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आयुर्वेद अधिकारियों ने पंचकर्म का कर दिया क्रियाक्रम, धूल चाट रही चिकित्सा सामग्री

लाखों रुपए खर्च करके सालभर पहले भेजी थी पंचकर्म थैरेपी की सामग्री, शहवासियों को नहीं मिल पा रहा आयुर्वेद चिकित्सा का लाभ
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नागौर

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Shyam Lal Choudhary

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Updated: 29 Nov 2017, 11:37 AM IST

Panchkarma Panchkarma

Dust-licking Panchkarma Medical Material

नागौर. नागौर शहर सहित जिले के लोगों को आयुर्वेद की पंचकर्म चिकित्सा पद्धति का फायदा देने के लिए राज्य सरकार द्वारा लाखों रुपए खर्च कर उपलब्ध करवाई गई चिकित्सा सामग्री एवं मशीनरी पिछले डेढ़ साल से धूल चाट रही है। आयुर्वेद अधिकारियों एवं चिकित्सकों को जहां सरकार द्वारा उपलब्ध करवाई गई पंचकर्म की चिकित्सा सामग्री एवं मशीनरी से लोगों का उपचार करना था, वहां उन्होंने मशीनरी का ही 'क्रियाक्रमÓ कर दिया। पंचकर्म चिकित्सा पद्धति की सामग्री पुराने अस्पताल भवन के स्टोर में पड़ी-पड़ी खराब हो रही है। मजे की बात यह है कि जिला अस्पताल में चिकित्सकों के पद भरे हुए हैं, इसके बावजूद लोगों को चिकित्सा पद्धति का लाभ नहीं मिल रहा है।
जगह के अभाव का बहाना
पंचकर्म की चिकित्सा सामग्री आने के डेढ़ साल बाद भी उसका लाभ मरीजों को नहीं देने की बात पर चिकित्सा विभाग के अधिकारियों ने बताया कि उनके पास मशीनों को लगाने के लिए पहले जगह नहीं थी। हालांकि पिछले करीब एक-डेढ़ महीने से आयुर्वेद का जिला अस्पताल जेलएन अस्पताल में शिफ्ट हो चुका है, लेकिन पंचकर्म की मशीनें आज भी पुराने अस्पताल भवन में ताले में बंद पड़ी है।

क्या है पंचकर्म
पंचकर्म आयुर्वेद की उत्कृष्ट चिकित्सा विधि है, इस विधि से शरीर में होने वाले रोगों और रोग के कारणों को दूर करने के लिए उपयोग ली जाती है। इसमें तीनों दोषों वात, पित, कफ के असम रूप को समरूप में पुन: स्थापित करने के लिए विभिन्न प्रकार की प्रक्रियाएं प्रयोग में लाई जाती हैं। पंचकर्म, आयुर्वेद शास्त्र में वर्णित एक विशेष चिकित्सा पद्धति है, जो दोषों को शरीर से बाहर निकाल कर रोगों को जड़ से समाप्त करती हे। यह शरीर शोधन की प्रक्रिया है, इसमें पांच प्रधान कर्म होते हैं- वमन, विरेनचन, आस्थापन वस्ति, अनुवासन वस्ति एवं नस्य।
अब करेंगे शुरू
जिला अस्पताल में पंचकर्म चिकित्सा पद्धति के लिए सामग्री एवं मशीनें मेरे यहां पदभार ग्रहण करने से पहले ही आ गईं थी। पुराने अस्पताल भवन में जगह नहीं होने से उनका उपयोग नहीं कर पाए। अब जेएलएन अस्पताल भवन में जगह मिली है, जहां मशीनों को शिफ्ट करने की तैयारी कर रहे हैं।
- महावीर कुमार वशिष्ठ, जिला आयुर्वेद अधिकारी, नागौर