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बिना ट्रेफिक लाइट वाला शहर नागौर

ग्राउण्ड रिपोर्ट रवीन्द्र मिश्रा नागौर . शहर की प्रगति में बेहतर यातायात प्रबंधन का बड़ा योगदान होता है। यातायात सुविधा कार्यों को सरल और आसान कर देती हैं। यही कारण है कि यातायात सुविधाओं के साथ उनके कुछ नियम और कानून भी बनाए गए हैं, ताकि यातायात का सुचारू संचालन हो सके। इसमें स्वचालित ट्रेफिक लाइट पाइंट भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

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बिना ट्रेफिक लाइट वाला शहर नागौर

नागौर . ट्रेफिक लाइट

- शहर में एक भी ट्रेफिक लाइट वाला पाइंट नहीं

- कई तिराहे व चौराहे ऐसे जहां यातायात का बेहद दबाव

- याताताया पुलिस व परिवहन विभाग ने एक भी चौराहे पर ट्रेफिक कंट्रोल लाइट नहीं लगा रखी

- पहले निकलने की होड़ में टकराते रहे हैं वाहन


बात नागौर शहर की करें तो यहां एक भी तिराहा व चौराहा ऐसा नहीं है, जहां ट्रेफिक लाइट लगी हो। नागौर शहरवासी तो ट्रेफिक लाइट छोड़ अभी ट्रेफिक सेन्स से भी अनभिज्ञ हैं। जल्दी निकलने की आपाधापी में लोग यातायात के नियम तोड़ते नजर आ जाएंगे। शहर का वल्लभ चौराहा, मानासर तिराहा, कलक्ट्रेट तिराहा, कृषि मंडी तिराहा व डीडवाना बाइपास तिराहा ऐसे ट्रेफिक पाइंट है, जहां वाहनों का आवागम ज्यादा रहता है। इन पाइंट पर स्वचालित ट्रेफिक लाइट लगे तो यातायात सुगम होने के साथ ही दुर्घटनाएं भी कम होंगी।

शहर के साथ वाहन बढ़े पर नहीं लगाई ट्रेफिक लाइट

करीब डेढ लाख की आबादी वाले नागौर शहर के विस्तार के साथ ही यातायात के साधन तो बढ़े पर सुगम संचालन के लिए कोई प्रयास नहीं हुए। बड़े शहरों में यातायात दबाव वाले चौराहों व तिराहों पर स्वचालित ट्रेफिक लाइट लगी होती है। नागौर जिला ट्रेफिक मैनेजमेन्ट कमेटी की बैठकों में इसका प्रस्ताव तो कई बार लिया गया पर प्रस्ताव कागजों में ही सफर करता रहा। नतीजतन अब तक एक भी ट्रेफिक लाइट नहीं लगाई गई। चौराहों पर मनमर्जी से ट्रेफिक दौड़ता रहता है। इससे हादसे भी बढ़े हैं।

विजय वल्लभ चौराहा पर सबसे ज्यादा ट्रेफिक
राष्ट्रीय व राज्य राजमार्गों को जोडऩे वाले विजय वल्लभ चौराहा पर पूरे दिन यातायात का दबाब बना रहता है। लाडनूं, डीडवाना व अजमेर रोड को जोडऩे वाले राजमार्ग पर स्थित इस चौराहे पर शहर के ट्रेफिक का भी दबाव रहता है। वहीं दुपहिया चौपहिया के साथ ही भारी माल वाहक वाहनों व बसोंं का भी हर समय आवागमन बना रहता है। दिनभर में करीब 5 से 10 हजार वाहन इस चौराहे से गुजरते है, लेकिन यहां की ट्रेफिक व्यवस्था को संभालने की जिम्मेदारी तीन ट्रेफिक पुलिसकर्मियों के हवाले हैं। यदि यहां स्वचालित ट्रेफिक लाइट लगाई जाए तो यातायात सुगम हो सकता है।

मानासर- वाटर वक्र्स चौराह पर जले बत्ती

शहर में मानासर तिराहा व वाटरवक्र्स चौराहा पर पूरे दिन यातायात का दबाव रहता है। मानासर से दिनभर में करीब पांच हजार वाहनों का आवागमन होता है। आरओबी के बंद पड़े कार्य के कारण यहां ट्रेफिक व्यवस्था पूरी तरह से चौपट हो रखी है। इसी तरह शहर से पुरानी हाऊसिंग बोर्ड की तरफ जाने वाले मार्ग पर स्थित वाटर वक्र्स चौराहे पर चारों तरफ से वाहन आने-जाने के कारण ट्रेफिक जाम रहता है। कई बार दुर्घटना भी हो जाती है। इस चौराहे पर भी ट्रेफिक लाइट आवश्यक हो गई है। इसी तरह बीकानेर रोड पर जोधपुर बाइपास व डीडवाना बाइपास के तिराहों पर भी ट्रेफिक लाइट लगाकर हादसों की आशंका से बचा जा सकता है।

