सहित आसपास के लोगों के लिए मेड़ता जाने की बजाय सुविधा के लिहाज से रेण रेलवे स्टेशन अच्छा विकल्प बन गया है।

दरअसल, वर्ष 1994 से मेड़ता सिटी-मेड़ता रोड के बीच शुरू हुई एशिया की पहली रेलबस 26 साल चलने के बाद फरवरी 2020 में नकारा होने पर बंद कर दी गई। इसके बाद 1 मार्च 2020 से यहां बागावास में बने डीएमयू स्टेशन से पहली बार डीएमयू का संचालन शुरू हुआ। फिर कोरोना की पहली लहर के कारण 1 मार्च 2020 से मेड़ता सिटी-मेड़ता रोड के बीच संचालित डीएमयू बंद हो गई, जो 14 महीने बाद 10 अप्रेल 2021 से फिर शुरू हुई। करीब एक सप्ताह चलने के बाद कोरोना की दूसरी लहर के कारण इसे फिर बंद कर दिया गया। जब महामारी का प्रकोप कम हुआ तो रेलवे ने फिर से यहां डीएमयू सेवा शुरू की, लेकिन दो डिब्बों वाली डीएमयू के सुबह और रात को सिर्फ दो फेरे। तब से लेकर अब तक यही ढर्रा चल रहा है। एक तो पर्याप्त रूप से रेल सुविधा नहीं मिलने और दूसरा सुबह-रात को दो फेरो वाली डीएमयू में 16 किमी का सफर भी एक घंटे से अधिक समय में पूरा होने से लोगों को रास नहीं आ रहा है। इसलिए रेलवे के यात्रियों ने मेड़ता सिटी से मेड़ता रोड जाने की बजाय रेण रेलवे स्टेशन को सुविधाजनक मान लिया है। जब तक मेड़ता शहर के लोगों के लिए मेड़ता-पुष्कर रेलवे लाइन की स्वीकृति मिलकर बिछ़ नहीं जाती तब तक मेड़ता सिटी-मेड़ता रोड के बीच रेल सेवा बेहद जरूरी है।

रेलवे विभाग...! मेड़ता सिटी-मेड़ता रोड के बीच क्यों हैं रियासतकाल की मानव रहित फाटके
रेलवे ने अपने तंत्र को पूरी तरह से आधुनिक करते हुए जितनी भी मानवरहित फाटक है उनमें से अधिकांश का असिस्तव ही खत्म कर दिया या फिर उन्हें ऑटोमैटिक कर दिया पर मेड़ता सिटी-मेड़ता रोड के बीच आज भी रिसासतकाल के समय की मानव रहित फाटकें हैं। जब डीमएयू यहां से रवाना होती है तो प्रत्येक मानव रहित फाटक आने पर कार्मिक उतरकर उसे बंद करता है, फिर ट्रेन आगे बढ़ती है। इसकी वजह से सफर में समय अधिक लगता है।

अंडरब्रिज है एक विकल्प...फेरे भी बढ़ाए रेलवे
अगर डूबती मेड़ता की इस रेल सेवा को फिर से जीवित करना है तो बतौर Òसंजीवनी' अंडरब्रिज ही सहायक हो सकते हैं। अगर इस मार्ग पर 5 से 6 अंडरब्रिज बन जाते हैं तो कहीं ना कहीं मेड़ता सिटी-मेड़ता रोड के बीच सफर का समय घट जाएगा। सुविधा को लेकर देशभर में विख्यात जोधपुर मंडल के लिए यह काम कोई बड़ा नहीं है। रेलवे को यह भी चाहिए कि मेड़ता में दिनों-दिन घटती रेल सेवा को फिर से दुरूस्त करने के लिए हर दो घंटे में डीएमयू का 1 फेरा यानी कि दिनभर में 6 से 7 फेरे करवाएं जाए।
रेल सेवा शुरू नहीं होने से बागावास प्लेटफार्म की दुर्दशा

वैसे तो जोधपुर मंडल ने मेड़ता सिटी को कॉमर्शियल स्टेशन की श्रेणी में शुमार कर रखा है। इसका कारण है यहां यूरिया, डीएपी, लाइम स्टोन सहित अन्य खनिज परिवहन के लिहाज से यह प्रमुख स्टेशन बना हुआ है। इससे रेलवे को अच्छी-खासी आय मेड़ता से होती है पर मेड़ता रेलवे स्टेशन पर पर्याप्त फेरे नहीं होने तथा डीएमयू को लेकर बागावास में बनाए प्लेटफार्म पर ठहराव नहीं होने से यह दुर्दशा का शिकार हो रहा है।