
Nagaur nagar parishad Chairman election
कांग्रेस से मांगीलाल भाटी हो सकते हैं उम्मीदवार
नागौर. राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से नगर परिषद सभापति का उप चुनाव कार्यक्रम जारी करने के साथ ही सभापति चुनने को लेकर राजनीति शुरू हो गई है। कांग्रेस व भाजपा दोनों ही अपने-अपने पार्षदों से सम्पर्क कर रणनीति बनाने में जुटी गई है वहीं दोनों ही पार्टियों में अंदर ही अंदर विरोध के स्वर भी फूटने लगे हैं। 2015 में हुए चुनाव में भाजपा के 16, कांगे्रस के 17 व 12 निर्दलीय पार्षद निर्वाचित हुए। वार्ड 13 से निर्वाचित पार्षद कृपाराम सोलंकी (सभापति) का निधन होने से कांग्रेस के 16 पार्षद ही रह जाएंगे। ऐसे में भाजपा व कांग्रेस के बराबर 16-16 पार्षद रहेंगे। गौरतलब है कि राज्य निर्वाचन विभाग ने आगामी 27 सितम्बर को उप चुनाव की अधिसूचना जारी की है।
कांगे्रस के लिए बड़ी चुनौती
नगर परिषद में सभापति के पद पर जीत के लिए 23 मतों की आवश्यकता होगी। ऐसे में भाजपा व कांग्रेस दोनों ही दलों को सात अन्य पार्षदों के समर्थन की जरुरत होगी। राजनीति में शाह मात का खेल होता है और मौजूदा समय में नगर परिषद की राजनीति में भी कुछ ऐसा ही देखने को मिल रहा है। भाजपा कांगे्रस के पार्षदों में दिख रही धड़ेबाजी का फायदा उठाकर कांगे्रस के हाथ से बोर्ड छीनने की कोशिश करेगी। हालांकि भाजपा 16 पार्षद होते हुए भितरघात के चलते 2015 में वह अपना सभापति नहीं बना पाई। माना जा रहा है कि कांगे्रस आलाकमान ने सभापति पद उम्मीदवार के लिए पार्षद मांगीलाल भाटी के नाम पर मुहर लगा दी है।
बंद कमरे में हो रहा मंथन
सभापति चुनने को लेकर राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। भाजपा व कांग्रेस दोनों ही समीकरण बैठाने में जुट गई हैं। हालांकि इनकी राह आसान नहीं है क्योंकि दोनों ही पार्टियों में भितरघात की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। ऐसे में बोर्ड गठन में 12 निर्दलीय पार्षदों की भूमिका अहम रहेगी। दिवंगत सभापति सोलंकी के विश्वासपात्र पार्षद चाहते हैं कि कांगे्रस, भाजपा व निर्दलीय पार्षदों के सहयोग से मांगीलाल भाटी, जो कि सोलंकी के साले हैं, को सर्वसम्मति से मैदान में उतारा जाए। इस संबंध में सोलंकी के विश्वासपात्र भाजपा, कांग्रेस के अलावा निर्दलीय पार्षद बंद कमरे में मंथन करने में जुटे हैं।
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जयपुर तक हलचल तेज
मौजूदा बोर्ड का कार्यकाल पूरा होने पर अगस्त 2020 में चुनाव होंगे। मई या जून में आचार संहिता प्रभावी होने की स्थिति में बोर्ड के पास अक्टूबर से मई तक करीब सात माह का समय बचेगा। सभापति के निधन के बाद कार्यभार देने के संबंध में सरकार की ओर से किसी प्रकार का आदेश जारी नहीं करने व उप सभापति इस्लामुद्दीन के सभापति का कार्यभार ग्रहण करने के कुछ समय बाद ही उप चुनाव की घोषणा किए जाने की राजनीतिक गलियारों में चर्चा है। उधर, कांग्रेस पार्षदों का दावा है कि 30 से अधिक पार्षदों का उन्हें समर्थन है ऐसे में भाटी का सभापति बनना तय है।
Published on:
23 Sept 2019 06:16 pm
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