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करोड़ों की जमीन का तीन रूपए जुर्माना

सवाईसिंह हमीराणा खींवसर. सरकार की बेशकीमती जमीनों पर काबिज लोगों को हटाने के लिए बरसों पहले बने कानून ही रोड़ा बन रहे हैं। क्षेत्र की लगान दर 10 पैसे से 25 पैसे होने के कारण यहां करोड़ों रुपए की जमीन पर कब्जा जमाने वाले लोगों से मात्र आठ-दस रुपए जुर्माना वसूल कर उन्हें बरी कर दिया जाता है। इससे सरक

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केस-1
ग्राम नाहरसिंहपुरा
स्थित रास्ते की बेशकीमती
जमीन पर गांव के ही अतिक्रमणकारी
जगुराम
, रिड़ाराम
व मोहनराम ने इसी वर्ष करीब
चार बिस्वा जमीन पर कब्जा कर
लिया। ग्रामीणों का आवागमन
बाधित होने एवं सरकारी जमीन
खुर्द
-बुर्द
होने पर पटवारी ने राजस्थान
भू
-राजस्व
अधिनियम
1956 की
धारा
91 के
तहत कार्यवाही करते हुए सभी
अतिक्रमणकारियों पर एक
-एक
रुपए का जुर्माना किया है।
ऐसे में अतिक्रमणकारियों ने
इस अतिक्रमित भूमि का तीन रूपए
जुर्माना अदा कर दिया। अब
ग्रामीणों का आवागमन प्रभावित
हो रहा है।

केस-
2
खुण्डाला गांव
में सार्वजनिक रास्ते की जमीन
पर इसी गांव के अतिक्रमणकारी
पुनाराम पुत्र पुरबाराम जाट
ने कब्जा करने के साथ रास्ते
पर तारबन्दी कर आवागमन बंद
कर दिया तथा जमीन पर काश्त कर
ली। जिस पर राजस्व विभाग ने
कार्यवाही करते हुए अतिक्रमणकारी
पर लगान दर से
50
गुणा राशि के रूप
में चार रुपए का जुर्माना
वसूला है। इतने कम जुर्माने
के बाद क्षेत्र में अतिक्रमण
बेलगाम बढ़े है।

केस-
3
पांचौड़ी गांव
में रास्ते की भूमि पर गांव
के चुनाराम
,
खेराजराम ने करीब
दो बिस्वा जमीन पर अतिक्रमण
कर लिया। शिकायत पर राजस्व
विभाग ने धारा
91
के तहत कार्यवाही
करते हुए तीन रुपए का जुर्माना
किया है। यह हाल इनका ही नहीं
बल्कि खोड़वा के भंवरूराम
,
कांटिया पूनाराम,
अन्नाराम,
भैराराम,
रावतराम जैसे
सैंकड़ों लोग है जो बेशकीमती
जमीन पर कब्जा जमाए बैठे हैं
और सरकार को दो से पांच रुपए
तक जुर्माना दे रहे हैं।

सब में
समान जुर्माना

रोचक बात
यह है कि सरकारी भूमि पर अतिक्रमण
कैसा भी हो
,
राजस्व विभाग उसका
लगान दर का जुर्माना वसूल रहा
है। नियमों में देखा जाए तो
अतिक्रमण का जुर्माना अतिक्रमण
की किस्म के अनुसार किया जाता
है। फसल बुवाई के अलावा उद्योग
या दुकान लगाने पर अतिक्रमण
का जुर्माना वाणिज्य की डीएलसी
दर से गुणा करके किया जाता है
परन्तु यहां दुकान
,
उद्योग,
मकान,
बाड़ा या काश्त पर
भी लगान दर से जुर्माना किया
जा रहा है। इस कारण राजस्व
विभाग की आय पर प्रभाव पडऩे
के साथ अतिक्रमणों को बढ़ावा
मिल रहा है। गांवों में सरकारी
जमीन पर बड़ी तादाद में दुकानें
व केबिन रखकर अतिक्रमण किए
गए हैं
, लेकिन
राजस्व विभाग केवल लगान दर
से ही जुर्माना कर रहा है।
वाणिज्य डीएलसी दर से जुर्माना
के प्रकरण शून्य के बराबर है।

नहीं होती
फसल नीलामी

क्षेत्र
के अधिकांश अतिक्रमणों पर
अतिक्रमणकारी फसल बुवाई करते
हैं लेकिन राजस्व विभाग कुछेक
मामलों में ही फसल बुवाई दर्शाता
है। अतिक्रमण की रिपोर्ट करते
समय राजस्वकर्मी भी अतिक्रमणकारी
को लाभ देते हुए सरकारी भूमि
पर फसल दिखाने की बजाय केवल
कब्जा दिखाते हैं। इस कारण
फसल नीलाम नहीं हो पाती। कुछेक
अतिक्रमणों में ही फसल नीलाम
होती है।

बदलाव की
जरूरत

सरकार
द्वारा राजस्थान भू
-राजस्व
अधिनियम
1956 की
धारा
91 के
तहत अतिक्रमणकारी के खिलाफ
जुर्माने की जो व्यवस्था है
वो लगान दर से
50
गुना है,
लेकिन 70
वर्ष पुरानी लगान
दर होने के कारण जुर्माना नाम
मात्र का हो रहा है जिससे
अतिक्रमण बढ़ रहे है। जुर्माना
राशि में बदलाव की जरूरत है।

-मोहनराम
सारण
, सरपंच
नागड़ी

सरकार
करे समीक्षा

जुर्माना
राशि वर्ष
1955
में निर्धारित की
गई थी
, उसके
बाद जुर्माना राशि में बढ़ोतरी
नहीं की है। राज्य सरकार द्वारा
इस जुर्माना राशि के मामले
में समीक्षा की जानी चाहिए
ताकि जुर्माना राशि बढऩे से
अतिक्रमण कम होंगे तथा
अतिक्रमणकारियों में भी भय
पैदा होगा।

-कुशल
कुमार कोठारी
,
उपखण्ड अधिकारी
खींवसर

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