धरातल पर नहीं उतरे टीएमसी के प्रस्ताव

2020 में हुई यातायात प्रबंध समिति की बैठक में कलक्ट्रेट तिराहा से मूण्डवा तिराहा तक के मार्ग को सुगम पथ की संज्ञा देते हुए प्रस्ताव तो खूब लिए गए, लेकिन उनकी धरातल पर क्रियान्विति नहीं हुई। डीटीओ, नगर परिषद व पीडब्ल्यूडी को पत्र लिखने और फाइल में बंद होने तक का कार्य ही हुआ। स्थिति ढाक के तीन पात वाली ही है। सुगम पथ के तहत कलक्ट्री तिराहे से मूण्डवा तिराहे तक यातायात संकेतक, स्प्रीड ब्रेकर, रोड लाइट व वाटर वक्र्स चौराहा, वल्लभ चौराहा पर ट्रेफिक लाइट के काम होने थे पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। जबकि इस संबंध में 21 जुलाई 2020 को यातायात पुलिस की ओर से रिमाइंडर भी भेजा गया।

ट्रेफिक बढ़ा, नफरी नहीं
शहर में ट्रेफिक तो काफी बढ़ गया, लेकिन नफरी नहीं बढऩे से मात्र 30 यातायात पुलिसकर्मियों के कंधों पर शहर की ट्रेफिक व्यवस्था संभालने का जिम्मा है। यातायात थाना प्रभारी की पोस्ट उप निरीक्षक की होने के बावजूद हेड कांस्टेबल को जिम्मेदारी दी हुई है। यातायात पुलिस के अनुसार ट्रेफिक व्यवस्था के तहत शहर में नौ पाइंट बने हुए हैं। इनमें विजय वल्लभ चौराहा, गांधी चौक, तहसील चौक, सदर बाजार, दिल्ली गेट कलक्ट्री तिराहा, कलक्ट्री के सामने, किले की ढाल, मूण्डवा चौराहा, टेम्पो स्टेण्ड, तांगा स्टेण्ड आदि शामिल है। जहां एक हेड कांस्टेबल व दो सिपाही तथा कुछ पाइंट पर सिर्फ कांस्टेबल ही यातायात व्यवस्था संभालते हैं।

इनका कहना

- वाटर वक्र्स व वल्लभ चौराहा पर ट्रेफिक लाइट लगवाने के एसपी के आदेश की पालना में प्रस्ताव बनाकर 17 जुलाई 2020 को डीटीओ व पीडब्ल्यूडी व नगर परिषद को भेजा गया था। इसका रिमांइडर भी दिया जा चुका है। लेकिन अब तक कोई काम शुरू नहीं हुआ। उच्चाधिकारियों के आदेश पर फिर से रिमांइडर भेज देंगे।

- शिवदेवराम, प्रभारी, यातायात पुलिस थाना, नागौर

- जिला यातायात प्रबंध कमेटी की बैठक में सुगम पथ के तहत कलक्ट्री तिराहा से मूण्डवा तिराहे तक के मार्ग को शामिल किया गया था। जिन पर सूचना बोर्ड, संकेतक स्पीड ब्रेकर आदि लगवाए जाने थे, लेकिन मानासर पर आरओबी निर्माण के कारण कार्य नहीं हुआ। सात जनवरी को होने वाली टीएमसी की मीटिंग में वल्लभ चौराहा व वाटर वक्र्स चौराहा पर ट्रेफिक लाइट लगाने का प्रस्ताव लेकर जल्द कार्य करवाएंगे।

ओमप्रकाश चौधरी, जिला परिवहन अधिकारी, नागौर

ऐसे कंट्रोल करती है चौराहे पर लाल, हरी व पीली बत्ती

1. लाल लाइट

यातायात के तीन रंगों वाले संकेतों में सबसे पहला और सबसे महत्वपूर्ण लाल रंग अर्थात रेड लाइट का संकेत होता है, जिसका अर्थ रुकना होता है। यदि आपको मार्ग में रेड लाइट दिखाई दे, तो आपको उसी स्थान पर रुक जाना है।

2. पीली लाइट
पीली लाइट आपको सिग्नल में दूसरे नंबर पर दिखाई देगी, इसका अर्थ होता है कि आप चलने के लिए तैयार हो जाएं।

3. हरी लाइट

हरी लाइट को इंग्लिश में ग्रीन लाइट कहते हैं, यह ट्रेफिक सिग्नल में तीसरे नंबर अर्थात सबसे नीचे होती है। ग्रीन लाइट का अर्थ है कि अब आप आगे जा सकते हैं।


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